ऋग्वेद बताए गए समय से भी है अधिक प्राचीन, जानिए किस युग में हुई थी इसकी रचना…

Rigveda

वेदों को हिंदू धर्म की आत्मा कहा गया है। जोकि समस्त धार्मिक ग्रंथों में सबसे प्राचीन और लिखित ग्रंथ के तौर पर जाने जाते हैं। जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व है।

हिंदू धर्म में 4 प्रकार के वेद मौजूद हैं। जिन्हें हम ऋग्वेद, यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद के नाम से जानते हैं। उपरोक्त वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रंथ है, जिसके ही भागों के तौर पर अन्य तीन वेद माने गए हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋग्वेद का रचनाकाल 1500 ईसा पूर्व माना जाता है, जबकि इतिहासकारों का मानना है कि ऋग्वेद की रचना मानव सभ्यता की स्थापना से भी पहले हुई थी, यानि इस वेद का संबंध प्राचीन युगों से रहा है।

इसके साथ ही ऋग्वेद में जिन बातों या शब्दों का उल्लेख किया गया है, उससे यह साबित होता है कि ऋग्वेद अस्तित्व में तभी आ गया था, जब धरती पर मानव जीवन की स्थापना हुई थी।

इतना ही इसमें लोक परलोक की विभिन्न शक्तियों को मंत्रों और स्तुतियों के माध्यम से भी दर्शाया गया है, जोकि इसकी प्राचीनता को और अधिक पुख्ता करते हैं। ऐसे में हमारे आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको ऋग्वेद की प्राचीनता के बारे में बताने वाले हैं।

ऋग्वेद के बारे में जानने से पहले हम वेद के बारे में जानेंगे।

वेद सम्पूर्ण जगत में अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान रूपी प्रकाश फैलाते हैं। सामान्य शब्दों में, वेद देवताओं की वाणी कहे जाते हैं, जिन्हें ऋषि मुनियों द्वारा  लिखित तौर पर वर्णित किया गया है।

आरंभ में वेद पांडुलिपियों के रूप में पाए गए थे, जिन्हें बाद में धार्मिक ग्रंथों के तौर पर स्थापित किया गया। 

वेदों से हमें अनेकों देवी देवताओं की स्तुति, ज्ञान-विज्ञान, जड़ी-बूटियों और विभिन्न मंत्रों के बारे में जानकारी मिलती है।

इन्हें श्रुति भी कहा जाता है, जिससे तात्पर्य देव वाणी से है, जोकि ईश्वर द्वारा प्राचीन और तपस्वी ऋषि मुनियों को सुनाई गई थी।

वेद धरती पर धर्म की रक्षा और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए मौजूद हैं। जिसकी उत्पत्ति का श्रेय त्रेता से लेकर द्वापर युग में हुए अनेक महान् व्यक्तियों को दिया जाता है।

माना जाता है कि प्राचीन समय में केवल एक ही वेद मौजूद था, जिसे हम ऋग्वेद के नाम से जानते हैं। जिसके बाद स्वर्ग लोक में अग्नि, वायु, अंगिरा और आदित्य ऋषियों को भगवान ने वेदों का ज्ञान दिया था।

जबकि द्वापरयुग में ऋषि वेदव्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया था। ऋग्वेद से निर्मित अन्य तीन वेदों की शिक्षा ऋषि वेदव्यास ने अपने शिष्यों पैल (ऋग्वेद), वैशम्पायन (यजुर्वेद), जैमिनी (सामवेद), सुमन्तु (अर्थर्ववेद) को दी थी।

जिनमें ऋक को धर्म, यजु को मोक्ष, साम को काम व अथर्व को अर्थ की संज्ञा दी जाती है।

जबकि अन्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम के जन्म से पूर्व ऋषि पुरुरवा ने ऋग्वेद को दो भागों में विभाजित किया था। जबकि इसके अंतिम वेद अर्थर्ववेद की रचना का श्रेय ऋषि अथर्वा को दिया जाता है।

इस प्रकार, समस्त वेद को ब्रह्म देव की वाणी कहा गया है, जिसमें लिखी बातों या मंत्रों को पूर्णतया सत्य और तार्किक माना जाता है, और वेद अनेक धार्मिक ग्रंथों जैसे गीता और रामायण आदि से भी प्रमुख माने गए हैं।

क्या ऋग्वेद है सबसे प्राचीन वेद?

