कलियुग कैसे समाप्त होगा और इसके बाद क्या होगा?

Kalyug

कलियुग हिंदू पुराणों में उल्लेखित चारों युगों में से एक है। जिसका अर्थ है अज्ञानी और पापियों की दुनिया।
सरल शब्दों में, हम अभी जिस युग में रह रहे हैं, उसे कलियुग की संज्ञा दी गई है। जिसके अंत के विषय में कहा गया है कि….

अनावृष्टया विनड्ंक्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिता:।

शीतवातातपप्रावृड्: हिमैरन्योन्यत: प्रजा:।।

तात्पर्य यह है कि कलियुग के अंत समय में धरती पर पानी नही बरसेगा, जिससे पानी की कमी हो जाएगी। मौसम कभी अत्यधिक सर्द होगा, तो कभी अत्यधिक गर्म।

कहीं मनुष्य आंधी का सामना करेंगे और कहीं बाढ़ का कहर बरपेगा। जिससे धीरे-धीरे मनुष्य विनाश की ओर अग्रसर होने लगेगा। 


कुल मिलाकर, जब धरती पर पाप और अधर्म अपने चरम स्तर पर पहुंच जाएगा, तब कलियुग का अंत निश्चित है। हालांकि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कलियुग की समाप्ति को लेकर समस्त पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग बातें कहीं गई है।

जिनके बारे में जानकर हम आगे अपने लेख में कलियुग के विनाश के बारे में विस्तार से जानेंगे।

कलियुग के अंत के बारे में जानने से पहले हम कलियुग के जन्म के बारे में बात करेंगे। 

कलियुग का जन्म कैसे हुआ?


भारतवर्ष में सनातन धर्म को सबसे प्राचीन माना जाता है। जिसकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग का आरंभ 3102 ईसा पूर्व हुआ था।

जिसकी गणना भारत की भूमि पर जन्मे गणित के महान् विशेषज्ञ आर्यभट्ट के जन्म से की जाती है। जिनका जन्म 476 ईसा पूर्व हुआ था, उनके अनुसार, जब वह मात्र 23 वर्ष के थे, तब कलियुग 3600 साल पुराना था। 

महाभारत काल के अनुसार, जब पांडव अपना सारा राजपाठ राजा परीक्षित को सौंपकर स्वर्ग की ओर चले गए थे। तब से भी कलियुग के आरंभ होने की बात कही जाती है।

क्योंकि राजा परीक्षित बहुत दयालु प्रवृत्ति के राजा थे, जिन्होंने ही कलियुग के बार-बार निवेदन पर उसे धरती पर रहने की आज्ञा दी थी।

इस दौरान उन्होंने उसके समक्ष यह शर्त रखी थी, कि वह केवल उन्हीं मनुष्यों के साथ रहेगा, जो अधर्मी, लालची और द्वेष से परिपूर्ण होगा।

लेकिन कलियुग ने धीरे धीरे सम्पूर्ण पृथ्वी पर अपना कब्जा कर लिया और राजा परीक्षित की मृत्यु के पश्चात् हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली। 

जबकि, कई धार्मिक पुराणों के अनुसार, द्वापर युग के बाद कलियुग का जन्म माना गया। अर्थात् जब भगवान श्री कृष्ण द्वारिका छोड़कर बैकुंठ धाम चले गए थे, तब कलियुग का आरंभ हुआ था।

जिसके बारे में गुजरात स्थित भालका तीर्थ मंदिर में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है, कि कलियुग का जन्म 18 फरवरी 3102 ईसा पूर्व मध्य रात्रि में हुआ था। इस तथ्य के आधार पर धरती पर कलियुग को अभी 5000 साल ही हुए हैं।

धार्मिक गणनाओं के मुताबिक, देवी देवताओं का 1 साल मनुष्यों के 1 दिन और 1 रात के बराबर होता है। ऐसे में देवी देवताओं का 1 महीना इंसानों के 30 साल के बराबर होता है।

जिसके मुताबिक अभी कलियुग का अंत होने में 4,27,000 साल शेष है, क्योंकि अभी कलियुग ने 5000 साल ही धरती पर बिताए हैं।

कलियुग के जन्म के बाद अब हम इसके अंत के बारे में जानेंगे।



कलियुग का अंत कैसे होगा?


इसको लेकर अनेक धर्म ग्रंथों में अलग-अलग मत दिए गए है। जिनको हम एक एक करके जानेंगे। 

  • ब्रह्मपुराण: इसके अनुसार, कलियुग की आयु केवल 10,000 साल बताई गई है। 
  • ज्योतिष ग्रंथ: इसके अनुसार, कलियुग की आयु 4,32,000 निर्धारित की गई है। जिनमें से 4,27,000 साल कलियुग की समाप्ति में अभी शेष हैं।

उपरोक्त के शीर्ष निष्कर्ष के आधार पर संभावित कलियुग के अंत की घोषणा नहीं की जा सकती। लेकिन कई ऐसी वजहें जोकि कलियुग के अंत का कारण बनेगी, हम उनके आधार पर कलियुग के अंत के बारे में जान सकते हैं।

