राजस्थान का अद्भुत रेल और महल जैसे लुक वाला सरकारी स्कूल, दुनियाभर में हो रही इसकी चर्चा

rajasthan rail school

राजस्थान के शेरपुर में एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को भारतीय रेल और हेरिटेज लुक दिया गया है। जिससे कि वो विद्यालय आजकल देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विद्यालय को देखने के लिए विदेशी नागरिक और आगरा टूरिज्म के अधिकारियों ने दौरा किया था।

इस स्कूल के ट्रेन जैसे लुक को देखकर बच्चे यहां पढ़ने की जिद करने लगे हैं। हम सभी बचपन में अपने अपने स्कूलों में छुट्टी होने के समय ऐसा गाते थे न कि ‘छुट्टी होने वाली है रेल का डिब्बा खाली है’ तो ऐसा लगता है जैसे यहां के हेडमास्टर ने इसी बात पर गौर करते हुए इस स्कूल का पुनर्निर्माण कराया है।

देश में जिस तरह से प्राइवेट स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है उससे तो आजकल सभी लोग हैरान हैं। रोज रोज नए स्कूल खोलने से इनमें कंपटीशन बढ़ता ही जा रहा है। जिस कारण से स्कूलों की फीस भी उतनी ही ज्यादा बढ़ती जा रही है।

प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मनमानी से फीस हड़प रहे हैं, जिसके चलते मध्यम वर्ग के अभिभावक अपने बच्चों की फीस भरने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी स्कूलों की छवि धीरे-धीरे सुधरती जा रही है। क्योंकि फीस कम होने के साथ-साथ ये स्कूल अब बेहतर सुविधा प्रदान कर रहे हैं। 

ऐसे ही सरकारी स्कूलों को बच्चों के लिए और अधिक उपयोगी और पढ़ाई के साथ साथ मनोरंजक बनाने के लिए राजस्थान सरकार अनेकों प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राजस्थान राज्य के धौलपुर के एक सरकारी स्कूल का नाम आता है।

जोकि बहुत दिनों तक बंद होने के बाद अब फिर से खोल दिया गया है। लेकिन अब इस स्कूल की छवि पूरी तरह से बदल दी गई है। इस स्कूल में सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि विदेशी मेहमान भी उसे देखने आ रहे हैं। 

धौलपुर के इस स्कूल में लगातार बच्चों की संख्या कम होती जा रही थी। जब इस स्कूल में मात्र 30 विद्यार्थी ही रह गए  तो सरकार ने अन्य सरकारी स्कूलों की लिस्ट से मिलाने के बाद साल 2014 में इस स्कूल को बंद करने का आदेश दे दिया था। सरकार के इस आदेश का ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया।

सरकार के इस फैसले से ग्रामीणों में बहुत गुस्सा बढ़ गया और लोगों ने सरकार को रोज ज्ञापन भेजकर स्कूल फिर से शुरू करने की मांग की। ऐसा ग्रामीणों ने लगभग लगातार तीन महीनों तक किया। ग्रामीणों की मांग पर सरकार ने पुनः राज्यकीय प्राथमिक विद्यालय शेरपुर को फिर से खोलने की अनुमति दे दी।

शेरपुर के इस स्कूल को फिर से शुरू करने के बाद बच्चों का नामांकन बढ़ाने और अभिभावकों का ध्यान स्कूल की ओर खींचने के लिए यहां के हेड मास्टर राजेश शर्मा ने स्कूल के स्टाफ के साथ मिलकर सबसे पहले स्कूल के लुक को भारतीय रेल के डिब्बों जैसा कर दिया।

स्कूल की कक्षाओं को रेल के डिब्बे के जैसा लुक देने में लगभग 70 हजार रुपए का खर्च आया जो कि यहां के हेडमास्टर ने अपने वेतन से दिया। इसके अलावा इसमें जयपुर शहर की इमारतों के जैसा हेरिटेज लुक देने में जो भी खर्च आया उसे यहां के ग्रामीणों, सरकारी ग्रांट, और स्टाफ मेंबर के द्वारा मिले फंड की मदद से पूरा किया गया। इसमें लगभग 52 हजार रूपए खर्च हुए।

