धीरे-धीरे और सतत प्रयासों से भी पा सकते हैं जीवन का लक्ष्य जानिए कैसे? रोम साम्राज्य है इसका उदाहरण

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कोरियन-अमेरिकन लेखिका लिंडा सू पार्क (Linda sue park) के द्वारा लिखी कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां हैं….

“One day at a time, One step at a time”

यानि अगर आपको अपने भविष्य का निर्माण करना है, तो आपको वर्तमान में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए। तभी आप निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति कर पाएंगे। इसका तात्पर्य ये बिल्कुल भी नहीं है कि आपको औरों से पीछे या कम गति से अपने लक्ष्य को पाने के लिए आगे बढ़ना है।

इस बात से तात्पर्य ये है कि आपको यदि सचमुच अपने भविष्य में कुछ हासिल करना है, तो उसके लिए जल्दबाजी करने से बेहतर धीरे धीरे प्रयासरत रहें, और जब तक अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच जाएं, तब तक कदम बढ़ाते रहें।

उपरोक्त पंक्तियां लेखिका के जीवन चरित्र पर भी पूर्णतया ठीक बैठती हैं। जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत धीमी और सतत गति से की, और उनके प्रथम उपन्यास से लेकर अब तक लिखे गए सभी उपन्यास अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

धीरे-धीरे और सतत प्रयास से जीवन के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, इसका सबसे जीता जागता उदाहरण है रोम साम्राज्य…जिसके बारे में जानकर आपको लेखिका का ये विचार व्यवहारिक तौर पर समझ आ जाएगा।

तो चलिए जानते हैं कि कैसे बना रोम इतना शक्तिशाली राज्य और कैसे उसने धीरे-धीरे कर लिया सम्पूर्ण विश्व पर कब्जा…

रोमन साम्राज्य की स्थापना

Roman Empire

आज से करीब 27 ईसा पूर्व रोमन साम्राज्य का उदय हुआ था। जिसने धीरे-धीरे और सतत प्रयासों से यूरोप, अफ्रीका और एशिया के समस्त देशों पर शासन किया। इतना ही नहीं, एक समय पर रोम की ताकत इतनी बढ़ गई, कि इसने समूचे भूमध्य सागर को अपने अधीन कर लिया।

जिसके चलते दुनिया की संपूर्ण आबादी के अधिकांश हिस्से पर रोम का कब्जा हुआ करता था। लेकिन ऐसा एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि रोम को वैश्विक शक्ति बनने में काफी समय लगा। 

रोमन साम्राज्य की स्थापना की कहानी को अनेक प्रकार की किदवंती से जोड़कर दुनिया को बताया जाता है। माना जाता है रोम की स्थापना 22 अप्रैल 753 ईसा पूर्व हुई थी।

कहा जाता है कि आरंभ में रोम एक छोटा सा नगर हुआ करता था, जिसकी स्थापना दो जुड़वा भाइयों रोमुलस और रेमुस ने की थी। जिनकी माता का नाम रिया सिल्विया था, जोकि अल्बा लोंगा के प्रसिद्ध राजा अंश की बेटी थी, और मंगल युद्ध के देवता द्वारा पुत्रवती हुई थी। 

उधर, राजा अंश के भाई ने अपने राज्य में प्रतिद्वंदी पैदा होने पर यानि दोनों जुड़वा पुत्र होने पर उन्हें खत्म करने की ठानी। जिसके चलते उन्हें टीबर नदी में डुबोकर मार डालने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह वह दोनों जुड़वा भाई बच गए। 

यहां एक किदवंती ये भी है कि उन दोनों भाइयों को भेड़िए ने अपने चंगुल में ले लिया था। जिन्हें बाद में एक चरवाहा दंपति ने बचा लिया और उनका लालन पालन किया।

हालंकि जब दोनों भाई बड़े हुए, तब चरवाहा दंपति ने उनके असली परिवार को खोजने का प्रयास किया। तब जाकर उन्हें मालूम पड़ा कि ये अल्बा लोंगा के शासन से जुड़े हुए हैं। 

जिसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर अपने चाचा से युद्ध किया और अपने नाना को पुन: राज्य भार सौंप दिया। साथ ही दोनों भाइयों ने उस स्थान को भी खोज निकाला, जहां उन्हें भेड़िए ने पकड़ लिया था।

फिर कुछ समय बाद दोनों जुड़वा भाइयों के बीच किसी बात को लेकर मतभेद हुआ, और रोमुलस ने अपने भाई रेमुस की हत्या कर दी और अकेले ही रोम नगर की स्थापना की। जिसका नाम भी उसके ही नाम पर रखा गया।

