मेरा प्रिय खेल

भूमिका

विद्यार्थी जीवन में खेलों की महत्ता पढ़ाई लिखाई के समान है। जितना ज्ञान हमें किताबों से मिलता है, उतनी ही सीख हमें खेलों से भी मिलती है। इसलिए हर विद्यार्थी को किसी ना किसी खेल में भाग ज़रूर लेना चाहिए। मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है क्योंकि इस खेल ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है और क्रिकेट ने सदा विश्व भर में हमारे देश का नाम रोशन किया है। 

खेल का आरम्भ एवम् इतिहास

इस खेल का आरम्भ समय निश्चित रूप में उपलब्ध नहीं है परन्तु माना जाता है कि क्रिकेट का जन्म एक बच्चों के खेल के रूप में इंग्लैंड में हुआ था। लगभग एक शतक के लिए यह खेल इतना प्रसिद्ध नहीं था। 18 वीं सदी में जब यह खेल इंग्लैंड का राष्ट्रीय खेल बनाया गया, उसके बाद इसका विकास एवं प्रसिद्धि कि शुरूआत हुई। 19 वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी डब्ल्यू. जी. ग्रेस को इस खेल का पिता माना जाता है। 

नियम

इस खेल में दो टीमें भाग लेती हैं, जिनमें ग्यारह ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। टॉस से तय किया जाता है कि कौन से टीम पहले बल्लेबाज़ी करेगी। यह खेल खुले मैदान में खेला जाता है, जिसे स्टेडियम कहते हैं। इस मैदान के बिलकुल बीच में एक पिच होती है जिस पर दोनों किनारों पर विकेट होते हैं और एक समय पर दोनों किनारों पर दो बल्लेबाज मौजूद होते हैं, जो गेंद को बल्ला मारने पर भाग कर रण ले सकते हैं और यदि गेंद सीमा को छू ले या सीमा के पार चली जाते तो चार या छह रण मिलते हैं। 

एक टीम के दो बल्लेबाज़ों के अतिरिक्त उस समय मैदान में दूसरी टीम के सारे खिलाड़ी क्षेत्ररक्षण यानी फील्डिंग करते हैं, जिन मी से एक गेंदबाज़ी करता है। इस खेल का निर्देशन करने के लिए मैदान में दो अंपायर भी मौजूद होते हैं। अंत में ज़्यादा रन बनाने वाली टीम जीत जाती है। 

प्रकार एवम् मुकाबले

यह खेल गेंदों की गिनती के आधार पर विभिन्न प्रकार से खेला जा सकता है। छह गेंदों को मिला कर एक ओवर कहा जाता है। विश्व भर में बीस और पचास ओवर के मैच खेले जाते हैं, इसके अतिरिक्त टेस्ट मैच भी खेले जाते हैं, जो पांच दिन तक चलते हैं, जो इस खेल के शुरुआत के समय में बहुत प्रसिद्ध थे। इस खेल को खिलाड़ियों के लिंग के आधार पर भी बाँटा गया है। महिला खिलाड़ियों के लिए अलग से मैच और विभिन्न मुकाबले होते हैं। 

आई. सी. सी. विश्व भर में विभिन्न मुकाबले करवाने वाली संस्था है। हर चार वर्ष बाद पचास ओवर वाला विश्व कप का टूर्नामेंट करवाया जाता है जिसमें विश्व की बहुत सारी उत्कृष्ट टीमें भाग लेती हैं। इसके अलावा चैंपियंस ट्रॉफी भी इस खेल का एक प्रसिद्ध टूर्नामेंट है। राष्ट्रीय स्तर पर आई. पी. एल. खेला जाता है जिसमें विभिन्न राज्यों की टीमें भाग लेती हैं। 

गुणों से भरपूर

हर खेल हमें कुछ ना कुछ सिखाता है परन्तु मेरा यह प्रिय खेल हमें ज़िंदगी के कुछ बहुत महत्वपूर्ण व्यावहारिक गुण सिखाता है जो उम्र भर काम आते हैं। क्रिकेट हमें धार्य, अभ्यास और मेहनत का महत्व सिखाता है। और तो और हमें टीम में खेल कर संघ भावना का एहसास होता है और सीख मिलती है कि टीम के सारे खिलाड़ियों के विचारों को साथ ले कर कैसे निर्णय लेते हैं। हार और जीत कुछ भी हो, हमें स्वीकार करना चाहिए, हार में ज़्यादा निराश और जीत में अति आत्मविश्वास नहीं होना चाहिए। सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए यह व्यावहारिक गुण किताबी ज्ञान से भी अधिक आवश्यक हैं। 

सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ी

भारतीय क्रिकेट टीम ने हमेशा ही देश वासियों का सिर गर्व से ऊंचा करवाया है। मेरे सबसे प्रिय खिलाड़ी टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं। इनकी सफलता की कहानी बहुत प्रेरणा दायक है। क्रिकेट से मेरे इतना लगाव का एक मुख्य कारण एम एस धोनी स्वयं हैं। इतनी मुश्किलों से शुरुआत करके उन्होंने यह आदरणीय उपाधि हासिल की है। इनका खेल में उत्साह ही अनोखा है। इनकी क़ाबिले प्रशंसा वाली कप्तानी ने भारतीय टीम को 2011 का विषय कप जीताया। 

इस खेल में मेरा सफर

भारतीय टीम के सारे उत्कृष्ट खिलाड़ी मेरे लिए बेजोड़ प्रेरणा का स्रोत हैं। मै तीन चार वर्ष की आयु में ही टीवी पर क्रिकेट देख कर बहुत प्रेरित होता था और गली में अपने दोस्तों साथ खेला करता था। परंतु चौथी कक्षा में आ कर मुझे अपने विद्यालय की क्रिकेट टीम में शामिल होने का मौका मिला। मैं ज़्यादा तर बल्लेबाज़ी का शौकीन हूं परंतु कभी ज़रूरत हो तो गेंदबाज़ी भी के लेता हूं। 

मेरे विद्यालय के क्रिकेट कोच बहुत ही अच्छे इंसान हैं। उन्होंने मेरा टीम में सिलेक्शन किया और मुझे ऊँचे स्तर पर खेलने के लिए प्रेरित किया। वह मुझे मेरी ग़लतियों पर सख्त डांट भी लगाते हैं और उपलब्धियों पर प्रोत्साहन भी खूब करते हैं। क्रिकेट के साथ उन्होंने मुझे बहुत नैतिक गुण भी सिखाए हैं। खूब अभ्यास के बाद हमारे विद्यालय की टीम ने पूरे ज़िले में अव्वल इनाम जीता। हमारे कोच ने मेरा उत्तम प्रदर्शन देख कर खुशी से मुझे टीम का कप्तान बना दिया और राज्य स्तर पर मैच खेलने के लिए तैयार किया। 

उप-संहार

मेरे क्रिकेट के लगाव ने मुझे बहुत मूल्यवान भेंट दिए हैं। खेल में जीते इनाम मेरे माता-पिता और अध्यापक को गर्व भरी मुस्कुराहट देते हैं। मैं आगे भी इसी तरह उनके मार्गदर्शन से इस खेल में सफल हो कर परिवार और देश का नाम रोशन करना चाहता हूं और यह आशा करता हूं कि भारतीय क्रिकेट टीम सदा भारत का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखती रहेगी।


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