समाचार पत्र पर निबंध – Essay on Newspaper in Hindi

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज के बिना अकेले नहीं रह सकता है। समाज में एक दूसरे से परिचित होने की और उन परिचितों के संबंध में जानने की लालसा उसके मन में सदैव बनी रहती है। ऐसे में आज के वैज्ञानिक युग में जहां सम्पूर्ण विश्व एक समाज बनकर उभरा है तो आज का मनुष्य अपने इस समाज की प्रतिदिन होने वाली गतिविधियों की नित्य जानकारी हासिल करना चाहता है। जिसके लिए समाचार पत्रों का चलन मानव की इसी जिज्ञासा की पूर्ति करने के लिए हुआ है।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि नवीन समाचारों को जानने के इच्छुक जन समाचार पत्रों पर ऐसे झपटते है जैसे कोई भूखा व्यक्ति रोटी झपटता है। इसी का परिणाम है कि समाचार पत्रों का प्रचार प्रसार दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। चाहे बात किसी सरकारी परीक्षा की तैयारी हो या राष्ट्रीय खबरों से खुद को जागरूक करने की। हर तरीके से समाचार पत्र लोगों के लिए निष्पक्ष रहता है। वर्तमान डिजिटल युग में समाचार पत्रों का रूप भी डिजिटल हो चला है। अब आप कहीं भी बैठे हुए समाचार पत्रों को मोबाइल के माध्यम से पढ़ सकते हैं।

भारत में समाचार पत्र का शुभारंभ

विश्व में समाचार पत्र का प्रयोग सर्वप्रथम 11 वीं सदी में यूरोप में हुआ था। जिसके बाद भारत में साल 1812 में राजा राम मोहन राय के नेतृत्व में समाचार पत्रों का प्रकाशन हुआ था और भारत का पहला समाचार पत्र बंगाल गजट निकला। धीरे धीरे अलग अलग भारतीय भाषाओं में समाचार पत्रों का प्रकाशन हुआ। साथ ही अंग्रेजी हुकूमत को भारत से उखाड़ फेंकने में समाचार पत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके लिए लाला लाजपतराय का पंजाब केसरी और महात्मा गांधी का हरिजन आदि कई सारे महत्वपूर्ण समाचार पत्र प्रकाशित हुआ करते थे। ऐसे में आज हम समाचार पत्रों को जितना उन्नत देखते है, वह वर्षों की साधना का फल है और आज समाचार पत्र समाजिक, राजनैतिक, धार्मिक, साहित्यिक और आर्थिक विकास के एक आवश्यक अंग बन गए हैं।

समाचार पत्रों की महत्ता

समाचार पत्रों से समाज को अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। देश विदेश की राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं समेत कई नवीन जानकारियां हमें प्राप्त होती हैं। साथ ही सामाचार पत्र कुरीतियों, धार्मिक अंधविश्वासों, समाज में हो रहे अन्याय को रोकने का सबल साधन हैं। इतना ही नहीं समाचार पत्रों की ताकत के आगे निरंकुश शासक भी घुटने टेक देते हैं।

इसी कारण इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। इसके अलावा समाचार पत्र जन जागरण का जरूरी साधन होते हैं जिनके माध्यम से जनता दिशा निर्देश भी प्राप्त करती है। एक बहुत लंबे वक्त से समाज में हो रहे अत्याचार और शोषण के खिलाफ समाचार पत्रों के माध्यम से ही लड़ाई लड़ी गई है। इस प्रकार समाचार पत्र जन भावना को व्यक्त करने के साथ ही समय समय पर जनता की भावनाओं को आंदोलित के करने में सहायक हैं।

समाचार पत्रों के भाग

समय के साथ समाचार पत्रों के स्वरूप में भी काफी परिवर्तन आया है। आज जहां इनके प्रथम पृष्ठ पर देश विदेश के समाचार प्रमुखता से दर्शाए जाते हैं तो वहीं स्थानीय समाचार के लिए अखबार में अलग पृष्ठ होता है। आजकल समाचार पत्रों में नौकरी, शिक्षा और विवाह आदि के विज्ञापन भी होते हैं। साथ ही समाचार पत्रों पर सोना चांदी के भाव भी प्रकाशित होते हैं। इतना ही नहीं अखबारों में अब संपादकीय विचार भी आते है और समय-समय पर अखबारों के साथ विशेषांक भी छपते हैं।

साथ ही सामाजिक रूप से लोगों को जोड़े रखने के लिए विभिन्न मुद्दों पर लेखकों और आम जनता की राय कविताओं व लेख के माध्यम से समाचार पत्रों में छापी जाती हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं कि समाचार पत्र को विश्व की गतिविधियों का अधिक से अधिक परिचायक बनाने की चेष्टा रखकर उसे मनोरंजन और जन प्रिय बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए।

उपसंहार

आजकल पैसा कमाने की होड़ में पूंजीपति मालिक उन खबरों को अधिक महत्व देने लगते हैं, जिनसे उन्हें लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही कुछ समाचार पत्र सांप्रदायिक होने के कारण फूट डालते हैं तो वहीं कुछ समाचार पत्र जनता की विचारधारा को संकुचित करके उन्हें गलत मार्ग पर भी अग्रसरित कर देते है, जिससे समाज एक गलत दिशा की ओर बढ़ने लग जाता है। ऐसे में समाचार पत्रों के प्रकाशन के समय जनहित और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए तभी समाचार पत्र सच्चे अर्थों में समाज में जन जागरण के अग्रदूत कहलाएंगे।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.