युधिष्ठिर जानते थे कलियुग का सच, जो आज हकीकत बन चुका है।

महाभारत काल के पांडव भाइयों में सबसे ज्येष्ठ युधिष्ठिर यम देवता के अवतार थे। जिनको न्याय और शांति प्रिय राजा भी कहा जाता  है। इन्होंने जीवनपर्यंत सत्य और धर्म का पालन किया। ऐसे में आज हम आपको पांडव युधिष्ठिर का वह सच बताने जा रहे हैं।

जिससे आपके हृदय में उनके लिए सम्मान और अधिक बढ़ जाएगा। जी हां! यह सच है कि पांडव युधिष्ठिर जानते थे कि आने वाला समय यानि कलियुग का दौर कैसा होगा? और बिल्कुल वैसी ही परिस्थितियां वर्तमान में देखने को मिल रही हैं।

ऐसे में यदि आपके मन में भी यह प्रश्न उठ रहा है कि महाभारत काल के समय पांडव युधिष्ठिर को कलियुग के समय का आभास कैसे हो गया? तो हमारे आज के इस लेख में आपको अपने इस प्रश्न का उत्तर अवश्य मिल जाएगा। तो चलिए जानते है इसका पीछे की कहानी के बारे में……

पौराणिक कथा

यह उस समय की बात है जब पांडव द्रुत क्रीड़ा में कौरवों से हारने के बाद 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास पर चले गए थे। वैसे तो पांडवों ने अपनी वेशभूषा बदलकर अपना अज्ञातवास राजा विराट की नगरी में व्यतीत किया था। लेकिन इससे पहले उन्हें जंगल में इधर उधर भटकना भी पड़ा था।

इसी दौरान शनि देव ने पांचों पांडवों की परीक्षा लेनी चाही। वह देखना चाहते थे कि पांचों पांडवों में सबसे अधिक बुद्धिमान कौन है? जिसके चलते शनि देव ने पांडवों को मायाजाल में फंसाने के लिए एक महल बनाया। जिस पर सबसे पहले गदाधारी भीम की नजर पड़ी। तब उन्होंने अपने बड़े भाई युधिष्ठिर से उस महल में जाने की आज्ञा मांगी। और युधिष्ठिर से आज्ञा पाते ही भीम महल की ओर चल दिए।

जहां महल के द्वार पर शनि देव एक द्वारपालक के वेश में पहरा दे रहे थे। जिसपर भीम ने द्वारपाल से महल के अंदर जाने की आज्ञा मांगी। द्वारपाल ने कहा कि आप महल तभी देख सकेंगे जब आप उसकी तीन शर्तों को मान जाएंगे। भीम ने कहा, ठीक है! आप शर्त बताएं। द्वारपाल ने कहा कि……

पहली शर्त है कि महल के चारों कोनों में से आप केवल एक ही दिशा को देख सकते हैं।

दूसरी शर्त है कि आप महल के भीतर जो कुछ भी देखेंगे। बाहर आकर आपको उसकी सार समेत व्याख्या करनी होगी।

तीसरी और आखिरी शर्त यह है कि यदि तुम महल के भीतर देखे गए दृश्यों की व्याख्या नहीं कर पाए तो तुमको कैद कर लिया जाएगा।

तीनों शर्तों को सुनने के पश्चात् भीम ने उन्हें स्वीकार कर लिया। और महल में प्रवेश करने के बाद वह पूर्व दिशा की ओर चले गए। जहां भीम को सुंदर और भव्य प्राकृतिक नजारा देखने को मिला। उन्होंने वहां अनेक पशु पक्षी और फल फूलदार पेड़ देखे। और पूर्व दिशा में आगे की ओर उन्हें तीन कुएं दिखाई पड़े। जिनमें बीच वाला कुआं बड़ा और दाएं बाएं वाले छोटे थे।

भीम ने देखा कि बड़े कुएं में पानी का तेज उफान आता है। जोकि अन्य दोनों छोटे कुओं को भर देता है। लेकिन जब छोटे कुओं में पानी उफान पर होता है। तब बड़ा कुएं का पानी आधा ही रह जाता है। यह दृश्य देखकर भीम थोड़ा अचरज में पड़ जाते हैं। और द्वारपाल के पास वापस चले जाते हैं।

भीम के वापस लौटने पर द्वारपाल उनसे पूछता है कि आपने महल के अंदर क्या देखा? जिस पर भीम उन्हें बताते हैं कि उन्होंने महल के भीतर बहुत ही सुंदर प्राकृतिक वातावरण देखा। लेकिन कुओं को देखकर वह आश्चर्य में पड़ गए। ऐसे में महल के भीतर के दृश्यों का सार ठीक से ना बता पाने के कारण द्वारपाल ने उन्हें बंदी बना लिया।

