मेसोपोटामिया, चीन और मिस्र से भी प्राचीन है भारत की सभ्यता..जानिए कैसे इतिहासकारों ने छुपाया सच?

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वैश्विक दृष्टि से देखें तो पाएंगे कि आधुनिक इतिहासकारों ने रोम, यूनान, चीन, मिस्र और मेसोपोटामिया (इराक) की सभ्यता को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं का दर्जा दिया है। जिनका काल लगभग 753 ईसा पूर्व से लेकर 5000 ईसा पूर्व तक बताया जाता है।

उनके अनुसार, विश्व की उपरोक्त सभ्यताएं सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण है, जबकि भारतीय सभ्यता को उन्होंने आधुनिक इतिहास से जोड़कर दिखाया है। हमारे आज के इस लेख में हम आपके समक्ष कुछ ऐसे तथ्य प्रस्तुत करने वाले हैं, जिसके आधार पर आप स्वयं यह अनुमान लगा सकते हैं कि भारतीय सभ्यता विश्व की अन्य सभी सभ्यताओं से कितनी प्राचीन है?

गीता में मौजूद हैं साक्ष्य

ऐसे में अगर बात करें भारतीय सभ्यता की प्राचीनता के बारे में, तो हम देखेंगे कि भारत की सभ्यता बताए गए समयकाल से भी अधिक प्राचीन है। जिसके बारे में जानकारी हमें श्रीमद्भागवत गीता के अस्तित्व में आने से पता चलती है। श्रीमद्भागवत गीता का महत्व भारतीयों समेत विदेशियों द्वारा भी स्वीकार किया गया है।

ऐसे में आने वाली 3 दिसंबर को गीता जयंती मनाई जाएगी, जिसकी इस वर्ष 5159 वर्षगांठ मनाई जाएगी। यानि श्रीमद्भागवत गीता इतनी प्राचीन है, जिसके अस्तित्व के आधार पर ही ये माना जाता है कि भारतीय सभ्यता विश्व की अन्य सभी सभ्यताओं से अधिक प्राचीन है। 

सिंधु घाटी है भारतीय सभ्यता की प्राचीनता का प्रमाण

साल 1921 में जब दयाराम साहनी और राखाल दास बनर्जी ने हड़प्पा में सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की थी, तब खुदाई में मिले साक्ष्यों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया था कि सिंधु घाटी सभ्यता आज से करीब 5500 साल यानि 3500 ईसा पूर्व प्राचीन है।

लेकिन ब्रिटेन के एक जर्नल में साल 2016 में छपा कि सिंधु घाटी सभ्यता 5500 नहीं बल्कि, 8000 वर्ष यानि 6000 ईसा पूर्व प्राचीन सभ्यता है, जोकि विश्व की अन्य सभी सभ्यताओं से कहीं अधिक प्राचीन है।

इसी जर्नल में इस बात का भी जिक्र किया गया था कि सिंधु सभ्यता दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता है, जिसमें ही शिक्षा और नगरों का विकास हुआ था। जबकि आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने भी खोज और सिंधु घाटी सभ्यता में खुदाई के आधार पर मिली वस्तुओं के माध्यम से ये निष्कर्ष निकाला कि हड़प्पा सभ्यता करीब 6000 साल पुरानी है।

सिंधु सभ्यता से भी अधिक पुरानी है सरस्वती नदी से जुड़ी ये भारतीय सभ्यता

इतिहासकारों ने जब सिंधु नदी के आसपास हड़प्पा और मोहनजोदड़ो नामक सभ्यताएं खोज निकाली। तो उसके बाद अधिक विश्लेषण करने पर ये ज्ञात हुआ कि इससे भी पूर्व में जब करीब 1700 से लेकर 1800 ईसा पूर्व तक सरस्वती नदी बहती थी, तब उसके आसपास भी काफी उन्नतशाली नगर और सभ्यताएं हुआ करती थी।

जिसका जिक्र हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। इतना ही नहीं, हिंदुओं के प्रथम वेद ऋग्वेद में सरस्वती नदी को सबसे बड़ी नदी का दर्जा दिया गया है। जिससे ज्ञात होता है कि सिंधु सभ्यता से पहले भी सरस्वती सभ्यता हुआ करती थी, जोकि सिंधु सभ्यता से भी हजारों वर्ष पुरानी है।

भारत में मौजूद थीं और भी कई प्राचीन सभ्यताएं

भारतीय मानव सभ्यताएं इससे भी प्राचीन हैं। अगर हम आधुनिक इतिहास को आधार ना मानते हुए विभिन्न विद्वानों और शोधकर्ताओं की खोज पर नजर डालें तो पाएंगे कि भारत में मौजूद अनेकों सभ्यताएं विश्व की सभ्यताओं से काफी प्राचीन हैं।

जिनमें तमिल संगम सभ्यता, नर्मदा घाटी सभ्यता, महानदी सभ्यता, गंगा घाटी सभ्यता, ब्रह्मपुत्र नदी सभ्यता आदि प्रमुख है।

तमिल संगम सभ्यता

जहां तमिल संगम सभ्यता की खोज के दौरान मालूम पड़ा कि आज से करीब 200 ईसा पूर्व यहां मानव रहा करते थे। जबकि यहां खुदाई में मिली वस्तुओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये वस्तुएं करीब 6 ईसा पूर्व से लेकर 3 ईसा पूर्व की हैं।

