मंहगाई पर निबंध

प्रस्तावना

आजकल हर व्यक्ति चाहे वह गांव में रह रहा हो, या शहर में। यही कहता मिलता है कि आधुनिक समय में जीवनयापन करना बड़ा मुश्किल हो चला है। क्यूंकि वस्तुओं के दाम इतने बढ़ गए हैं कि गरीब और मध्यमवर्गीय व्यक्ति की मंहगाई के कारण कमर टूट गई है। और एक बार जिस वस्तु के दाम बढ़ जाते हैं, वह नीचे आने का नाम ही नहीं लेते हैं। ऐसे में आज घर में प्रयोग होने वाली हर छोटी से लेकर बड़ी चीज का दाम बढ़ गया है, ऐसे में चाहे अनाज, दूध, सब्जी, कपड़ा, दवाई, किताबें हो, हर किसी के दाम आसमान छूने लगे हैं। इतना ही नहीं जिन वस्तुओं के मूल्य बढ़ जाते हैं, कभी कभी तो वह वस्तु बाज़ार से गायब ही हो जाती है। ऐसे में कुछ व्यापारी कालाबाजारी करके उन वस्तुओं को अधिक मूल्य पर बेचकर मुनाफा कमाने में लगे हुए हैं।

मंहगाई के बढ़ने का कारण

सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर वस्तुएं सुलभ नहीं हो पाती हैं। जिसके पीछे बढ़ती जनसंख्या, लोगों की निम्न आमदनी और जमाखोरी आदि मुख्य कारक है। साथ ही आज व्यापारी वर्ग को बस एक मौका चाहिए
वस्तुओं के दाम बढ़ाने के। फिर चाहे कभी सरकारी कर हो, रेल भाड़ा बढ़ा हो, किसी प्रकार की हड़ताल इत्यादि बताकर लाभ कमाने के चलते वह अधिक कीमतों पर माल बेच रहे हैं। इतना ही नहीं व्यापारियों के अधिक लाभ कमाने की होड़ में अब अधिक पैसे देने के बाद भी ग्राहक को शुद्ध सामान की प्राप्ति नहीं होती है। तो वहीं उच्च वर्ग की क्रय शक्ति के बढ़ने के कारण भी वस्तुओं के दाम बढ़ने लगे है। जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। और जिस तरह से भारत की जनसंख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से उत्पादन ना होने के चलते भी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। इतना ही नहीं सरकार जिस वस्तु के मूल्य स्थिर रखने की घोषणा करती है, अगले दिन उसी के दाम बढ़े हुए मिलते है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है भारत में बढ़ती पेट्रोल की कीमतें और बाज़ार में बढ़ते प्याज के दाम। साथ ही कहीं ना कहीं विकासशील देश होने के कारण हमें अधिकतर वस्तुओं के आयात के लिए अंतरराष्ट्रीय देशों पर निर्भर रहना होता है। और किसी भी तरह की अपातकालीन परिस्थितियों में आयात किए गए माल की कीमतों में अवश्य ही वृद्धि होती है।

मंहगाई को रोकने के उपाय

जहां एक ओर मंहगाई को रोकने के लिए सर्वप्रथम देश की जनसंख्या पर नियंत्रण रखना जरूरी है। तो वहीं महंगाई को रोकने के लिए देश में उद्योग और कृषि दोनों में ही उत्पादन को शीघ्रता से बढ़ाना होगा। तभी मंहगाई से आम आदमी को राहत मिल पाएगी। और तो और माल की ढुलाई में भी तेजी लानी होगी, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कमी के चलते बाज़ार में उनके दाम ना बढ़ने पाएं। इतना ही नहीं यदि सरकार देश की जनता खासकर गरीबों, आम आदमी और किसानों का भला चाहती है। तो उसे सरकारी खर्चों में कटौती करके साथ ही मंत्रियों के ऊपर खर्च की जाने वाली राशि को कम करके सस्ती कीमत पर आवश्यक वस्तुओं को उपलब्ध कराना चाहिए। और कानून में वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और चोरबाजारी करने वाले लोगों के लिए सजा के प्रावधान को और सख्त बनाना चाहिए, ताकि आम जनता को मंहगाई की मार से मचाया जा सके।

उपसंहार

मंहगाई सभ्य समाज के लिए एक अभिशाप की भांति है। जिसके चलते आम आदमी की जिंदगी हर रोज प्रभावित हो रही है। और जल्द ही बढ़ती मंहगाई को नियंत्रित नहीं किया गया, तो समाज में अपराध रोके नहीं रुकेगा। और कोरोना के बाद हालत इतने बदल गए हैं कि इसके चलते लोगों की बचतें प्रभावित हो गई है, ऊपर से बढ़ती मंहगाई आम लोगों को निगलती ही जा रही है। इसको प्रभावी नीतियों के माध्यम से रोकना वर्तमान समय की जरूरत है।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर रही हूं। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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