आर्यन आक्रमण की थ्योरी पूरी तरह झूठी,आर्य जाति के लोग नहीं हैं भारतीयों के वंशज, जानिए क्या है सच

Aryan Invasion Theory in Hindi

भारत प्राचीन समय से ही ज्ञान-विज्ञान समेत विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों और रीति रिवाजों का केंद्र बिंदु रहा है। यही कारण है कि इसे विश्व गुरु की पदवी हासिल है, लेकिन अगर इसके लिखित इतिहास पर नजर डालें, तो पाएंगे कि इसके प्राचीन इतिहास को काफी तोड़ मरोड़ के भारतीयों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। जिससे इसकी महानता के संदर्भ में काफी भिन्नताएं देखने को मिलती है। 

भारत जोकि कभी मुगलों तो कभी ब्रिटिश शासकों की गुलामी में जकड़ा रहा, उसे आज भले ही आजादी मिल गई हो। लेकिन भारत अपनी असली पहचान पाने में आज भी नाकाम रहा है।

इसके गौरवशाली इतिहास को उन लोगों द्वारा धूमिल या नष्ट किया जा चुका है, जो कभी भी भारत और उसके नागरिकों को महान बनता नहीं देखना चाहते हैं। लेकिन कहते हैं ना कि सच तो सच होता है, वह कभी ना कभी तो बाहर आ ही जाता है।

ठीक उसी तरह से आज इस सच से भी पर्दा उठ चुका है कि भारतीयों का आर्यों से कोई संबंध रहा है। यानि भारतीय इतिहास की किताबों में पढ़ाई गई आर्यन इंवेजन थ्योरी (Aryan invasion theory) एक प्रकार का मिथ्य है, जिसे प्राचीन इतिहासकारों ने मन गढ़त तरीके से लिखकर दुनिया के सामने लाकर रख दिया है। तो चलिए जानते हैं कि असल हकीकत क्या है आर्यन इंवेजन थ्योरी की..

आर्यन इंवेजन थ्योरी क्या कहती है?

भारतीय इतिहास की किताबों में वर्णित आर्यन इंवेजन थ्योरी की मानें, तो आर्य लोगों ने 1500 ईसा पूर्व भारत की जमीं पर कब्जा कर लिया था, जोकि यूरोप और ईरान जैसे देशों से आकर भारत के उत्तर में बस गए थे। ऐसा कहा जाता है कि आर्य लोग ही भारतीयों के वंशज थे।

जिनके पास अपने वेद, रथ और अपनी भाषा थी। साथ ही इन्हें सभ्य खानाबदोश नागरिक माना गया है। ऐसे में जब साल 1921 में दया राम साहनी ने सिंधु सभ्यता के अस्तित्व को खोज निकाला, तब आर्यन इंवेजन थ्योरी को गढ़ने वाले इतिहासकारों ने ऐसा बता दिया कि आर्य सिंधु सभ्यता के बाद भारतीय भूमि पर आए, जिन्होंने सिंधु सभ्यता को नष्ट कर

दिया था। आर्यन इंवेजन थ्योरी को गढ़ने वाले इतिहासकारों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिंधु सभ्यता के दौरान द्रविड़ लोग भारत भूमि पर निवास किया करते थे, लेकिन बाद में वैदिक आर्यों ने यहां पर कब्जा कर लिया और वर्तमान भारतीय उन्हीं वैदिक आर्यों के वंशज हैं।

आर्यन इंवेजन थ्योरी है मिथ्यापूर्ण

लेकिन हाल ही में, हरियाणा राज्य के राखीगढ़ी में खुदाई से प्राप्त कंकालों के डीएनए से मालूम चला है कि भारतीयों का आर्यों के जीन से कोई संबंध है। साथ ही सिंधु सभ्यता से भी प्राचीन सभ्यता सरस्वती सभ्यता है, जोकि असल में भारतीय इतिहास की हकीकत है।

आर्य शब्द से तात्पर्य एक भद्र मानव से होता है, जिस शब्द का ऋग्वेद में भी उल्लेख मिलता है।लेकिन इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि आर्य ही मानव जाति का इतिहास हैं, जोकि आगे चलकर अनेक महाद्वीपों पर फैल गए थे।

