अथर्ववेद – Atharvaveda in Hindi

Atharva Veda in Hindi

अथर्ववेद को सनातन धर्म के चारों वेदों में अंतिम वेद कहा गया है। हालांकि अर्थववेद में अन्य वेदों की भांति देवताओं और यज्ञ से जुड़े मंत्रों का उल्लेख या वर्णन नहीं किया गया हैं। बल्कि इसमें हमें चिकित्सा, विज्ञान, टोना टुटका और दर्शन से जुड़े विषय पढ़ने को मिलते हैं।

इसलिए वैदिक काल के धर्म पुजारी इसे अन्य तीनों वेदों से अलग मानते थे। जबकि हिन्दू धर्म में अथर्ववेद का भी अपना विशेष महत्व है। जिसके चलते इसे ब्रह्मवेद की उपाधि दी गई है। अर्थववेद को महर्षि अंगिरा और अथवर्ण द्वारा रचित किया गया था।

और इसका रचनाकाल 7000 से 1500 ईसा पूर्व माना जाता है। अर्थववेद को महीवेद, अर्थवागिरस, भैष्यज्य वेद आदि नामों से भी जाना जाता है। तो चलिए आज हम अथर्ववेद के सार को विस्तार से जानते हैं।


अर्थववेद का अर्थ

अर्थववेद से तात्पर्य अथर्वों के वेद और अभिचारक मंत्रों से लगाया जाता है। मुख्य रूप से अर्थववेद से दवाइयों, टोना टोटका और ब्रह्म ज्ञान की जानकारी प्राप्त होती है। इसमें कुल मिलाकर 20 काण्ड, 730 सूक्त और लगभग 5987 मंत्र हैं।

अर्थववेद के माध्यम से हमें यह भी पता चलता है कि आर्य समाज के लोग प्रेत आत्माओं और तंत्र मंत्र में विश्वास किया करते थे। साथ ही माना जाता है कि चिकित्सय प्रणाली का आरंभ अथर्ववेद के समय ही हुआ होगा।

क्योंकि इसमें जीवाणु, मानव शरीर की संरचना, शल्य चिकित्सा, प्रजनन विज्ञान, मृत्यु टालने के उपाय, जड़ी बूटियों, गंभीर बीमारियों का इलाज, वनस्पति ज्ञान और आयुर्वेद इत्यादि के बारे में भी बताया गया है। इसके अलावा राजनीति, अर्थशास्त्र, राष्ट्रभूमि, राष्ट्रभाषा, मोक्ष प्राप्ति, पैसा कमाना, राज्य के कामों के बारे में, भूगोल, खगोल शास्त्र आदि से जुड़े अनेक विषयों के बारे में अर्थववेद में लिखा गया है।

अर्थववेद की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके विषय में कहा गया है कि जिस राजा के शासनकाल में अर्थववेद को जानने वाला विद्वान विश्व शांति की कामना में प्रयासरत रहता है, वह राज्यपाठ सदैव ही प्रगति करता है। साथ ही अर्थववेद में गृहस्थ आश्रम से जुड़े विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है। इसलिए सभी प्रकार से आधुनिक धर्म गुरुओं ने भी अर्थववेद के महत्व को रेखांकित किया है।


अर्थववेद के प्रकार

अगर चरण व्यूह के अनुसार देखें तो अथर्ववेद की कुल नौ शाखाएं मौजूद हैं:- जिनको पैपल, स्त्रात, शौनक, चरण विद्या, देव दर्शत, सौल, दान्त, ‌ब्रह्मदाबल आदि नामों से जानते हैं। जिसमें अनेक प्रकार के मंत्र और सूक्तियों को समाहित किया गया है।


अर्थववेद से जुड़े रोचक तथ्य

अर्थववेद से हमें कुरु देश के राजा और उसके सफल राज्यपाठ की जानकारी प्राप्त होती है। 
इसमें लंबी आयु और जीवन के लिए मंत्र, प्रेम को वश में करने के मंत्र, राजा बनने के मंत्र समेत अनेक जादुई मंत्रों का उल्लेख किया गया है।


आयुर्वेद का आरंभिक परिचय हमें अथर्ववेद से ही मिलता है। साथ ही अनेक औषधियां भी बताई गई हैं।
सनातन धर्म से जुड़े जिन देवी देवताओं को अन्य तीन वेदों में उच्च स्थान प्राप्त है। तो अथर्ववेद में उन्हें गौण स्थान दिया गया है।


अथर्ववेद से ही हमें भूतों, पिशाचों और प्रेत आत्माओं की जानकारी मिलती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि उस दौरान देवी देवताओं की पूजा के साथ ही प्रेत आत्माओं में भी आर्य जाति के लोगों का विश्वास काफी बढ़ गया था।

इस प्रकार, यदि आप सम्पूर्ण संसार में प्रेम और दया की भावना का विकास करना चाहते हैं। साथ ही समाज को समृद्धि की राह पर अग्रसर करना चाहते हैं तो आपको अथर्ववेद का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। क्योंकि इसके अध्ययन से ना आपको जीवन का मूल्य ज्ञात होगा, बल्कि  आप समाज के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख [Atharvaveda in Hindi] पसंद आया होगा। ऐसे ही सनातन धर्म से जुड़े अन्य वेदों के बारे में पढ़ने के लिए Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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