भारतीय इतिहासकारों के अनुसार, जब गंगा नदी के तट पर मानव सभ्यता विकसित हुई थी, उसी दौरान दक्षिण के तमिलनाडु राज्य में मानव सभ्यता का विकास हुआ था। जहां के लोग उत्तर भारत और रोमनों के साथ व्यापार किया करते थे।

यहीं से खुदाई के दौरान ईंटे, कलाकृतियां, चाबियां, मिट्टी के खिलौने, जानवरों की हड्डियां आदि भी प्राप्त हुई थीं। तमिल संगम सभ्यता की समय अवधि तीन शताब्दियों पुरानी मानी जाती है, जिसे कीझाड़ी सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है।

नर्मदा नदी सभ्यता

नर्मदा नदी के किनारे जब करीब 5 से 6 लाख वर्ष पुराना मानव कंकाल मिला, तब ये स्पष्ट हुआ कि नर्मदा नदी के आसपास भी मानव सभ्यता विकसित थी। इतना ही नहीं, इस नदी के आसपास ही डायनासोर और विशालकाय जीवों के भी कंकाल मिले हैं।

जबकि इस नदी के समीप में ही करीब आज से 2200 वर्ष पुराने नगरों के साक्ष्य मिले हैं। इतना ही नहीं, यहां मौजूद एक गुफा में करीब 10,000 साल पहले के शैल चित्र पाए गए हैं, जिनमें अनेक शैल चित्र एलियंस प्रजाति की ओर इशारा करते हैं।

ये नर्मदा नदी से जुड़ी नर्मदा घाटी सभ्यता मध्य प्रदेश के जबलपुर, होशंगाबाद, खंडवा, भीमबैठका, ओंकारेश्वर, अंगारेश्वर आदि स्थानों तक स्थापित थी। जहां अनेक जानवरों और कलाकृतियों से जुड़े चित्र दीवारों और गुफाओं आदि में बने पाए गए हैं।

महानदी सभ्यता

छत्तीसगढ़ की गंगा के नाम से प्रसिद्ध महानदी के किनारे भी मानव सभ्यता का उद्गम माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, आज से करीब 10,000 वर्ष पूर्व यहां मानव सभ्यता मौजूद थी। जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामायणकाल में इसी स्थान पर रहकर भगवान श्री राम ने अपना वनवास काटा था।

इस प्रकार, छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के समीप बहने वाली महानदी भी प्राचीन भारतीय सभ्यता का इतिहास स्वयं में समेटे हुए है। यहां खुदाई के दौरान अत्यंत पुराना शमशान घाट और बंदगाह मिला है,

लेकिन इतिहासकार अभी सही तरीके से इसकी प्राचीनता को दुनिया के सामने नहीं ला पाए हैं, लेकिन शोध और निवासियों के तर्क को आधार मानें, तो आज से करीब 3000 साल पहले महानदी अपने उफान पर थी, यानि उसी दौरान वहां मानव सभ्यता विकसित थी। 

गंगा घाटी सभ्यता

इतिहासकारों और धार्मिक विशेषज्ञों की मानें तो गंगा प्राचीनकाल से ही भारत की सबसे पूजनीय नदी रही है। माना जाता है कि इसके आसपास सबसे पहले अनेक प्रकार की भारतीय सभ्यताओं का विकास हुआ होगा।

गंगा नदी उत्तराखंड के हरिद्वार से निकलकर प्रयागराज पहुंचती है, वहां से भागलपुर होते हुए अन्य कई नदियों के संपर्क में होते हुए पश्चिम बंगाल निकलती है।

इसके बाद गंगा नदी दो शाखाओं, भागीरथी और पद्मा में परिवर्तित हो जाती है, उसके बाद भागीरथी दक्षिण दिशा में बहती है और पद्मा नदी दक्षिण पूर्व तक बहते हुए बंगला देश में निकलती है, उसके बाद भागीरथी और पद्मा दोनों ही गंगा नदियां बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती हैं।

तो सोचिए, गंगा नदी के मुहानों पर बसी मानव सभ्यताएं कितनी प्राचीन और संख्या में रहीं होगी। ऐसे में गंगा नदी के आसपास मौजूद सभ्यताओं को भारत की प्राचीन गंगा घाटी सभ्यता के नाम से जाना जाता है।

ब्रह्मपुत्र नदी सभ्यता

ब्रह्मपुत्र भारत समेत एशिया के अनेक देशों में बहने वाली सबसे लंबी नदी है। माना जाता है कि इस नदी का प्राचीन काल भी अनेक सभ्यताओं से जुड़ा रहा है। इस नदी के आसपास ही आर्य, द्रविड़, बर्मा, मंगोल, मुगल, तिब्बती आदि जनजातियों ने अपनी संस्कृतियों का फैलाव किया है।

वर्तमान में यह नदी तिब्बत देश के मानसरोवर से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है। जिसमें भारत के उत्तर पूर्व में बहने वाली सारी नदियां ब्रह्मपुत्र में ही समा जाती हैं।

इस प्रकार, इसके आसपास मौजूद प्राचीन भारतीय सभ्यताओं की बात की जाएं, तो इसकी विशालता और प्राचीनता को देखते ये कहा जा सकता है कि अगर खोज की जाए तो इतिहासकारों को ब्रह्मपुत्र के समीप भी अनेक प्राचीन भारतीय सभ्यताओं और संस्कृतियों का उद्गम मिलेगा।


ऐसे में, ये उपरोक्त कुछ प्राचीन भारतीय सभ्यताएं हैं, जिनकी प्राचीनता और विशालता विश्व की अनेकों प्राचीन सभ्यताओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और जानने योग्य है।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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