जीवनी क्या है, जीवनी की विशेषताएं | What is Biography?

इस लेख में आप जीवनी (Biography) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे । जीवनी साहित्य की एक महत्वपूर्ण रीति है। किसी व्यक्ति के जीवन वृतांत या जीवन के चरित्र चित्रण को जीवनी कहते है। जीवनी में किसी विषिस्ट व्यक्ति के जीवन में घटित घटनाओं का  भावपूर्ण एवं सुंदरता के साथ रेखांकन होता है। जीवनी को अंग्रेजी में बायोग्राफी कहते हैं। जीवनी में लेखक व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की जानकारी प्रमाण के साथ प्रस्तुत करता है।  जीवनी सत्य घटनाओं के आधार पर लिखी जाती है।

जीवनी का अर्थ, Meaning of Biography

जीवनी शब्द जीवन से बना है। जीवनी का शाब्दिक अर्थ सम्पूर्ण जीवन का उल्लेख या वर्णन करना है।  किसी वयक्ति के सम्पूर्ण जीवन का चरित्र चित्रण व वर्णन करना ही जीवनी कहलाता है। लेखक द्वारा किसी विशेष व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की सत्य घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण ही जीवनी कहलाता है। 

जीवनी में जीवन की कुछ विशेष घटनाओं के माध्यम से व्यक्ति के मानसिक विकास का वर्णन व चित्रण किया जाता है। जीवनी में जीवन के भिन्न-भिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली जाती है, जिसमें अनुभूति का आंतरिक वर्णन शामिल हैं। 

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जीवनी क्या है ? What is Biography?

सम्पूर्ण जीवन की व्याख्या को ही जीवनी कहते है। जीवनी किसी विषेश व्यक्ति के जीवन की घटनाओं के विवरण की विधा या रीति है। जीवनी में कुछ भी काल्पनिक नहीं होता है। लेखक द्वारा किसी विशेष व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की सत्य घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण ही जीवनी कहलाता है। जीवनी लेखन एक प्राचीन परमोरा है।  जीवनी में व्यक्ति के व्यक्तित्व व कृतित्व की कहानी रहा करती है।  जीवनी की सफलता एवं महत्व का निर्धारण स्वाभाविकता व प्रमाणिकता पर निर्भर करता है।  

जीवनी पूर्णतः सत्य कथनों पर आधारित होती है। जीवनी में किसी विषिस्ट व्यक्ति के जीवन में घटित घटनाओं का  भावपूर्ण एवं सुंदरता के साथ रेखांकन होता है। जीवनी में व्यक्ति की छोटी से छोटी घटना का वर्णन किया जाता है। जीवनी में जीवन की कुछ विशेष घटनाओं के माध्यम से व्यक्ति के मानसिक विकास का वर्णन व चित्रण किया जाता है।

जीवनी सतीश कुशवाहा

जीवनी में लेखक किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन वृत के बारे में लिखता है। जीवनी में किसी व्यक्ति के जीवन की सारी घटनाओ का वर्णन किया जाता है जो भी उसके जन्म से मृत्यु तक घटित है।  जीवनी में या तो किसी विशिष्ट व्यक्ति के सकारात्मक रूप को दर्शाया जाता है या तो उसकी आलोचना की गयी होती है।

जीवनी में व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को ऐतिहासिक क्रम में ही दर्शाया जाता है। जीवनी जीवित या मृत किसी भी व्यक्ति के जीवन पर लिखी जा सकती है, कई बार अनुमति और कई बार बिना अनुमति के लिखी जा सकती है।

जीवनी के तत्त्व

जीवनी के कुछ प्रमुख तत्व निम्न प्रकार है – 

वर्ण विषय, चरित्र चित्रण, देशकाल, उद्देश्य, भाषाशैली, इतियादी

जीवनी कि उदाहरण, Examples of Biography

सम्राट अशोक की जीवनी, बिल गेट्स की जीवनी पोरस का जीवन परिचय, कुमार विश्वास की जीवनी, रोहित शर्मा की पूरी जीवनी, महाभारत कारण की सम्पूर्ण जीवनी, लता मंगेशकर जी की सम्पूर्ण जीवनी, महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिचय, महात्मा गाँधी की सम्पूर्ण जीवनी, योगी आदित्यनाथ की जीवनी,   इत्यादि।

जीवनी के भेद

जीवनी के अनेक भेद होते है जैसे कि – आत्मीय जीवनी, ऐतिहासिक जीवनी, लोकप्रिय जीवनी, कलात्मक जीवनी, व्यक्तिगत जीवनी, इत्यादि।