हालंकि अभी तक आधुनिक इतिहासकार भी ये पता नहीं लगा पाए हैं कि असल में ये आर्य कहां से आए हैं। वो तो एक निश्चित आधार पर इन्हें मध्य एशिया से आया हुआ मानते हैं, जोकि वहां से आकर भारत की धरती पर बस गए थे। भारतीय इतिहासकारों के मुताबिक, इन्हीं आर्यों ने मानव सभ्यता को विकसित किया है।

जबकि आधुनिक खोज और मानव कंकालों पर किए गए शोध ये बताते हैं कि 1500 ईसा पूर्व के आसपास कोई भी मानवीय जाति बाहर से भारत में आकर नहीं बसी थी। ऐसे में आर्यन इंवेजन थ्योरी जोकि अभी तक भारत के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण बताई जाती है, वह पूर्णतया काल्पनिक और मिथक है।

दूसरा, अगर आर्य किसी अन्य देश के निवासी थे, तो अभी तक इतिहासकार साक्ष्य प्रस्तुत क्यों नही कर पाए हैं, जो आर्यों को किसी देश का निवासी बता सकें। कई लोगों का मानना है कि सिंधु नदी उस दौर में इतनी विशाल थी कि उसे पार करना आसान नहीं था।

तो आर्य लोग कैसे सिंधु नदी को पार करके भारत आए होंगे? इतना ही नहीं, कई लोग तो इस बात का जिक्र भी करते हैं, कि आधुनिक भारतीय आर्यों के वंशज हैं, तो आर्य जिन्होंने मुगलों और अग्रेजों की तरह ही भारत पर आक्रमण किया था।

तो जिस तरह से आज भारत में किसी भी अंग्रेज या मुगल का वंशज नहीं मिलता है तो आर्यों का वंशज कोई कैसे हो सकता है? ऐसे में माना जाता है कि आर्य कहीं बाहर से आकर भारत में नहीं बसे थे, बल्कि ये आरंभ से ही भारतीय थे।

इस बात का प्रतिपादन मैक्स मूलर, ए एल बाशम, लॉर्ड मैकाले, रोमिला थापर आदि अनेक इतिहासकारों ने किया। उन्हीं के द्वारा लिखित बातों से आज तक इस बात को सच माना जाता रहा कि आर्यों ने भारत के निवासी द्रविड़ को खदेड़कर अपनी वैदिक संस्कृति को भारत में स्थापित किया और वर्तमान मानव उन्हीं आर्यों का वंशज है।

इतना ही नहीं, आधुनिक खोजों से ये भी स्पष्ट हो चुका है कि सिंधु सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता नहीं, बल्कि सरस्वती सभ्यता सबसे प्राचीन है। जिसका उल्लेख मेजर जनरल जीडी बक्शी ने “द सरस्वती सिविलाइजेशन” में विस्तार से किया है।

उनके अनुसार, सिंधु घाटी के पुरातात्विक स्थल सिंधु नहीं, बल्कि अस्तित्व खो हो चुकी सरस्वती नदी के किनारे बसे हुए थे। हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद में भी सरस्वती नदी की प्राचीनता के बारे में वर्णित किया गया है।

साथ ही साल 2018 में सनौली में हड़प्पा काल का सबसे बड़ा रथ प्राप्त हुआ है, इसके साथ ही कई तलवारें और हथियार मिले हैं, जोकि सिंधु सभ्यता से भी काफी प्राचीन हैं। जिससे ये स्पष्ट होता है कि सरस्वती सभ्यता सिंधु सभ्यता से भी पुरानी है और यही भारतीयों की असली और सबसे प्राचीन सभ्यता है।

जबकि आरंभिक मानव के तौर पर खेती करना, औजार बनाना और पशुपालन करना भारत के ही निवासियों ने आरंभ किया था। भारत की आधुनिक और प्राचीन पीढ़ी किसी में भी आर्य जातियों के जीन नहीं पाए जाते हैं। जिससे यह सिद्ध होता है कि आर्यन इंवेजन थ्योरी इतिहासकारों द्वारा रचित है, उसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

आशा करते है आपको यह ज्ञानवर्धक जानकारी अवश्य पसंद आई होगी। ऐसी ही अन्य धार्मिक ,इतिहास और संस्कृति से जुड़ी पौराणिक कथाएं पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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