जानिए भारतीय इतिहास के भुला दिए गए इस शूरवीर राजा पोरस के बारे में

rajaporus

समय-समय पर भारत की भूमि पर अनेक महान राजाओं ने जन्म लिया है। जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान कर दिया और अपना सर्वस्व मां भारती के चरणों में अर्पित कर दिया। जिनमें महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान आदि हिंदू राजाओं के नाम शामिल है।

एक ऐसे ही राजा थे राजा पोरस। राजा पोरस के बारे में भारतीय अधिक नहीं जानते हैं, क्योंकि भारतीय इतिहास की किताबों में मुगल शासकों जैसे अकबर, शाहजहां, बाबर, हुमायूं आदि की गौरव गाथाओं और उनके द्वारा स्थापित इमारतों के बारे में पढ़ाया जाता है।

जिस कारण वर्तमान पीढ़ी राजा पोरस के नाम से अधिक परिचित नहीं है। जिस कारण, हमारे आज के इस लेख में हम आपको राजा पोरस की जीवन गाथा के बारे में बताएंगे, जिससे आधुनिक और आने वाली पीढ़ी राजा पोरस के भारत की आन- बान-शान के लिए दिए गए बलिदान को जानें और कभी भूलने ना पाएं


कौन थे राजा पोरस?

उन दिनों, राजा पोरस के साम्राज्य का विस्तार पंजाब में बहने वाली झेलम नदी से लेकर चेनाब नदी तक था।राजा पोरस का संबंध पोरवा वंश से था, जिस कारण इनका राजवंश पोरस या पुरुवास के नाम से जाना जाता है। राजा पोरस की राजधानी वर्तमान लाहौर थी।

जिन्होंने 340 ईसा पूर्व से लेकर 315 ईसा पूर्व तक यहां राज्य किया था। राजा पोरस के पिता का नाम बमनी और माता का नाम अनुसुइया था, जबकि गांधार के राजा आम्भी राजा पोरस के मामा थे।

राजा पोरस का विवाह लची नामक स्त्री से हुआ था। कहा जाता है कि राजा पोरस की लंबाई करीब 7 फीट थी और वह एक अच्छे व कुशल राजा होने के साथ-साथ भौगोलिक क्षेत्र के काफी अच्छे जानकार भी थे।

राजा पोरस का संबंध है महाभारत काल से

महाभारत काल में महाराज भरत से पहले कई राजा हुए। जिनमें से एक थे राजा ययाति। राजा ययाति चंद्रवंशी राजा थे, जिनके दो पुत्र पुरु और यदु हुए। आगे चलकर पुरु, पौरवो और यदु यादवों के वंशज कहलाए।

इसी तरह से राजा पोरस भी पुरु वंश से जुड़कर चंद्रवंशी राजा कहलाए, जिनके कौशल और पराक्रम के चर्चे आज भी होते हैं। राजा पोरस के चंद्रवंशी राजा होने के प्रमाण ऋग्वेद में भी मिलते हैं। ऋग्वेद में जिस पुरा का जिक्र किया गया है, उसका संबंध राजा पोरस से माना जाता है।

आगे चलकर राजा पोरस का उत्तराधिकारी मलयकेतु कहलाया, जोकि उनके भाई का पोता था।राजा पोरस की मौत 321 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व के बीच मानी जाती रही है। इनकी मौत को लेकर भी कई मतभेद मौजूद रहे हैं।

कई लोग इनकी मौत का कारण एक विषकन्या के चलते मानते हैं, जबकि कई लोगों का मानना है, कि सिकंदर के एक सेनानायक ने ही राजा पोरस को आगे चलकर मार दिया था।

इतिहास में यह भी प्रसिद्ध है कि चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य को चहुं ओर फैलाने के कारण महान नीतिज्ञ चाणक्य ने राजा पोरस को मरवा दिया, ताकि वह चंद्रगुप्त मौर्य की विजय के बीच में ना आने पाए।

