ग्राम सुधार पर निबंध – Gram Sudhar Par Nibandh

Gram Sudhar Par Nibandh

भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि ही आजीविका का मुख्य साधन होने से यहां जनसंख्या का अधिक प्रतिशत आज भी गांवों में निवास करता है। गांव भारत की मूल इकाई है। भारत में लगभग छह लाख गांव हैं। जबकि इनकी तुलना में शहरों की संख्या कम है। एक समय ऐसा था जब भारत के गांवों की दशा बहुत सुंदर और ऊंची थी। किसान सुखी और संपन्न थे।

वहां घी दूध की नदियां बहती थीं। धरती अन्न के रूप में सोना उगलती थी। कृषि एवं कुटीर उद्योग ग्रामीण जीवन के प्रमुख आधार थे। जीवन की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति वहां सरलता से हो जाती थी। किसानों के साथ ही उनकी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले लुहार, बढ़ाई, सुनार, अन्य शिल्पी, व्यापारी, वैद्य, पुरोहित, शिक्षक भी वहां रहते थे। वे सभी लोग वहां आनंद और परस्पर मेल जोल से रहते थे।

गांवों की स्थिति

वर्तमान भारत में किसान की दशा दयनीय हो रही है। कृषि से उनकी जीविका का निर्वाह नहीं हो रहा और वह रोजगार की तलाश में शहर की ओर भाग रहे हैं। भारत के गांवों की इस दुर्दशा के लिए उत्तरदाई ब्रिटिश सरकार थी। जिन्होंने अपने शासनकाल में कृषि सुधार और ग्राम विकास से मुंह मोड़ लिया था।

उन्होंने अपने आर्थिक लाभ के लिए गांवों के कुटीर उद्योग को और ग्राम शिल्प को प्रत्येक संभव प्रयत्न से कुचल दिया था। जमीदारों, सूदखोर महाजनों और सरकारी कर्मचारियों ने किसानों का खूब शोषण किया। शिक्षा के अभाव, शराब सेवन, मुकदमों, ऋण के भार ने तो किसानों की और अधिक दुर्दशा कर दी।

गांवों की समस्याएं

आजकल गांवों की मुख्य समस्या ग्रामीणों का अशिक्षित होना और उनकी निर्धनता है। ये दोनों समस्याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अशिक्षा के कारण ही गांव में अनेक सामाजिक कुरीतियां और अंधविश्वास पनप गए हैं। इन्हें तभी सफलता से कुचला जा सकता है, जबकि प्रत्येक ग्रामवासी शिक्षित हो। इसके लिए गांवों में प्राथमिक और उच्च विद्यालयों का निर्माण होना चाहिए।

सरकार भूमि विकास और किसानों की हालत सुधारने के लिए कई कानून बनाती है। खेती की उन्नति की भी नई वैज्ञानिक विधियां विकसित हो रही हैं, सहकारी बैंकों से कृषकों के लिए ऋण की व्यवस्था हो रही है, पर कैसे ? इन्हें समझने के लिए किसान का शिक्षित होना जरूरी है, तभी वह योजनाओं का पूर्ण लाभ ले सकता है।

गांवों की अन्य समस्या पीने के पानी की है। भारत में हजारों गांव ऐसे हैं जहां आज भी जनता को साफ पानी नहीं मिलता। गांव में बने पोखर और छोटी नदियां नष्ट हो चुकी हैं। इन तालाबों को फिर से खोदकर गांव के लोगों को दूषित जल से छुटकारा दिलवाना होगा। पीने के पानी के साथ ही सिंचाई के साधन बढ़ाने के लिए भी नहरों और नल कूपों का जाल बिछाया जाना चाहिए।

गांव में अस्वच्छता भी एक समस्या है। घरों का कूड़ा लोग घर के बाहर फेंक देते हैं। घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे दुर्गंध उत्पन्न होती है, मच्छर मक्खी पैदा होते हैं। इसके लिए नालियों और ईंटों की पक्की गलियों का प्रबंध आवश्यक है, जिससे स्वच्छता बनी रहे।

आज भी हजारों गांवों में वैद्य, डॉक्टर या हकीम नहीं है। ऐसे में ग्रामीण किसी रोग की चपेट में आकर बिना सही इलाज के मर जाते हैं। ऐसे में गांवों में निशुल्क अस्पतालों की व्यवस्था होनी चाहिए।

