प्रदूषण पर निबंध – Pollution Essay in Hindi

Pradushan Par Nibandh

प्रदूषण क्या है? Pradushan kise kahate hain

मनुष्य एक स्वार्थी प्राणी है जो प्रकृति के दिए हुए उपहारों का अपनी निजी ज़रूरतों के लिए अनुचित लाभ उठाता जा रहा है। मनुष्य की इस लापरवाही की वजह से हमें वैश्विक तापमान और प्रदूषण जैसी भयंकर समस्याओं से झुजना पड़ रहा है। प्रदूषण का अर्थ होता है पावन प्राकृतिक संसाधनों में अशुद्धियों के मेल से अपवित्र हो जाना। 

अधुंकिक युग के नवीनीकरण या आधुनिकीकरण के स्वार्थ में प्रकृति का हर बहमुल्या संसाधन दाव पर है। चाहे वो शुद्ध हवा हो, नदियों और झीलों में बेहता शीशे की तरह साफ पानी हो या पोष्टिक तत्वों से भरपूर मिट्टी हो, हर संसाधन पूर्णतः दूषित हो चुका है। यही कारण है की धरती को बचाए रखने के पथ में विघ्न डालने वाले विभिन्न प्रकार के प्रदूषण का जन्म हुआ जिसमें से वायु प्रदूषण, धूनी प्रदूषण, जल प्रदुषण और मृदा प्रदूषण प्रमुख चिंता का विषय हैं। 


प्रदूषण के प्रकार – Pradushan ke Prakar

वायु प्रदूषण

शुद्ध हवा में श्वास लेना हर जीव के लिए उतना ही अनिवार्य है जितना धरती कि ऊर्जा के लिए सूर्य उदय। प्रकृति की सारी रचनाओं में से अकेला मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो केवल अपने लिए ही भी बल्कि बाकी जातियों के लिए भी हवा को दूषित कर के अनेक समस्याओं को निमंत्रण दे रहा है। हवा में अशुद्धियों का मिलना और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ज़हरीली गैसों की मात्रा के बड़ने को वायु प्रदूषण कहा जाता है। 

Pollution essay in hindi - pradushan ki samasya par nibandh
Pradushan ki samasya par Nibandh – वायु प्रदूषण

विश्व के हर कोने में कारख़ानों के बढ़ते आंकड़े बहुत तेज़ी से शुद्ध हवा में ज़हरीली गैसें छोड़ कर उसे दूषित कर रहे हैं। कारख़ानों की चिमनियों के अतिरिक्त सड़कों पर दौड़ते मोटर गाड़ियाँ, बड़े ट्रक, ओटो रिक्शा और स्कूटर आदि भी हवा में अशुद्धियों की वृद्धि करते हैं। बहुत सारे बिजली से चलने वाले यंत्र जैसे फ्रिज आदि हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ कर वायु को दूषित करते हैं। 

हवा के दूषित होने से केवल मनुष्य को ही भी बल्कि बहुत जीव जंतुओं को भी श्वास से सम्बन्धित रोगों कि संभावना बढ़ती जा रही है। बच्चे और बुजुर्गों को फेफड़ों से जुड़ी अस्थमा जैसी बीमारियाँ तो आम ही होती जा रही है। हवा में जहरीली गैसों की उपस्थिति से बारिश की पवित्र बूंदे भी ‘अम्लीय वर्षा‘ बन कर नीचे बरसने लगी है जो ताज महल जैसे खूबसूरत कला के सफ़ेद और शुद्ध पत्थर को भी पीला कर रही हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा के बढ़ाव से धरती की ओज़ोन परत में भी छेद हो रहा है। 

वायु प्रदूषण को दूर करने के लिए हमें कारख़ानों की चिमनियों से गैस निकालने से पहले उनको छानकर शुद्ध करना चाहिए, यदि यह मुमकिन ना हो तो चिमनियों का मुंह बहुत ऊंचाई पर रखना चाहिए ताकि आस पास में बसे नागरिकों को जेहरली हवा में श्वास ना लेना पड़े। ज़्यादा खतरनाक गैस छोड़ने वाले कारख़ानों को शहरों ओर बस्तियों से दूर विकसित करना चाहिए। जितना हो सके, मोटर गाड़ियों का उपयोग कम कर के पैदल या साइकिल पर यात्रा करनी चाहिए। 


