समय का सदपयोग – Samay ka Sadupyog Essay in Hindi

Samay ka Sadupyog Par Nibandh

भूमिका

यह बात तो हम शुरू से ही सुनते आ रहे हैं कि ‘समय ही मनुष्य का असली धन है’। इसको जो बेवजह बर्बाद करते हैं, वह जीवन की असली संपत्ति को सदैव के लिए खो देते हैं। आधुनिक समय में हमें हर किसी से यही सुनने को मिलता है कि उसके पास समय नहीं है।

यानि आजकल हर व्यक्ति अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि दिन कैसे बीत जाता है? पता ही नहीं चलता है। इसलिए आज के वैज्ञानिक युग में समय की कीमत और अधिक बढ़ जाती है। क्योंकि आजकल हर कोई व्यक्ति एक दूसरे से आगे निकलकर सफल होना चाहता है।

और एक सफल व्यक्ति के जीवन में समय का सर्वाधिक महत्त्व होता है, जिसे वह संभालकर ही खर्च करता है। इसलिए आज हम अपने इस लेख में समय के महत्व और उसके सदुपयोग से जुड़े बिंदुओं पर बात करेंगे। 



समय का अर्थ एवम् महत्व (Samay ka Sadupyog ka Mahatva)

समय किसी भी व्यक्ति के जीवन में सफलता की एक महत्वपूर्ण कुंजी होती है। जिसके माध्यम से वह अपने जीवन की नैया को पार लगाता है। लेकिन अब प्रश्न यह उठता है कि इस समय को बर्बाद करने से कैसे रोका जाए, ताकि हम भी अन्य लोगों की तरह जीवन में कुछ बन सके।

तो ऐसा तभी मुमकिन है जब हम अपने समय को उन कार्यों में लगाकर जो हमारे लिए आवश्यक है, समय का सदुपयोग कर सकते हैं। ठीक उसी प्रकार से, एक बुद्धिमान और सफल व्यक्ति समय का सदुपयोग करके ही सफलता की सीढ़ी पर चढ़ता है।

इतिहास भी गवाह है कि जो व्यक्ति समय के मूल्य को नहीं समझते हैं, वो कभी कामयाब नहीं हो पाते हैं। इसलिए हमें समय का सदुपयोग करना आना चाहिए।


कैसे करें समय का सदुपयोग? (Samay ka Sadupyog kaise karein)

वैसे तो हर व्यक्ति का समय को उपयोग करने का तरीका अलग अलग होता है। लेकिन यदि आपको अपने समय का प्रबंधन करने में कोई परेशानी हो रही है, या आपको अपने खाली समय को उपयोग करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका नहीं मिल रहा है तो आपको उपरोक्त बातों को अपनी जीवन शैली में जरूर अपनाना चाहिए। तभी आप अपने समय का सदुपयोग कर पाएंगे।

1.समय सारणी बनाने का महत्व

Samay ka Sadupyog - Samay Sarini
Samay ka Sadupyog

जैसा कि हम जानते हैं कि सबको सप्ताह में 7 दिन और दिन में 24 घंटे ही मिलते हैं परन्तु कामयाब और नाकाम व्यक्ति में उसी समय को उपयोग करने के ढंग में बहुत अंतर होता है। बुद्धिमान व्यक्ति कभी अपना वक्त जाया नहीं करता, यही सर्वश्रेष्ठ खूबी उसे जीवन में कामयाबी दिलाती है। 

अपने समय को सही ढंग से उपयोग करने के लिए एक पक्की समय सारिणी यानी टाइम टेबल बना लें। जैसे स्कूल में विभिन्न विषयों के लिए निर्धारित समय दिए जाते हैं। यदि हमें अपने मन में याद नहीं रहता तो बेशक उसे किसी कागज़ या अपने मोबाइल में लिख के रख सकते हैं।

इसके अलावा, समय सारिणी बनाने के लिए पहले एक सूची बनाएं जिसमें वो सारी चीजें लिखें जो आप पूरे दिन में करना चाहते हैं। उसके बाद अपनी रुचि और काम की अहमियत के हिसाब से एक सही अनु-क्रम बना लें। हर कार्य के लिए एक घंटा, 2 घंटे, आदि जितने भी चाहिए, उस हिसाब से अपना सारा समय बांट लें। 

केवल समय सारिणी बना कर दीवार पर चिपकाने से कुछ नहीं होगा, उसका पालन करना भी अनिवार्य है। यह एक ऐसा कर्तव्य है जो हमें बिना किसी पर्यवेक्षक के डर से निभाना होता है। इस कार्य में हम खुद ही अपने पर्यवेक्षक हैं।

यह समय सारिणी का पालन करने से किसी और का नहीं बल्कि केवल खुद हमारा ही लाभ होगा। दूसरी तरफ इसका पालन ना करने से भी नुक़सान किसी और का नहीं बल्कि खुद का ही होगा।