ग्राम सुधार

गांव की उन्नति के लिए वहां कुटीर उद्योगों और ग्राम शिल्प के विकास, यातायात के साधनों और गांवों को नगर तक जोड़ने वाली सड़कों का विकास और बिजली की आपूर्ति भी होनी चाहिए। देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक गतिविधिओं की नवीनतम जानकारी के लिए वहां रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्रों को पहुंचाने की व्यवस्था भी यथासंभव होनी चाहिए।

गांवों में किसानों को विवाह, मुंडन, जनेयू आदि उत्सवों के अवसर पर या कभी आर्थिक तंगी में महाजनों से भारी सूद पर कर्ज भी लेना पड़ता है। सूदखोर, महाजनों आदि से ग्रामवासियों को छुटकारा देने के लिए गांवों में सहकारी बैंकों की स्थापना होनी चाहिए।

कृषि की उन्नति में खादों का मुख्य हाथ होता है। खाद का सबसे अच्छा रूप गोबर है। खाद के लिए गांवों में खेती के आस पास या खाली भूमि पर ऐसे वृक्षों का रोपण करना चाहिए जोकि फलों का, चारे का और ईधन का काम दे सके।

गांवों और कृषि कि उन्नति का मुख्य आधार गाय, बैल, भैंस आदि है। गाय का दूध स्वास्थ्य का तथा गोबर का आधार है। इसलिए पशुधन का विकास और नस्ल सुधार अत्यंत आवश्यक है। इनसे एक ओर गांव वालों को दूध व खाद मिलेंगे तो वहीं दूसरी ओर दूध बेचने से अतिरिक्त आय भी होगी।

गांव में आज हजारों की संख्या में बंधुआ मजदूर है। ग्रामों की उन्नति के लिए उनकी मुक्ति भी आवश्यक है। गांवों में आजकल मुकदमे बाजी भी बढ़ती जा रही है। इससे ग्रामवासियों का समय और धन दोनों नष्ट होते हैं। ऐसे में उनके लिए पंचायत व्यवस्था को अधिक सुसंगठित करना चाहिए ताकि ग्रामीणों को न्याय मिल सके।

उपसंहार

गांव देश की इकाई हैं। जिस दिन भारत में गांवों का सुधार हो जाएगा उस दिन सारे देश का हित होगा। ऐसे में सरकार को गांवों की उन्नति के लिए प्रयास करने चाहिए।


इसके साथ ही हमारा आर्टिकल – Gram Sudhar Par Nibandh समाप्त होता है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य कई निबंध पढ़ने के लिए हमारे आर्टिकल – निबंध लेखन को चैक करें।

अन्य निबंध – Essay in Hindi

समय का सदपयोगरक्षाबंधन पर निबंध
अनुशासन का महत्व पर निबंधभ्रष्टाचार पर निबंध
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंधसंगति का असर पर निबंध
स्वच्छ भारत अभियान पर निबंधबेरोजगारी पर निबंध
मेरा प्रिय मित्रविज्ञान वरदान या अभिशाप
मेरा प्रिय खेलमेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध
मेरा भारत महानमेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध
गाय पर निबंधसच्चे मित्र पर निबंध
दिवाली पर निबंधभारतीय संस्कृति पर निबंध
प्रदूषण पर निबंधआदर्श पड़ोसी पर निबंध
होली पर निबंधशिक्षा में खेलों का महत्व
दशहरा पर निबंधविद्या : एक सर्वोत्तम धन
गणतंत्र दिवसआदर्श विद्यार्थी पर निबंध
स्वतंत्रता दिवसदहेज प्रथा पर निबंध
मंहगाई पर निबंधअच्छे स्वास्थ्य पर निबंध
परोपकार पर निबंधरेडियो पर निबंध
वृक्षारोपण पर निबंधग्राम सुधार पर निबंध
समाचार पत्र पर निबंधपुस्तकालय पर निबंध
बसंत ऋतु पर निबंधप्रजातंत्र पर निबंध
टेलीविजन पर निबंधविद्यालय के वार्षिकोत्सव पर निबंध
महिला दिवस पर निबंध

अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.