हजारों साल पहले हो गया था बिजली का आविष्कार, अगस्त्य ऋषि की अगस्त्य संहिता में मौजूद हैं साक्ष्य

agastya samhita

प्राचीन भारत में कई सारे महान् ऋषि मुनियों ने जन्म लिया था। जिन्होंने केवल धार्मिक आधार पर ही सभ्य समाज की आधारशिला नहीं रखी थी, बल्कि उन्होंने कई सारे वैज्ञानिक आविष्कार भी किए थे।

हालांकि आधुनिक समय में भारत समेत संपूर्ण विश्व, भारतवर्ष के अद्भुत इतिहास को भुला चुका है। जिसके चलते आज हम आपका परिचय प्राचीन भारत के महान् वैज्ञानिक अगस्त्य ऋषि और उनकी प्रसिद्ध रचना अगस्त्य संहिता से कराने वाले हैं।

जिनकी अगस्त्य संहिता से आपको थॉमस अल्वा एडीसन, न्यूटन, आइंस्टीन, बेंजामिन फ्रैंकलिन और माइकल फैराडे की भांति अनेकों बिजली उपकरणों के अविष्कारों के बारे में पता लगेगा।

ऐसे में कहा जा सकता है कि बिजली का अविष्कार उस दौर में ही हो गया था, जब भारत को केवल ऋषि मुनियों की कर्मभूमि कहा जाता था।

ऐसे में अगस्त्य ऋषि की अगस्त्य संहिता के बारे में जानने से पहले हम आपको अगस्त्य ऋषि के बारे में बताएंगे। ताकि आप इन महान् ऋषि और इनकी रचना के बारे में विस्तार से जान सकें।

अगस्त्य ऋषि कौन थे?

सनातन धर्म में मुख्य तौर पर सात ऋषियों को सप्तऋषियों का दर्जा दिया गया है। जिनमें से एक हैं अगस्त्य ऋषि। वर्तमान में इनका आश्रम महाराष्ट्र के नासिक में मौजूद है।

जिनके विषय में प्रचलित है कि इन्होंने राक्षसों के आतंक से देवताओं की रक्षा करने के लिए समुद्र पान किया था। इनके पिता का नाम पुलस्त्य ऋषि था और इनका विवाह विदर्भ के राजा की पुत्री लोपामुद्रा से हुआ था।

जिनसे इनको दृढ़च्युत नामक पुत्र की प्राप्ति हुई थी। अगस्त्य ऋषि राजा दसरथ के राजगुरु थे। यही कारण है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम वनवास के दौरान अगस्त्य ऋषि के आश्रम में ही ठहरे थे। इन्होंने ही प्रथम वेद ऋग्वेद में 165 से लेकर 191 सूक्तों की रचना की है।

साथ ही इन्हें केरल के प्रसिद्ध मार्शल आर्ट कलरीपायट्टू की दक्षिणी शैली वर्मक्कलै का संस्थापक भी माना जाता है। अगस्त्य ऋषि भगवान शंकर के श्रेष्ठ शिष्यों में से एक थे, जिनका संबध अगस्त्य वंशियों से था।

अगस्त्य ऋषि को मंत्र दृष्टा भी कहा गया है। अर्थात् इन्होंने मंत्रों की शक्ति को सच होते देखा था। जिसके चलते इन्होंने भी अपनी मंत्र शक्ति से विंध्याचल पर्वत को झुकाकर दक्षिण भारत को समूचे भारतवर्ष से जोड़ दिया था।

यही कारण है कि अगस्त्य ऋषि को दक्षिण भारत में काफी लोकप्रियता हासिल है। अगस्त्य ऋषि के बारे में जानने के बाद हम अगस्त्य संहिता के बारे में जानेंगे।


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अगस्त्य संहिता क्या है?

‘अगस्त्य संहिता’ अगस्त्य ऋषि की लोकप्रिय रचना है। जिसमें उन्होंने बिजली उत्पादन और उपयोग के बारे में विस्तार से वर्णन किया है।

अगस्त्य संहिता में बिजली उत्पादन के बारे में लिखा है कि….