ध्वनि प्रदूषण

वायुमंडल में विभिन्न उपकरणों के शोर के बढ़ने को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।

सड़कों पर चलते वाहनों का शोर, उनके हॉर्न की आवाज़ें, कारख़ानों में चलती मशीनों का शोर, लाउडस्पीकर पर चलते विज्ञापन आदि सब ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं। इसके अतिरिक्त विवाह, समाहरो आदि में बजाय जाने वाले डी जे पर ऊँचे गाने भी ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाते हैं।

Pollution essay in hindi
Pollution essay in hindi – ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती समस्या निश्चित रूप से बहुत रोगों को आमंत्रित कर रही है। अनचाहे शोर से दिल की बीमारियों से पीड़ित बड़े बुजुर्गों को दिल का दौरा होने का खतरा होता है। छोटी उम्र में ही मनुष्य एवं जीव जंतु की कानों की सुनने कि शक्ति ख़तम हो सकती है। उच्च रक्तचाप से जुड़े रोग भी ध्वनि प्रदूषण से बड़ते हैं। 

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सबसे पहले सरकार को विवाह समारोह में चलने वाले ऊँचे स्पीकर पर गाने लगाने से निषेद करना होगा। इसकी आवाज़ कम करने के अतिरिक्त रात भर चलने वाले इन डी जी को केवल नियमित समय तक ही अनुमति होनी चाहिए। सड़कों पर चलने वाले वाहनों को बिना ज़रूरत के हॉर्न बजाने पर चलान होना चाहिए और विद्यालयों एवं अस्पतालों के पास तो हॉर्न और लाउडस्पीकर का पूर्णतः निषेद करना होगा। 


जल प्रदूषण

मनुष्य का शरीर सत्तर से अधिक प्रतिशत जल से बना है। स्वस्थ जीवन के लिए केवल मनुष्य ही को ही नहीं, हर जीव को अपने शरीर को जलयोजित रखना अनिवार्य है परन्तु दुर्भाग्यवश हम जिस गति से साफ पानी के स्रोतों को दूषित करते जा रहे हैं, साफ जल की कमी होती जा रही है। पवित्र जल में अशुद्धियों के मिलने को जल प्रदूषण कहते हैं। 

Pradushan Par Nibandh
Pradushan Par Nibandh – जल प्रदूषण

कारख़ानों से निकासित होने वाला ज़हरीली पानी साफ नदियों में बहा दिया जाता है, जिस से नदी का साफ पानी दूषित हो जाता है। नदियों या झीलों में कपड़े धोना, शहरों का कूड़ा नदी में फेंकना, जानवरों को नदियों और झीलों में नहलाना आदि यह सब जल के दूषित होने के कारण हैं। 

जल प्रदूषण की वजह से पानी में रहने वाले सैकड़ों जीवों की मृत्यु हो जाती है। धरती पर रहने वाले जानवर भी नदियों से दूषित पानी पी कर बीमार हो जाते हैं। मनुष्य ने जल प्रदूषण से खुद को भी विभिन्न रोगों के साक्षी कर दिया है। मलेरिया, हैजा, किडनी या पेट में पथरी, डेंगू और विभिन्न पाचक शक्ति ख़तम करने वाली बीमारियाँ तो आम हो गई हैं। 

जल प्रदूषण को कम करने के लिए झीलों या नदियों में कारख़ानों का विषाक्त अपशिष्ट नीकासित करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। हमें पानी को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए और साफ पानी के किसी भी स्रोत में कुढ़ा फेंक कर या कपड़े धो कर उसे दूषित नहीं करना चाहिए। 


मृदा प्रदूषण

धरती की स्वच्छ मिट्टी में अशुद्धियों के मिलने को मिट्टी या मृदा प्रदूषण कहते हैं। 

कृषि के क्षेत्र में फ़सलों की सुरक्षा के लिए ज़्यादा मात्रा में छिड़काए जाने वाले कीटनाशक और खरपतवारनाशी दवाएँ मिट्टी के पोष्टिक तत्वों को कम कर देती है जिस कारण मृदा प्रदूषण होता है। इसके अतिरिक्त एक ही फसल बारी बारी उगाने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा कम हो जाती है। मिट्टी में  गैर बायोडिग्रेडेबल कचरे का दफन, मृदा अपरदन और वननाशन भी चिंता का विषय है।

