Essay on Water Pollution in Hindi | जल प्रदूषण पर निबंध

जल को ही जीवन कहा जाता है। इसके बिना हम अपने जीवन के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। जल हमारे जीवन के लिए उतना ही आवश्यक है जितनी की वायु, लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि आज जल का महत्व ना तो हम समझ पाए हैं और ना ही किसी और को समझा पाए हैं।

हम सभी केवल ये बोलते ही रहते हैं कि जल ही जीवन है लेकिन अपनी निजी जिंदगी में कभी भी इस बात को उतारते नहीं है। यदि उतारते तो आज हमारे देश में बहने वाली न जाने कितनी नदियां प्रदूषित न होतीं, नदियों को मां कहते हुए भी हम उनमें बड़े बड़े नालों का गंदा पानी छोड़ देते हैं। 

यदि आज हम जल के महत्व को ना समझे तो आगे चलकर पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगेगा क्योंकि पृथ्वी से जल का स्तर लगातार कम होता जा रहा है। बड़ी-बड़ी विशाल नदियां सूखती चली जा रही हैं और पीने के लिए हमारे पास पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जल इस प्रकृति का वो बहुमूल्य धन है जिसकी रक्षा और उपयोग हमें आगे आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचते हुए करना है।

आज कल नदियों का जल कुछ प्राकृतिक और मानवीय कारणों से दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता चला जा रहा है। हमारा सबसे पहला कर्तव्य जल को प्रदूषण से मुक्त कराना होना चाहिए, जिससे ये पूरी धरती चल रही है। जल इस प्रकृति का वो उपहार है जिससे अन्न, फल, फूल आदि मिलते हैं।

बादलों से अमृत के समान गिरने वाली बूंदों को किसी पात्र में एकत्रित कर इसका संरक्षण करके हम इस जल का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि समय रहते इस बढ़ते हुए जल प्रदूषण की समस्या का कोई समाधान न निकाला गया तो एक दिन ऐसा आएगा जब पूरा देश जल संकट का सामना कर रहा होगा।

जल प्रदूषण के कारण, Reasons Behind Water Pollution

जल प्रदूषण के मुख्य दो स्रोत होते हैं:-

  • प्राकृतिक
  • मानवीय

प्राकृतिक स्रोत:

जल में प्राकृतिक रूप से प्रदूषण बहुत से भिन्न भिन्न कारणों से फैलता है। खनिज पदार्थ, पौधों की पत्तियों, ह्यूमस पदार्थ, मनुष्य और जानवरों का मल-मूत्र इत्यादि जब जल में जाकर मिलता है तो प्राकृतिक रूप से जल प्रदूषण होता है।

किसी स्थान पर जब जल जमा रहता है और उस स्थान में खनिज पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है तो वो खनिज उस जल में मिल जाती है, जिसे जहरीला पदार्थ कहा जाता है। यदि ये बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, तो बहुत ही घातक हो सकते हैं। इसके अलावा बेरियम, बेरीलियम, कोबाल्ट, निकिल, टिन, वैनेडियम आदि पदार्थ भी प्राकृतिक रूप से जल में मिल जाते हैं।

मानवीय स्रोत

मनुष्यों द्वारा फेंके गए कूड़ा-करकट, गंदा पानी और अन्य कई प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ नदी और तालाब के जल में जाकर मिल जाते हैं। इन पदार्थों के जल में मिलने से जल प्रदूषित होने लगता है। हमारे द्वारा फेंके गए ऐसे अपशिष्ट पदार्थ छोटे और बड़े नालों के माध्यम से नदियों आदि में जाकर गिरते हैं जिससे नदियां बुरी तरह से प्रदूषित हो जाती हैं। सच बात तो ये है कि प्राकृतिक स्रोतों से अधिक मानवीय स्रोत जल प्रदूषण की मुख्य वजह हैं।

जल प्रदूषण तीन प्रकार के होते हैं, 3 Types Of Water Pollution

  • भौतिक जल प्रदूषण
  • जैविक जल प्रदूषण
  • रासायनिक जल प्रदूषण

भौतिक जल प्रदूषण: भौतिक जल प्रदूषण होने पर जल की गन्ध होती, स्वाद और ऊष्मीय गुणों में परिवर्तन हो जाता है। जल में हुए इस बदलाव से जल प्रदूषित होने का संकेत मिलता है।