कलियुग के अंत को लेकर कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु धरती पर अपना 10वां कल्कि अवतार लेंगे। जोकि सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को संभल में जन्मेंगे। कहा जाता है उनके जन्म लेने के तीन दिन बाद ही कलियुग का अंत हो जाएगा।

इसके अलावा, कलियुग के अंत के दौरान धरती पानी में डूब जाएगी। स्त्री पुरुष की आयु 20 वर्ष से अधिक नहीं होने पाएगी। लोग व्रत और धार्मिक कार्यों में रुचि लेना बंद कर देंगे।

गंगा नदी पूर्णतया सूख जाएगी या उल्टी बहने लगेगी। धरती पर अन्न, फसल इत्यादि उत्पन्न नहीं हो सकेगी। व्यक्ति तामसी भोजन पर निर्भर हो जाएगा। माता पिता, गुरु को सम्मान मिलना बंद हो जाएगा।

व्यक्ति एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएंगे। स्त्रियां केवल धनी पुरुषों के पास जाएंगी। बेटा अपने मां-बाप की सेवा नहीं करेगा, वह पूर्ण रूप से बेटियों पर निर्भर हो जाएंगे।

छोटी-छोटी बच्चियों के साथ हैवानियत होने लगेगी, व्यक्ति का कद केवल 4 फुट रह जाएगा। धरती को चारों तरफ से लगभग 12 सूर्य के प्रकाशों (तापमान में वृद्धि) का सामना करना पड़ेगा।

दुनिया में आतंकवाद, कट्टरपंथ, नरसंहार आदि बड़े स्तर पर होने लगेगा। समाज में नैतिक मूल्यों का पतन होने लगेगा। धर्म, सहिष्णुता, दया, सत्य वचन का ह्रास हो जाएगा।

जिसके पास धन होगा, समाज में उसी का बोलबाला होगा। ब्राह्मण व्यक्ति केवल एक धागे को बांधकर खुद को ब्राह्मण मान लेगा। स्त्रियां बिना विवाह के शारीरिक संबंध बना लेंगी।

न्याय भी धन के हाथों बिक जाएगा। जो व्यक्ति चालक और स्वार्थी होगा, वही बुद्धिमान माना जाएगा। कलियुग के अंत समय में व्यक्ति का शरीर बीमारियों का शिकार हो जाएगा।

लोग भोजन को जीवन का अंतिम उद्देश्य बना लेंगे। लोग मन की शुद्धि के लिए गंगा जल को मैला करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रजा अपनी राजा से परेशान होकर विद्रोह का मार्ग अपना लेगी।

लोग भूख, प्यास, चिंता, अनिद्रा का शिकार हो जाएंगे। इतना ही नहीं, माना जाता है कि कलियुग के अंत समय में रात सबसे लंबी होगी, आदि अनेक चीजें कलियुग के अंत का कारण बनेंगे। जिससे स्पष्ट होता है कि धरती पर मनुष्य ही कलियुग के विनाश का कारण बनेंगे।

जबकि अन्य धार्मिक स्रोतों के मुताबिक, जिस प्रकार से सतयुग के लिए 4800 साल, त्रेतायुग के लिए 3600 साल, द्वापरयुग के लिए 2400 साल निर्धारित किए गए, ऐसे में कलियुग के लिए 1200 साल बताए गए हैं।

जिसके अनुसार, कलियुग की उम्र 43,2016 बताई गई है, जिसमें अभी कलियुग के 5000 से लेकर 6000 साल ही बीते हैं। इस आधार को मानें तो कलियुग के अंत में अभी काफी समय शेष है।

कलियुग के बाद कैसा होगा आने वाला युग


धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो कलियुग के अंत के बाद सतयुग आएगा। जिसका अवधिकाल 17 लाख 28 हजार वर्ष होगा। इस दौरान मनुष्यों की आयु 4000 से लेकर 10000 वर्ष तक होगी।

इस युग के दौरान समाज में चारों ओर धर्म और नैतिक मूल्यों की बात होगी। सत्य की जीत और मानवता की दुबारा स्थापना होगी। आत्मा का मिलन परमात्मा से साक्षात होगा।

मनुष्य परम ज्ञान और अध्यात्म को अपने जीवन का लक्ष्य मानेगा। इस युग में भौतिक सुख की जगह मानसिक सुख पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। व्यक्ति का अपनी भावनाओं पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा।


सतयुग में व्यक्ति परस्पर स्नेह और प्रेम से रहेंगे। हालांकि अभी इस युग की स्थापना में काफी समय शेष है। इससे पहले कलियुग को पूर्णतया समाप्त होना होगा, जिसके लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश धरती से अधर्म का नाश करके यहां धर्म की पुन: स्थापना करेंगे।

इस प्रकार, हमने जाना कि कलियुग का अंत कब होगा, साथ ही कैसे कलियुग की समाप्ति के बाद नया युग आएगा, जोकि स्वर्ग यानि सतयुग कहलाएगा।

जहां सज्जन और गुणवान व्यक्ति अपने ज्ञान और विचारों से प्रताप का परचम लहराएंगे। यहां अज्ञानता, अधर्म और पापियों का कोई स्थान नहीं होगा।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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