राजस्थान में स्थित इस स्कूल की चर्चा केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में हो रही है। भारतीय रेल और हेरिटेज लुक में नजर आने वाले इस राज्यकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शेरपुर की चर्चा हर जगह जोरों शोरों से हो रही है।

इस स्कूल की व्यवस्थाओं को देखने के लिए विदेशी नागरिक और आगरा टूरिज्म के अधिकारियों ने यहां का दौरा किया था। वे लोग इस स्कूल के लुक, यहां बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं और यहां के बेहतर संचालन से इतने अधिक प्रभावित हुए हैं कि जल्द ही विदेशी मेहमानों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल को स्कूल का दौरा कराने का निर्णय ले लिया है।

इस स्कूल में बच्चों को एकाग्रता से पढ़ने के लिए लाइब्रेरी, छोटे बच्चों की सुविधाओं और पढ़ने में उनका मन लगाने के लिए प्राइवेट स्कूलों की तरह कुर्सी, मेज, झूले, खिलौने, खेलने के और भी सामान आदि के  साथ-साथ बच्चों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे, ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर, और साफ स्वच्छ शौचालय बनवाया गया है।

इस स्कूल में स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। ट्रेन की तरह दिखने वाले इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ऐसा लगता है जैसे कि वो यात्री हैं और अब छुट्टी होने पर वे अपने अपने घर जाएंगे।

Government School In Alwar Looks Like Train

इस स्कूल का लुक बदल जाने के बाद यहां अभिभावक अधिक से अधिक अपने बच्चों का नामांकन करने आ रहे हैं। धीरे धीरे इस स्कूल में नामांकन का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। अभी तक यहां लगभग 400 से ज्यादा बच्चों का नामांकन हो चुका है।

स्कूल में बढ़ते नामांकन के बाद राजस्थान सरकार ने इस साल इस स्कूल को कक्षा पांचवी से बढ़ाकर आठवीं तक करने का निर्णय लिया है। इस स्कूल के आकर्षक लुक को देखने के बाद शेरपुर के साथ-साथ यहां के आसपास के गांव के बच्चे भी इसी स्कूल में पढ़ने के लिए जिद करने लगे हैं।

इस स्कूल के हेड मास्टर के द्वारा किया गया ये विचार बहुत ही सराहनीय है। अपने इस स्कूल को बचाने, बढ़ाने और उस गांव के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए उन्होंने जो ये कदम उठाया कि स्कूल की कक्षाओं का लुक बिल्कुल भारतीय रेल के जैसा करवा देना

इससे न केवल स्कूल आगे बढ़ेगा बल्कि उस गांव और उसके आसपास के गांव के बच्चे भी जो पढ़ना नहीं चाहते वे भी इस स्कूल में आकर पढ़ना चाहेंगे। इसके बाद से यहां की सरकार ने भी अब सरकारी स्कूलों में ध्यान देना शुरू कर दिया है, जोकि बहुत जरूरी है।

केवल राजस्थान ही नहीं भारत देश के प्रत्येक राज्य को अपने राज्य में स्थित सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि हमारे देश में ऐसे बहुत से आम लोग हैं जोकि अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने में सक्षम नहीं है।

यदि प्रत्येक सरकारी स्कूलों में ऐसे ध्यान दिया जाए तो इससे बच्चों की स्कूल आने में रुचि और बढ़ेगी। बच्चे स्कूल में आकर खेल खेल में ही सही लेकिन पढ़ना चाहेंगे। स्कूल सुंदर और स्वच्छ होने के साथ-साथ ये बहुत ही जरूरी है

कि वहां पढ़ाने वाले शिक्षक भी हंसमुख, धैर्यवान, बुद्धिमान और बच्चों के साथ घुलेमिले हों, जोकि बच्चों का ध्यान पढ़ाई की ओर केंद्रित कर सकें। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। इस कारण से उनके लिए बेहतर से बेहतर शिक्षा प्रदान करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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Featured image: Patrika & Amarujala

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