2. खाली समय का प्रयोग करना

ज़रूरी नहीं है कि हम हर समय काम में ही जुटे हों। यदि काम से छुट्टी हो या कई दिन ऐसे होते हैं जब हमारे पास कुछ जरूरी काम नहीं होता। उन दिनों को और खाली समय का सदुपयोग करना भी बहुत ज़रूरी होता है। टीवी देख कर या कोई खेल खेलकर भी मनोरंजन करना ज़रूरी है परन्तु ध्यान रखें कि हम उस सारे खाली समय को मनोरंजन में ही ना निकल दें। 

कुछ समय कुछ उत्पादक अवश्य करें, मनोरंजन तो चलता ही रहता है। अपनी कुछ शौक पूरे करें, खाना बनाए या पेंटिंग जैसे शोंक पूरे करें, यह सिर्फ आपको खुशी ही नहीं देंगी बल्कि आपके दिमाग को फिर से काम करने के लिए ताज़ा भी कर देंगी।

इसके अलावा आप खाली समय में कुछ लिख कर या कोई अच्छी किताब पढ़ कर अपने ज्ञान में बढ़ावा भी कर सकते हैं। 

3. विराम भी ज़रूरी

ज़रूरी नहीं है कि अपनी समय सारिणी को आप बहुत कठोर बना लें। बीच में छोटे छोटे विराम लेना भी उतना ही ज़रूरी है जितना काम करना। यदि विराम का समय बचाने के लिए आप निरंतर है काम में जुटे रहेंगे तो उस काम की कुशलता आधी रह जाती है।

किसी मशीन को भी यदि बिना आराम दिए लगातार चलाया जाए तो वो जल्दी खराब हो जाती है, हम तो फिर भी इंसान हैं। 

इसलिए विराम करना भी उतना ही अनिवार्य है परंतु ध्यान रहे विराम काम से लंबी भी नहीं होनी चाहिए। दोनों में सही मात्रा का संतुलन रखने में ही भलाई है।

4. स्वयं के लिए कुछ समय निकालना

काम और शौक़ को समय देने के अलावा खुद के लिए भी समय निकालना अनिवार्य है। खुद के लिए समय निकालने से तात्पर्य है खुद को जानना। ध्यान लगाना यानी मेडिटेशन करना तथा खुद के अंदर झाँकना भी उतना ही ज़रूरी है जितना बाहर की जानकारी लेना।

यह वो रहस्य है जिससे आपके बाहर के सारे काम भी संवर जाएंगे और निपुणता बढ़ जाएगी। चाहे दिन में केवल 15 से 20 मिनट ही निकालें पर हमें स्वयं पर काम करना भी ज़रूरी है। 

5. स्वयं को प्रोत्साहित करना

जब हमारे अच्छे काम की कोई प्रशंसा करे तो स्वभाविक हमें खुशी होती है और हम और काम करने के लिए प्रोत्साहित हो जाते हैं। उसी तरह खुद को प्रोत्साहित करना भी ज़रूरी है। जब भी हम कोई लक्ष्य पूरा कर लें, उसके बाद खुद को कोई इनाम दें। चाहे इनाम में विराम ही क्यों ना हो, यह अपने दिमाग को ताज़ा और प्रोत्साहित रखने का मंत्र है। 

6. रात को जल्दी सो कर सुबह जल्दी उठने का महत्व

रात की अच्छी नींद पूरे दिन के ऊर्जा का स्रोत होती है। अच्छी नींद का होना बहुत ही ज़रूरी है। अगर हम अच्छे से सोएंगे तभी अगले दिन ताज़ा दिमाग के साथ अपने समय का अच्छे से उपयोग कर पाएंगे। इसलिए यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि सोने में समय व्यर्थ होता है, बल्कि सात से आठ घंटे सोने से शरीर और दिमाग दोनों तंदरुस्त रहते हैं और हम बाकी जागते हुए समय का सदपयोग कर सकते हैं। 

7. काम कल पर डालने की आदत के नुक़सान

‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय होएगी बहुरी करेगो कब’

संत कबीर जी के इस मशहूर दोहे से तो हम जानकर ही है जो हमें काम को उसी समय करने की सीख देता है। कल की किसी को गारंटी नहीं दी जा सकती, इसलिए जो भी काम हो, उसे टालने की बजाय उसी समय पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। इससे काम समय पर भी पूर्ण हो जाएगा और अंतिम समय पर ज़्यादा काम करने का दबाव भी नहीं पड़ेगा। 

अन्यथा आख़िरी मौके पर काम करने के दबाव में काम बिगड़ भी सकता है। इसलिए समय का सदुपयोग उसी बात में है यदि हम सारा काम साथ की साथ ही करते चलें और उस को टाल टाल कर बाद के लिए जमा ना कर लें। 