इसके बाद रोमुलस ने अपने नगर को आगे बढ़ाने के लिए अन्य आसपास के शहरों के लोगों को आमंत्रित किया। इस दौरान उसने उनकी महिला का अपहरण कर लिया, जिसके बाद रोमानियों और शबाइनों के बीच युद्ध शुरू हो गया।

लेकिन अंत में दोनों ही देशों ने संधि कर ली और दोनों ही नगरों का आपस में विलय हो गया। जिसके चलते रोमुलस और सबाइन के राजा टाइटस ने अपने नगरों में जनसंख्या के विकास के लिए लोगों को शरण देना आरंभ किया।

धीरे-धीरे रोमुलस और सबाइन के राजा ने मिलकर रोम को एक बड़े शहर के रूप में विकसित कर लिया। इस दौरान रोम पर शासन करने वाले सात राजा थे, जोकि रोमुलस से ही जुड़े थे। माना जाता है कि इन राजाओं ने करीब 243 सालों तक रोम पर शासन किया।

जहां पहले राजतंत्र उसके बाद गणतंत्र आया। इस तरह से इतिहासकार रोम के आरंभिक काल का उदय होना मानते हैं। हालांकि इस इतिहास को पुख्ता करने संबंधी साक्ष्यों को काफी हद तक नष्ट किया जा चुका है, परंतु फिर भी इसे ही रोम साम्राज्य की स्थापना का इतिहास स्वीकार किया जाता है।   

इसके अलावा भी, रोम की स्थापना को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं। जिनमें से जुड़वा भाइयों की कहानी आधार माना जाता है।जबकि ग्रीक के एक इतिहासकार का मानना है कि एक आर्केडिया के एक ग्रीक व्यक्ति जिसका नाम इवांडर था, उसके द्वारा रोम शहर बसाया गया है।

जबकि एक अन्य इतिहासकार का मानना है कि रोम की स्थापना राजा ओडिसीस और चिरशी के बेटे रोमोस ने की थी।

कुछ लोग रोम की स्थापना का श्रेय ट्रोजन के राजकुमार एनीस को देते हैं। जिसका जिक्र एक रोमन महाकाव्य में भी किया गया है। जिनके वंशज के तौर पर हम जूलियस सीजर और ऑगस्ट्स को जानते हैं।

धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए भी पा सकते हैं जीवन का लक्ष्य

इस प्रकार, रोम की स्थापना से लेकर उसके साम्राज्य बनने तक की कहानी उसके सतत और निरंतर प्रयासों की कहानी है। जिससे हमें प्रेरणा मिलती है कि हमें कभी भी अपने जीवन के लक्ष्य को पाने के लिए जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए।

बल्कि एक निश्चित समय अंतराल के आधार पर एक कदम ही आगे बढ़ना चाहिए। और एक कदम आगे बढ़ने के बाद ही दूसरा कदम आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसा करके हम भविष्य में बड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर पाएंगे।

सतत प्रयासों और धीमी गति से कैसे बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सकती है, इस बात को हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि जिस तरह से हम सड़क पर चलते समय एक समय पर एक कदम ही आगे बढ़ते हैं, ठीक उसी प्रकार से, हमें अगर जीवन में बड़े उद्देश्यों की पूर्ति करनी है।

तो हमें पहले छोटे -छोटे लक्ष्यों को हासिल करना होगा। जिस तरह से अपनी प्यास बुझाने के लिए कोवै ने मटके में एक-एक बारी कंकड़ डालकर पानी को ऊपर उठा दिया था।

उसी तरह से हमें भी किसी कार्य को बड़ा या विशाल समझकर उसपर शुरुआत से ही पसीना बहाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक पड़ाव को पार करके दूसरे तक जाने की नीति से ही किसी बड़े उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है।

अंतत: एक उदाहरण चीन की महान दीवार का भी दिया जा सकता है। जहां उस दीवार का निर्माण बेहद ही आश्चर्यजनक तरीके से हुआ, लेकिन वह भी केवल एक ही दिन में बनकर तैयार नहीं हो गई।

बल्कि इस महान दीवार को बनाने में काफी लोग लगे थे, जिन्होंने एक-एक ईंट के बल पर इस महान दीवार का निर्माण किया था।

ठीक उसी तरह से, आप भी यदि जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो आवश्यक है कि अपने वर्तमान में मौजूद छोटे लक्ष्यों पर विजय पाने की कोशिश करते रहें, तभी आप जीवन में सफल हो पाएंगे।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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