Pradushan Par Nibandh
Pradushan ki samasya par Nibandh- मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण की वजह से पेड़, पौधों और फ़सलों को मिट्टी से ज़रूरी पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते। नकली तत्वों से उगाई गई फसलें मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती हैं और पाचक शक्ति पर भयंकर असर होता है। उपजाऊ धरती भी धीरे धीरे बंजर होने लगती है। 

मृदा प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए हमें फसल का चक्रिकरण करना चाहिए, यानी एक ही फसल बारी बारी उगाने की बजाय बीच में फलीदार पौधे उगा कर मिट्टी के तत्वों की भरपाई कर लेनी चाहिए। ज़्यादा मात्रा में कीटनाशक डालने की बजाय जैव उर्वरक यानी गोबर, प्राकृतिक खाद, आदि का प्रयोग कर के मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बरकरार रखना चाहिए। ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ उगा कर मृदा अपरदन की समस्या भी कम की जा सकती है। 


प्रदूषण के कारण

पर्यावरण के द्वारा ही धरती पर मानव जीवन संभव हो पाया है। लेकिन आधुनिक समय में विकास और प्रगति के नाम पर मनुष्य ने प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं यानि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना आरंभ कर दिया है। ऐसे में पर्यावरण का संतुलन दिन प्रति दिन बिगड़ता ही जा रहा है। इसे ही हम पर्यावरण प्रदूषण के नाम से जानते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण मानव और जीव जंतुओं का अस्तित्व मिटने की कगार पर आ गया है। इसके कारण न जाने कितने ही जीव जंतु विलुप्त हो गए और न जाने कितने मनुष्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए। प्रदूषण मुख्य रूप से हवा, पानी, मृदा और वातावरण में विद्यमान होकर हमारे पर्यावरण को दूषित कर रहा है। जिससे धरती का संतुलन भी बिगड़ रहा है।

ऐसे में जब पर्यावरण और प्रकृति प्रदत्त चीजों को प्रदूषण मुक्त करने की बात आती है। तब हमें सबसे पहले यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आखिर प्रदूषण फैलने का मुख्य कारण क्या है?

जैसे-जैसे विश्व की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, वैसे वैसे प्राकृतिक संसाधनों का अधिक मात्रा में उपयोग और दुरुपयोग भी होने लगा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति के लिए शुद्ध वातावरण और प्राकृतिक माहौल की उपलब्धता कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऊपर से बढ़ते औद्योगिकरण और वैज्ञानिक आविष्कारों ने भी पर्यावरण को प्रदूषित किया है।

इसके साथ ही वनों की कटाई, पेड़ों की लकड़ियों का अत्यधिक प्रयोग, कल कारखानों से निकलने वाला धुआं, रासायनिक कचरे से दूषित होता नदियों का जल, कीटनाशक दवाएं और रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी का दोहन, पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के कारण ध्वनि और वायु में घुलता जहर और विकास के नाम पर प्रकृति प्रदत्त चीजों का दुरुपयोग पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाने में सहायक है।

पर्यावरण प्रदूषण के चलते ही धरती पर बाढ़, सूखा, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलती हैं। इसके अलावा प्रदूषण के कारण वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड की अधिकता होती जा रही है।

जोकि धरती के तापमान और जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।ऐसे में प्रदूषण की समस्या आज एक वैश्विक समस्या बन गई है। जिसको आपसी सहयोग से जल्दी नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके परिणाम सम्पूर्ण मानव जाति के विनाश के रूप में सामने आएंगे।


प्रदूषण को रोकने के उपाय – Pradushan ko rokne ke Upay

पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी एक व्यक्ति को नही अपितु सम्पूर्ण मानव जाति को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। तभी हम पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा पाएंगे। इसके लिए आज हम आपको कुछ एक उपाय बताने जा रहे हैं, जिनको अमल में लाकर आप पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। साथ ही एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए पर्यावरण का संरक्षण हमारा मुख्य कर्तव्य होना चाहिए।

  1. वातावरण में शुद्ध हवा पाने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम पांच पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए।