8. प्राथमिकता देखना और प्रतिनिधित्व करना

हर समय सभी कार्य को पूरा करना संभव नहीं होता। हर कार्य की बराबर महत्ता भी नहीं होती। इसलिए पहले वो कार्य ढूंढें जो सबसे ज़्यादा आवश्यक है, यानि उन्हें प्राथमिकता अनुसार करना चाहिए। यह ना हो कि हम किसी गैर ज़रूरी काम में ही सारा समय व्यस्त कर दें और अंत में ज़रूरी कामों के लिए समय ही ना बचे, इसलिए कार्यों को उनकी महत्ता अनुसार अनु क्रम में करना अति अनिवार्य है। 

हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सारे काम स्वयं करने भी ज़रूरी नहीं होते। जब हम प्राथमिकता अनुसार करेंगे, तब यह भी देख लेंगे की किन किन कार्यों में हमें खुद शामिल होने ही ज़रूरत है। यदि हम किसी कम्पनी में ऊँचे दर्जे पर हों तो काम और कर्तव्य को आगे प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इससे हम पर बोझ भी कम होगा और हम अपने काम अच्छे से भी कर सकेंगे। 

9. सोशल मीडिया पर समय की बर्बादी ना करना

आधुनिक समय में हर व्यक्ति मोबाइल का इस्तेमाल करता है। जिसके माध्यम से वह दूर बैठे अपने रिश्तेदार, दोस्तों और जानने वालों के संपर्क में बना रहता है। लेकिन कुछ सालों से सोशल मीडिया का क्रेज काफी बढ़ गया है। जिसके कारण लोगों का अधिकतर समय सोशल मीडिया पर बीत जाया करता है।

देखा जाए तो विद्यार्थियों के लिए सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग उनकी पढ़ाई और करियर पर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जितना हो सके हमें कम से कम सोशल मीडिया एप्स का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग दिन भर मोबाइल के साथ चिपके रहते हैं।

इससे ना केवल आपका समय बर्बाद होता है बल्कि यह आपकी आंखों और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डालता है। इसलिए सोशल मीडिया का निर्धारित प्रयोग करके भी आप अपने समय का सदुपयोग कर सकते हैं।

10. लक्ष्य निर्धारण समय के सदुपयोग का अचूक उपाय

कहते है कि जो सपने व्यक्ति को सोने नहीं देते हैं, वही उसके जीवन का उद्देश्य बन जाते हैं। यानि आपने अपने जीवन में कुछ बनने या पाने का लक्ष्य सोच रखा है। तो आप अवश्य ही उसे पाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। जो कही ना कही आपके समय की बचत करने में सहायक है।

अगर किसी व्यक्ति को अपने जीवन में यह ज्ञात है कि उसे कोई कार्य क्यों, कैसे, कब और कहां करना है? तो वह अवश्य ही समयानुसार उस कार्य को पूर्ण करने अपने उद्देश्य लक्ष्य को पा सकता है।

इसलिए यदि आप अपना समय बचाना चाहते हैं तो आपको अपने जीवन में छोटे छोटे लक्ष्य बनाने होंगे। ताकि उनको प्राप्त करने के दौरान आप अपेक्षाकृत अपने समय को भी बचा सके।


विद्यार्थियों के लिए समय का महत्व

विद्यार्थियों के लिए तो समय का बहुत गहरा मतलब होता है। बच्चों को प्रकृति से समय पर सब काम करने की सीख लेनी चाहिए, जैसे सूरज अपने समय पर उदय और अस्त्त होता है, मौसम भी अपने समय अनुसार बदलते हैं, आदि। यदि बाल्यकाल में बच्चे समय का सदुपयोग करके अच्छे से पढ़ाई करेंगे और अपना खाली समय उत्पादक चीज़ों में लगाएंगे, तभी वो आगे जाकर अपने व्यवसाय में भी सफलता प्राप्त कर पाएंगे। 

और तो और बाल्यकाल में पड़ी आदतें उम्र भर रहती हैं इसलिए बच्चों को शुरू से ही समय कल महत्व के बारे में समझना चाहिए क्योंकि बीता हुए समय कभी वापिस नहीं लाया जा सकता। विद्यार्थी देश का भविष्य होते हैं, जितने होनहार विद्यार्थी होंगे, उतना सुनहरा भविष्य होगा। 

उपसंहार

समय किसी के लिए रुकता नहीं है। यह कहावत भी है कि समय और लहरें किसी का इंतजार नहीं करती। बीते हुए समय की बर्बादी पर पछताने से वो समय लौट कर नहीं आता। इसलिए पछताने से अच्छा हम पहले ही अपने समय का सदुपयोग करने को अपने स्वभाव कि ही एक आदत बना लें। समय को बर्बाद करने वाले कभी आबाद नहीं होते।


इसके साथ ही हमारा निबंध – Samay ka Sadupyog समाप्त होता है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य कई निबंध पढ़ने के लिए हमारा आर्टिकल – निबंध लेखन को चेक करें।

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निष्ठा विज

निष्ठा विज एक लेखिका है जो डिजिटल मार्केटिंग और फैशन से सम्बन्धित विषयों पर लिखने में अत्यंत आवेशपूर्ण है। वह एक छोटे शहर के व्यापारी परिवार से है और लेखन में ही अपना व्यवसाय बनाना चाहती है।

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