Essay on Horse in Hindi | घोड़ा पर निबंध हिंदी में

घोड़ा (Horse) आज से नहीं बल्कि सदियों से मनुष्य का पालतू जानवर रहा है। ये एक पालतू जानवर है, जिसका उपयोग यातायात और युद्ध आदि में बहुत लम्बे समय से किया जा रहा है। लगभग 6000 साल पहले घोड़े को पालतू बनाया गया था। ये भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पाया जाने वाला एक बहुत समझदार और जिसकी मनुष्यों को बेहद जरूरत है घोड़ा वो जानवर है।

हमें कई नस्लों और रंगों के घोड़े देखने को मिलते हैं। जिसमें से अरबी नस्ल के घोड़े सबसे सही माने जाते हैं। आज पूरी दुनिया में 300 से भी अधिक नस्ल के घोड़े मौजूद हैं। अरबी नस्ल के अलावा एशियाई घोड़े, अफ्रीकन घोड़े भी प्रमुख नस्ल के होते हैं। अफ्रीकन घोड़े अधिकतर जंगलो में पाए जाते है।

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आपको बता दें कि घोड़ा एक स्तनपायी पशु होता है। इसके चार पैर और एक पूँछ भी होती है। घोड़े के पैरों में खुर होते हैं जो तेज दौड़ने में इनकी सहायता करते हैं। घोड़े के पैरों के खुर उसके दौड़ते वक्त कोई भी नुकीली चीज पैरों में नहीं लगने देते हैं। घोड़े केवल नाक से ही सांस ले सकते हैं, जबकि इंसान मुंह से भी सांस ले सकता है।

घोड़े की आंखे जमीन पर पाये जाने वाले सभी स्तनधारी जीवों में सबसे बड़ी होती हैं। घोड़े की आँखें इनके सिर के दोनों ओर होती हैं जिस कारण ये 360 डिग्री तक देखनें में सक्षम होती हैं लेकिन घोड़ा इंसानो की तरह फोकस नहीं कर सकता है। 

नर घोड़े को घोड़ा और मादा घोड़े को घोड़ी कहा जाता है। एक नर घोड़े का जबड़ा उसके दिमाग से भी बड़ा होता है। घोड़े के मुंह में 40 और घोड़ी के मुंह मे 36 दांत होते है। घोड़ा एक शुद्ध शाकाहारी पशु होता है, जो घास, चना और अनाज खाता है। घोड़े के रहने के स्थान को अस्तबल कहा जाता है। घोड़े दौड़ने में बहुत तेज होते हैं, अपनी तेज गति और फुर्ती के कारण ही इसकी अलग पहचान होती है।

घोड़ा बहुत फुर्तीला होता है ये बिना रुके कई घन्टों तक लगातार दौड़ सकता है। घोड़े के दौड़ने की औसत गति 45 किलोमीटर प्रति घण्टा होती है। घोड़ा एक ऐसा जीव है जो खड़े रहकर भी सो सकता है और नींद में गिरता भी नहीं है। ये लेटकर भी सो सकते हैं। इनकी एक खास पहचान होती है ये समूह में कभी भी सभी घोड़े एक साथ नहीं सोते हैं उनमें से कोई एक हमेशा रखवाली के लिए जागता रहता है।

एक घोड़े का औसत जीवनकाल लगभग 25 से 30 वर्ष का होता है। घोड़े का उपयोग व्यापारी सामान ढोने और लादने के लिए करते हैं। प्राचीन समय में भी घोड़े का इस्तेमाल मुख्यतः आवाजाही और यातायात के साधन के रूप में किया जाता था। दूरस्थ स्थानों पर आने जाने के लिए घोड़े की सवारी की जाती थी। 

प्राचीन समय के राजा महाराजा घोड़े का उपयोग कहीं आने जाने के लिए सवारी और युद्ध के मैदान में घोड़े पर सवार होकर युद्ध करने के लिए करते थे। युद्ध में इस्तेमाल किये जाने वाले घोड़ों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था, जिससे युद्ध के दौरान ये अपने घुड़सवार के इशारों को समझ सकें और उसी के अनुसार कार्य करें। वफादारी के मामले में घोड़े भी बहुत विश्वासपात्र होते हैं ।