राजा पोरस ने विश्व विजयी सिकंदर को जब किया पराजित

राजा पोरस वैसे तो एक छोटे से साम्राज्य के राजा थे, लेकिन उनकी वीरता के किस्से काफी विशाल थे। साथ ही वह पंजाब और झेलम नदी के आसपास की जगहों की प्राकृतिक हलचल से पूर्णतया वाकिफ थे। जिस कारण उन्होंने सिकंदर को युद्ध में बराबर की टक्कर दी।

इतिहास में प्रसिद्ध है कि जब भारत पर आक्रमण करने के उद्देश्य से विश्व विजयी शासक सिकंदर की नजर राजा पोरस के साम्राज्य पर पड़ी, तो उसने राजा पोरस के विरुद्ध युद्ध का एलान कर दिया। तब राजा पोरस ने पूर्ण वीरता और साहस के साथ सिकंदर का सामना किया।

इतिहास में वर्णित है कि सिकंदर की सेना ने राजा पोरस की सेना के आगे घुटने टेक दिए थे। यही नहीं, राजा पोरस ने सिकंदर सेना के आगे हाथी खड़े कर दिए थे, जिस कारण सिकंदर की 50 हजार सैनिकों की सेना भी राजा पोरस के 20 हजार सैनिकों का सामना नहीं कर पाई।

और यही कारण था कि सिकंदर जोकि सिंध नदी पार करके भारत में प्रवेश करके यहां अपना शासन चलाना चाहता था, राजा पोरस के अथक प्रयासों के चलते सिकंदर को बेरंग हाथों ही लौटना पड़ा। 

जबकि सिकंदर ने राजा पोरस से हारने के बाद भी उनसे संबध बनाए रखने को दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन राजा पोरस ने अपनी मातृभूमि का कभी सौदा नहीं होने दिया।

यहां तक कि जब सिकंदर गांधार और तक्षशिला के राजा आम्भी के पास गया, तब राजा आम्भी ने गुप्त तरीके से सिकंदर का साथ दिया, क्योंकि वह राजा पोरस को अपना दुश्मन समझता था, लेकिन तब भी राजा पोरस ने सिकंदर के भारत भूमि पर कब्जे के उसके इरादों को पूरा नहीं होने दिया।

राजा पोरस और सिकंदर के मध्य ये युद्ध 326 ईसा पूर्व हुआ था, जिसको ग्रीस के इतिहास में, हाइडस्पेश की लड़ाई के नाम से जाना जाता है। राजा पोरस ने सिकंदर के अलावा भी, फारसी राजा डेरियस, जर्कसीज आदि से भी युद्ध लड़ा था, और विजय हासिल की थी।

यही कारण है कि राजा पोरस को भारतीय समाज में जन्मे महान और शूरवीर राजाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है और उनकी वीर गाथाओं को भारतीय पीढ़ी के समक्ष रखने के लिए टीवी धारावाहिकों में राजा पोरस की जीवन यात्राओं को कई बार दर्शाया भी गया है।

जिसे देखकर ये स्पष्ट होता है कि राजा पोरस का जीवन चरित्र भारतीय भूमि पर जन्मे हर व्यक्ति को जानना और उससे प्रेरणा लेना जरूरी है।हालांकि इतिहासकारों ने राजा पोरस की वीरता का जिक्र कभी भी खुलकर नहीं किया।

उन्होंने सदैव यही दर्शाया कि सिकंदर अपने जीवनकाल में कोई युद्ध नहीं हारा और राजा पोरस को भी सिकंदर ने हरा दिया था। लेकिन सच्चाई वह है जिस पर पर्दा डाला जा रहा है और झूठ वह है जो बिना तथ्यों के परोसा जा रहा है,

इसलिए ये हमारा परम कर्तव्य है कि हम अपने इतिहास को जानने के लिए राजा पोरस के जीवन के बारे में अच्छे से जानें। यही कारण है कि ग्रीक इतिहासकारों ने राजा पोरस के बारे में हर सच्चाई का जिक्र किया है, जिसका अध्ययन उन सभी भारतीयों को करना चाहिए, जिन्होंने देश के लिए कुछ करने की ठानी है।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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