हिंदी की प्रमुख जीवनिया तथा जीवनीकार

जीवनी जीवनीकार
        गोपाल शर्मा शास्त्री दयानन्द दिग्विजय (१८८१)
              भारतेन्दु बादशाह दर्पण , पांच पवित्रात्मा  तथा चरित्रावली 
          शिवानंद सहाय हरिश्चंद (१९०५)
          बालमुकुंद गुप्तप्रताप नारायण मिश्र (१९०७) 
          रामचंद्र शुक्ल बाबू राधाकृष्णदास (१९१३)

जीवनी की विशेषताएं

जीवनी की विशेषताएं हैं –

  1. जीवनी उसी व्यक्ति की लिखी जाती है जिसमे कुछ चारित्रिक विशेषताएं हो और लोग उसके जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। आम तौर पर वशिष्ष्ट व्यक्ति की जीवनी लिखी जाती है जिसकी अपने क्षेत्र और इतिहास में प्रसिद्धि हो। आधुनिक युग में कुछ परिवर्तन आया है। अब साहित्य में आम आदमी की भी जीवनी लिखी जाती है, जो प्रसिद्ध नहीं है। 

  2. जीवनी का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब तथ्य और घटनाक्रम प्रामाणिक तथा माननीय हो। जीवनी कथा साहित्य नहीं है, इसलिए जब तक वह माननीय न हो, लोग उसे प्रेरणादायक नहीं मानेंगेयह बात लेखक की निश्छलता से भी जुड़ती है। लेखक को जीवनी के नायक (या नायिका) के पत्र, दैनंदिनी, उनपर लिखे गए संस्मरण, निजी संबंधों व नातों की यादें, मुमकिन हो तो उस व्यक्ति से लिए गए उपहार, प्रवाद आदि का प्रयोग करें।     

  3. जीवनी में नायक कि प्रति लेखक में पूज्यभाव, आदर सम्मान का भाव तथा गर्व का भाव होना चाहिए ताकि वह आदर्श चरित्र की मुख्य प्रकृति व विशेषताएं प्रकाशित कर सके। लेखक का काम केवल घटनाओं को क्रम से प्रस्तुत करना ही नही है बल्कि आदर्श चरित्र की उन विशेषज्ञताओं को उभारना है जो आसानी से नज़र नहीं आती।  

  4. चाहे लेखक आदर्श चरित्र के कितने ही समीप क्यों न हो, कितने ही उपासक क्यों न हो, उनका चित्रण निष्पक्ष होना चाहिए। उन्हें अपनी तरफ से कुछ ढाँकना या बढ़ाना नहीं चाहिए, उन्हें अपनी ओर से ख़बर देना या नतीजा नहीं निकालना चाहिए।

  5. वर्णन के निरपेक्ष के बावजूद चित्रण वर्णन अरोचक तथा नीरस न हो। जीवंत विवरण और आकर्षक शैली साहित्यिक जीवनियों की सर्वोत्तम विशेषता है।

निष्कर्ष

  1. अन्य विधाओं की तरह जीवनी भी महत्वपूर्ण है।  जीवन चरित्र का संक्षिप्त रूप ही जीवनी है।  

  2. जीवनी का व्यक्ति वास्तविक होता है तथा सारी घटनाये सत्य होती है।  

  3. गुणों से युक्त शैली ही जीवनी को प्रभावोत्पादक बना सकती है। 

  4. जीवनी व्यक्ति की सच्ची जीवन गाथा है। जिसमे कोई काल्पनिक घटना शामिल नहीं होती। 

  5. व्यक्ति के आत्मिक विकास के इतिहास को जीवनी कहा जा सकता है। 

  6. जीवनी विधा इतिहास का वह रूप है जो मनुष्य की जातियों या समूहों से नहीं बल्कि एक व्यक्ति से सम्बन्ध रखती है। 

  7. जीवनीकार का लक्ष्य जीवनी की उन घटनाओं व क्रिया कलापों है वर्णन करना होता है, जो व्यक्ति की बड़ी से बड़ी म्हणता से लेकर छोटी से छोटी घरेलु बातों तक से सम्बंधित होती है।  

  8. जीवनी कार का उद्देश्य अपने चरित्रनायक का व्यक्तित्व करना होता है।  

  9. जीवनी एक ऐसी अवधारणा है जो की प्रकट है, प्रकाशित है, और इसके विपरीत चरित्र एक प्रकार का आंतरिक व्यक्तित्व है। 

  10. जीवनी के तत्त्व जीवनी को सुन्दर रूप प्रदान करते है, जीवनी विधा विकास और साहित्य का समन्वित है।  

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