वेदों में ऋग्वेद को प्रथम वेद की संज्ञा दी गई है। जिसकी करीब 30 हजार पांडुलिपियों को ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर यूनेस्को ने संभालकर रखा है। ऋग्वेद में देवताओं की स्तुति से संबंधित अनेक मंत्रों का उल्लेख किया गया है।

जिसमें 10 मंडल, 21 शाखाएं, 1028 सूक्तियां और 10,600 मंत्र मौजूद हैं। इसके साथ ही 33 कोटि के देवी-देवताओं, सरस्वती, गंगा, यमुना समेत 24 नदियों, हिमालय पर्वत, जन समूहों, वैश्यों, जनपदों, समितियों, कृषि, वस्त्रों,  युद्ध, सोम रस, गौ माता, जुलाहों, चिकित्सा आदि के बारे में भी ऋग्वेद में उल्लेख किया गया है।

ऋग्वेद हिंद और यूरोपीय भाषा परिवारों के प्रथम लिखित धार्मिक ग्रंथ के तौर पर जाना जाता है। जोकि अब तक का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है।  जिसकी रचना का श्रेय विश्वामित्र, अत्रि, वामदेव, गृत्सदय, वशिस्थ भारद्वाज जैसे महान् ऋषि मुनियों को दिया जाता है। 

ऋग्वेद की प्राचीनता को सिद्ध करते विद्वानों के अनेक तथ्य

ऋग्वेद की प्राचीनता या रचनाकाल को लेकर विद्वानों ने अलग-अलग तर्क दिए हैं। जिनका वर्णन आगे किया गया है।

प्रो. मैक्स मूलर के अनुसार, ऋग्वेद की रचना 1000 ईसा पूर्व हुई थी। उनके मुताबिक ऋग्वेद में वर्णित श्लोकों की रचना या उत्पत्ति के बारे में पता लगाना किसी साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं है।

जबकि जे. हैर्तल ऋग्वेद का रचना स्थल ईरान को मानते हैं, उनके अनुसार 550 ईसा पूर्व इसकी रचना हुई थी। उधर, जी. ह्यूसिंग के मुताबिक, ऋग्वेद की रचना 1000 ईसा पूर्व हुई थी, उन्होंने अफगानिस्तान को ऋग्वैदिक काल की उत्पत्ति का स्थान बताया है।

नक्षत्रों के जानकार प्रो. जैकोबी और लुडविग ने ऋग्वेद को तीसरी सेहम्राब्दी की रचना बताई है। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने वैदिक साहित्यों का रचनाकाल 6000 ईसा पूर्व बताया है।

कई विद्वानों का मानना है कि ऋग्वेद के श्लोकों और मंत्रों की भाषा काफी प्राचीन है, जिससे इसके अधिक पुराने होने के साक्ष्य मिलते हैं।

जबकि कई लोग मानते हैं कि जब 500 ईसा पूर्व बौद्ध धर्म अस्तित्व में आया, तभी वैदिक साहित्य भी रचित किए गए थे, जोकि ऋग्वेद के अधिक प्राचीन होने वाली बात को सत्य सिद्ध करते हैं।

इस प्रकार, ऋग्वेद जिसका रचनाकाल 1500 ईसा पूर्व माना गया है। उपरोक्त आधारों पर इसे उपरोक्त समय काल से भी अधिक प्राचीन और उपयोगी माना गया है, जोकि इसकी ऐतिहासिकता और महत्व को बताए गए संभावित वर्षों से भी प्राचीन बनाता है।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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