संस्थाप्य मृण्मये पात्रे ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्‌। छादयेच्छिखिग्रीवेन चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥ दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:। संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्‌॥

अर्थात् एक मिट्टी का बर्तन लें, उसमें कॉपर शीट (ताम्र पट्टिका) डालें। उसके बाद उसमें कॉपर सल्फेट (शिखिग्रीवा) डालें।

फिर उसके चारों ओर गीली काष्ट पांसु लगाएं, उसके बाद उसमें मर्करी (पारा) या जिंक (दस्त लोष्ट) डालें। उसके बाद उसमें तारों के प्रकाश को मिलाएं, तभी बिजली (मित्रा वरुणशक्ति)  का उत्पादन होगा।

इसके अलावा, अन्य भी कई तरीकों से बिजली का उत्पादन किया जाता है। जैसे:-

  • तड़ित: रेशमी वस्त्रों के घर्षण से उत्पन्न बिजली।

  • हृदनि: स्टोर या हृद से उत्पन्न बिजली।

  • शतकुंभी: सौ सेलों या कुंभों से उत्पन्न बिजली।

  • सौदामिनी: रन्नों के घर्षण से उत्पन्न बिजली।

  • विद्युत: बादलों के माध्यम से उत्पन्न बिजली

  • अशनि: चुंबकीय घर्षण से उत्पन्न बिजली।


अगस्त्य संहिता में बिजली के उपयोग के बारे में भी जानकारी मिलती है

  1. अगस्त्य संहिता में बिजली का उपयोग इलेक्ट्रो प्लेटिंग के माध्यम से करने का भी वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त इस संहिता में बैटरी के माध्यम से सोना-चांदी की पॉलिश की विधि का भी वर्णन किया गया है।

  2. अगस्त्य ऋषि ने अपनी इस रचना में पानी से बिजली बनाने की विधि का भी वर्णन किया था।

    जिसे निम्न श्लोक में वर्णित किया गया है…

अनने जलभंगोस्ति प्राणो दानेषु वायुषु।
एवं शतानां कुंभानांसंयोगकार्यकृत्स्मृत:॥

अगस्त्य संहिता में विमान उड़ाने और आकाश में उड़ने वाले गर्म गुब्बारों की तकनीक का भी वर्णन किया गया है। 

3. प्राचीनकाल में बिजली के तारों को रिज्जू कहा जाता था। जिन्हें अनेक प्रकार की धातुओं से तैयार किया जाता था। जिसका उल्लेख भी अगस्त्य संहिता में मिलता है। जोकि निम्न है….

नवभिस्तस्न्नुभिः सूत्रं सूत्रैस्तु नवभिर्गुणः। 
गुर्णैस्तु नवभिपाशो रश्मिस्तैर्नवभिर्भवेत्।
नवाष्टसप्तषड् संख्ये रश्मिभिर्रज्जवः स्मृताः।।

4. अगस्त्य संहिता में वर्णित है कि यदि हाइड्रोजन (उदानवायु) को किसी वस्त्र के साथ बांध दिया जाए, तो वह वस्त्र आकाश में उड़ सकता है। जिसे साथ ही यह तकनीक विमान रोकने के लिए भी प्रयोग में लाई जाती है। जिसका वर्णन निम्न है….

वायुबंधक वस्त्रेण सुबध्दोयनमस्तके। उदानस्य लघुत्वेन विभ्यर्त्याकाशयानकम्।।

5. उपरोक्त संहिता में बताया गया है कि जैसे नाव जल पर चलती है, वैसे ही विमान आकाश में उड़ता है। ठीक इसी प्रकार से, प्राचीनकाल में एक ऐसा रेशमी वस्त्र भी मौजूद था, जिसमें हवा भरकर उसे विमान विद्या या बिजली उत्पादन के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। जिसके निम्न श्लोक से वर्णित किया गया है…

जलनौकेव यानं यद्विमानं व्योम्निकीर्तितं।
कृमिकोषसमुदगतं कौषेयमिति कथ्यते। 
सूक्ष्मासूक्ष्मौ मृदुस्थलै औतप्रोतो यथाक्रमम्।। 
वैतानत्वं च लघुता च कौषेयस्य गुणसंग्रहः। 
कौशेयछत्रं कर्तव्यं सारणा कुचनात्मकम्। 
छत्रं विमानाद्विगुणं आयामादौ प्रतिष्ठितम्।।

इस प्रकार, अगस्त्य ऋषि की अगस्त्य संहिता में ऊर्जा के उत्पादन, उपयोग और उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिसके आधार पर ही आधुनिक बिजली उत्पादन की तकनीकों को व्यवहार में लाया जा रहा है।

हिंदू धर्म के प्राचीन और पौराणिक ग्रंथों में अगस्त्य ऋषि और उनकी संहिता का जिक्र किया गया है। और अगस्त्य संहिता से जुड़े अनेक तथ्यों को लेकर कई शोधार्थियों ने खोज की है। जिसके आधार पर ही इसे बिजली उत्पादन का प्राचीन भारतीय और प्रमुख वैज्ञानिक स्रोत माना जाता है।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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