घोड़ा अपने मालिक के प्रति बहुत वफादार होता है। इतिहास में ऐसे घोड़ों का भी जिक्र है जिन्होंने युद्ध में अपने मालिक की जान बचाने के लिए खुद के प्राणों तक का बलिदान दिया है। भारत के वीर महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में आप सभी जानते ही होंगे। चेतक ने युद्ध मे अपनी फुर्ती और तेजी से महाराणा का साथ दिया था। झांसी की महारानी लक्ष्मी बाई के घोड़े का भी जिक्र आपने इतिहास में सुना ही होगा। पुराने समय में घोड़े राजा महाराजाओं के सबसे प्रिय होते थे।

राजा भी सदैव अपने एक घोड़े के साथ ही चलते थे कभी अपना घोड़ा बदलते नहीं थे। घोड़े पर लिखी गयी सबसे पुरानी पुस्तक का नाम शालिहोत्र है, जिसे शालिहोत्र ऋषि ने महाभारत काल से भी पहले लिखा था।आज के वर्तमान समय मे घोड़े का उपयोग पहले के मुकाबले कम हो गया है लेकिन फिर भी कई कार्यो में घोड़े की आवश्यकता पड़ती है।

दुनियाभर में घोड़े की दौड़ भी आयोजित की जाती है, जिसे हॉर्स रेसिंग कहते हैं। शादियों में घोड़े का उपयोग दूल्हे को बैठाकर निकासी से लेकर बारात तक में किया जाता है। घोड़ा गाड़ी जिसे तांगा कहा जाता है, का इस्तेमाल सवारी लाने और ले जाने में किया जाता है। पोलो के खेल में भी खिलाड़ी घोड़े पर सवार होकर ही इस खेल को खेलता है।

घोड़ा एक स्वामीभक्त जानवर होता है और विभिन्न तरीकों से ये मनुष्य को हमेशा से अपनी सेवायें प्रदान करता रहा है। घुड़सवारी से लेकर भार उठाने और यहाँ तक कि युद्ध में भी घोड़ों ने अपनी सेवा दी है। पूरी दुनिया में घोड़ों की 300 से भी अधिक प्रजातियाँ हैं मौजूद हैं। घोड़े के शरीर में इंसानों के शरीर की तुलना में एक हड्डी कम होती है। मनुष्य शरीर में 206 हड्डियाँ होती हैं, वहीं घोड़े के शरीर में 205 हड्डियाँ होती हैं।

घोड़े की रात में वस्तु देखने की क्षमता मनुष्य की तुलना में ज्यादा अच्छी होती है। लेकिन घोड़े की आँखों को इंसानों की आँखों की तुलना में प्रकाश के बाद अंधेरे को और अंधेरे के बाद प्रकाश को देखने में अधिक समय लगता है। घोड़ों में गंध पहचानने और सुनने की क्षमता भी इंसानों से बेहतर होती है। घोड़े एक सामाजिक जानवर हैं।

ये अकेले रहने पर खालीपन महसूस करते हैं और किसी साथी के खो जाने मनुष्यों की भाँति शोक भी मनाते हैं। दूसरे स्तनधारी जीवों के जैसे घोड़ा उल्टी नहीं कर सकता है और न ही डकार सकता है, इसी कारण से अधिकांश घोड़ों की मौत पेट दर्द के कारण होती है। घोड़े के खुर गायों के खुरों के समान फटे हुए नहीं होते है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इनके खुरों में नाल लगाई जाती है।

घोड़ी का गर्भकाल 11 माह का होता है। जन्म के कुछ घंटों के बाद ही घोड़े का बच्चा चलने और दौड़ने लगता है। मनुष्यों ने लगभग 4000 से 6000 ई०पू० घोड़ों को पालतू बनायाबनाया था।  कुत्तों को लगभग 14000 वर्ष पूर्व और बिल्लियों को लगभग 8500 वर्ष पूर्व पालतू बनाया गया था। सभी नस्लों में अरबी घोड़े को सबसे अच्छी नस्ल का घोड़ा माना जाता है। ये न केवल देखने में सुंदर होता है बल्कि इसकी संरचना बाकी घोड़ों से भिन्न होती है।

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