उसके बाद अर्जुन ने द्वारपाल से महल में प्रवेश की अनुमति मांगी। जिसके बाद अर्जुन महल की पश्चिम दिशा की ओर बढ़ गए। जहां अर्जुन ने देखा कि किसी खेत में बाजरा और मक्का दो फसलें उग रही हैं। लेकिन बाजरे की फसल से मक्का और मक्के की फसल ने बाजरा निकल रहा था। जिसे देख अर्जुन भी आश्चर्य में पड़ गए और द्वारपाल को भीतर के दृश्यों का ठीक से वर्णन नहीं कर पाए। जिसपर द्वारपाल ने धनुर्धारी अर्जुन को भी बंदी बना लिया।

अर्जुन के बाद नकुल ने महल में जाने की बात कही। और शर्तनुसार वह उत्तर दिशा की ओर गए। जहां उन्होंने देखा कि काफी सारी गौ माता भूख लगने पर अपनी बछियों का दूध पी रही हैं। जिसे देख नकुल भी कुछ समझ नही सके और अर्जुन, भीम की तरह वह भी बंदी बना लिए गए।

इसके बाद पांडवों में सबसे छोटे सहदेव महल के भीतर गए। जहां दक्षिण दिशा की ओर उन्होंने देखा कि सोने की एक शिला चांदी के सिक्कों पर टिकी हुई थी। जिसको छूने पर भी उसकी स्थिति डगमग नहीं हुई। उन्होंने बाहर आकर द्वारपाल को यह सब बता दिया। लेकिन वह भी अन्य पांडवों की तरह बंदी बना लिए गए।

आखिर में जब युधिष्ठिर के चारों पांडव भाई लौटकर नहीं आए। तब वह द्रौपदी के साथ महल की ओर बढ़ चले। तब उन्होंने द्वारपाल से अपने चारों भाइयों के विषय में पूछा। जिसपर द्वारपाल ने उन्हें बताया कि महल के भीतर दिखाई दिए दृश्यों का ठीक तरह से सार ना बता पाने के कारण आपके भाइयों को बंदी बना लिया गया है।

द्वारपाल की बात सुनकर युधिष्ठिर ने सबसे पहले जाकर भीम से पूछा कि तुमने महल के भीतर क्या देखा था। जिस पर भीम ने उन्हें सब कुछ बता दिया।

युधिष्ठिर ने तब भीम से कहा कि…..

तुमने जो कुएं देखे थे उससे तात्पर्य यह था कि कलियुग में एक बाप तो दो बेटों का पेट पाल लेगा। लेकिन दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नही भर पाएंगे।

फिर युधिष्ठिर ने अर्जुन से पूछा कि तुमने महल के भीतर क्या देखा? अर्जुन ने भी महल के अंदर के दृश्यों का वर्णन कर दिया।

युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि….

तुमने जो दो विपरीत फसलें देखी थी, उसका तात्पर्य यह था कि कलियुग में ब्राह्मण की कन्या शुद्र के घर में विवाह करके जाएगी और शुद्र की कन्या ब्राह्मण के घर में विवाह करेगी।

इसी प्रकार से युधिष्ठिर ने नकुल से पूछा। तब नकुल ने युधिष्ठिर को गाय के विषय में बताया।

युधिष्ठिर ने नकुल को बताया कि…..

तुमने जो बछिया का दूध पी रहे गौ माताओं को देखा था, उसका तात्पर्य यह है कि कलियुग में माताएं अपनी बेटियों के घर का दाना पानी खाएंगी। क्योंकि बेटे अपने माता पिता की सेवा नही करेंगे।

आखिर में, युधिष्ठिर ने सहदेव से पूछा कि तुमने महल के भीतर क्या देखा। जिसके बाद सहदेव ने युधिष्ठिर को सोने की शिला के बारे में बताया।

जिसपर युधिष्ठिर ने सहदेव को बताया कि…..

तुमने जिस सोने की शिला को चांदी के सिक्कों से टिका हुआ पाया था। उसका तात्पर्य यह है कि कलियुग में पाप के प्रकोप से धर्म का अस्तित्व खतरे में आ जायेगा। लेकिन धर्म कभी समाप्त नहीं होगा। यानि वह सदैव टिका रहेगा।

इस प्रकार, देखा जाए तो वर्तमान में यह सब बातें सच होती नजर आ रही हैं। आज इंसान धन, संपत्ति और लोभ के वशीभूत होकर अपने ही रिश्तों को बदनाम करने में लगे हुए हैं। हर तरफ असंतोष, ईर्ष्या और दुखों का अंबार लगा हुआ है।

देवी स्वरूप स्त्रियां हर रोज प्रताड़ित और शोषित हो रहीं है। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि पांडव युधिष्ठिर ने कलियुग को लेकर जिन बातों की भविष्यवाणी की थी, वह वर्तमान में सब सच साबित हो रही हैं।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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