  2. आम जनता को पेट्रोल और डीजल युक्त वाहनों की अपेक्षा अधिक से अधिक सीएनजी और बैट्री चालित वाहनों का प्रयोग करना चाहिए।

  3. सरकार द्वारा जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए उचित कानून बनाए जाने चाहिए। ताकि प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग कम से कम हो।

  4. पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए कृषि में विषैले पदार्थों और रासायनिक खादों के इस्तेमाल की जगह जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

  5. वर्षा के जल को संचित करने के लिए घरों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग विधि का प्रयोग किया जाना चाहिए। जिससे आप वर्षा के जल को घरेलू कार्यों में प्रयोग में लाकर जल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं।

  6. सरकार द्वारा उन कल कारखानों को चिह्नित किया जाना चाहिए जोकि अपशिष्ट पदार्थों को नदियों में बहा देते हैं।

  7. जहां चिमनियों का धुआं अधिक मात्रा में बाहर निकलता है, वहां फिल्टर का प्रयोग आवश्यक घोषित कर देना चाहिए। जिसके लिए कानूनी कार्यवाही को पूर्ण रूप से लागू कर देना चाहिए।

  8. वनों और जैव विविधता बनाए रखने वाले जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को सरकार द्वारा दंडित किया जाना चाहिए।

  9. घरों में गोबर गैस संयंत्र के अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया जाना चाहिए। ताकि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित किया जा सके।

  10. किसी भी तरह के अपशिष्ट पदार्थों, कचरे, रेडियोधर्मी पदार्थ, कृषि युक्त सामान, तेल रिसाव आदि को नदियों, झीलों और तालाबों में जाने से रोकना चाहिए। ताकि पर्यावरण में मौजूद जल संसाधनों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।


सारांश

धरती केवल मनुष्य की संपति नहीं है। हमें अपना स्वार्थ त्याग कर यह समझना होना की हमें बाकी जीवों ओर अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्वच्छ प्राकृतिक संसाधनों को बचा के रखना होगा। हमें जितना हो सके इन अमूल्य संसाधनों को दूषित होने से बचा कर सतत विकास का मार्ग अपनाना होगा।



इसके साथ ही हमारा आर्टिकल – Pradushan Par Nibanbh (Pollution Essay in Hindi) समाप्त होता है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य कई निबंध पढ़ने के लिए हमारे आर्टिकल – निबंध लेखन को चैक करें।

अन्य निबंध – Essay in Hindi

समय का सदपयोगरक्षाबंधन पर निबंध
अनुशासन का महत्व पर निबंधभ्रष्टाचार पर निबंध
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंधसंगति का असर पर निबंध
स्वच्छ भारत अभियान पर निबंधबेरोजगारी पर निबंध
मेरा प्रिय मित्रविज्ञान वरदान या अभिशाप
मेरा प्रिय खेलमेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध
मेरा भारत महानमेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध
गाय पर निबंधसच्चे मित्र पर निबंध
दिवाली पर निबंधभारतीय संस्कृति पर निबंध
प्रदूषण पर निबंधआदर्श पड़ोसी पर निबंध
होली पर निबंधशिक्षा में खेलों का महत्व
दशहरा पर निबंधविद्या : एक सर्वोत्तम धन
गणतंत्र दिवसआदर्श विद्यार्थी पर निबंध
स्वतंत्रता दिवसदहेज प्रथा पर निबंध
मंहगाई पर निबंधअच्छे स्वास्थ्य पर निबंध
परोपकार पर निबंधरेडियो पर निबंध
वृक्षारोपण पर निबंधग्राम सुधार पर निबंध
समाचार पत्र पर निबंधपुस्तकालय पर निबंध
बसंत ऋतु पर निबंधप्रजातंत्र पर निबंध
टेलीविजन पर निबंधविद्यालय के वार्षिकोत्सव पर निबंध
महिला दिवस पर निबंध

निष्ठा विज

निष्ठा विज एक लेखिका है जो डिजिटल मार्केटिंग और फैशन से सम्बन्धित विषयों पर लिखने में अत्यंत आवेशपूर्ण है। वह एक छोटे शहर के व्यापारी परिवार से है और लेखन में ही अपना व्यवसाय बनाना चाहती है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.