जैविक जल प्रदूषण: जब जल में अनेक प्रकार के रोग पैदा करने वाले जीव प्रवेश करते हैं और ये जल को इतना दूषित कर देते हैं कि वो जल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है, इसे ही जैविक जल प्रदूषण कहा जाता है।

रासायनिक जल प्रदूषण: रासायनिक जल प्रदूषण तब होता है, जब जल में बहुत से  उद्योगों और अन्य स्रोतों से रासायनिक पदार्थ आकर जल में मिल जाते हैं। ये जल को सर्वाधिक प्रदूषित करते हैं।

जल प्रदूषण के प्रभाव

Effect Of Water Pollution

जल प्रदूषण से हमारे जीवन पर बहुत फर्क पड़ता है प्रदूषित होने पर जल इतना घातक हो जाता है कि उससे किसी की जान भी जा सकती है। दूषित जल पीने से हमारे शरीर में अनेकों प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होने लगती हैं।

प्रदूषित जल केवल पीने से शरीर के अंदर की बीमारियां ही नहीं बल्कि नहाने से शरीर की त्वचा पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। लगातार दूषित जल का प्रयोग करने से मनुष्य मानसिक और शारीरिक से कमजोर होने लगता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

जल प्रदूषण का प्रभाव केवल मनुष्यों ही नहीं बल्कि जानवरों, पक्षियों और वनों आदि पर भी स्पष्ट देखने को मिलता है। प्रदूषित तत्वों के जल में मिलने की वजह से भारी मात्रा में जानवरों और पानी में रहने वाले जीवों की मौत के आंकड़े हर साल बढ़ते ही जा रहे हैं।

जल प्रदूषण का सबसे अधिक दुष्प्रभाव किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है क्योंकि जल दूषित होने से कृषि योग्य भूमि धीरे धीरे नष्ट होती जा रही है, वन समाप्त होते जा रहे हैं, जोकि एक बहुत ही गंभीर समस्या है। जब प्रदूषित जल किसी भी तरह की अनाज पैदा करने वाली भूमि से होकर गुजरता है, तो उस भूमि की उर्वरता को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। 

आज के वर्तमान युग में जल प्रदूषण किसी एक इंसान को नहीं बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित करने पर तुला हुआ है। जल प्रदूषण, राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हमारे देश में होने वाली दो तिहाई बीमारियों का कारण प्रदूषित जल है। नवजात शिशुओं से लेकर बड़े बुज़ुर्गों तक पर जल प्रदूषण का उनके स्वास्थ्य पर बहुत ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

जल प्रदूषण से होने वाली अनेक बीमारियां

जल प्रदूषण के लगातार बढ़ने के कारण पूरे विश्व में अनेकों प्रकार की बीमारियाँ और महामारियाँ फैल रही हैं। बहुत सी ऐसी गंभीर बीमारियां हैं जिनके कारण लोग अपनी जान तक गंवा रहे हैं। ये बीमारियाँ मनुष्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी अपना शिकार बना रही हैं। उनके स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है। जल प्रदूषण से टाईफाइड, पीलिया, हैजा, गैस्ट्रिक, चर्म रोग, पेट रोग, दस्त, उल्टी, बुखार जैसी आदि बीमारियां फैलती हैं। 

जल प्रदूषण से बचने के उपाय

  • जल प्रदूषण की समस्या से बचने के लिए और कम करने के लिए हम सभी को हर यथासंभव उपाय करना चाहिए।
  • सर्वप्रथम तो हमें अपने घर और गली-मोहल्लों के नालों की नियमित रूप से सफाई करवानी चाहिए।
  • नदियों, कुओं, तालाबों आदि में कपडे़ धोने, उसमें पशुओं को नहलाने और मनुष्यों के नहाने जैसी आदि क्रियाओं पर सरकार को पूर्ण रूप से रोक लगा देनी चाहिए।
  • जल निकास के लिए पक्की नालियों की भी पूर्ण व्यवस्था करवानी चाहिए।
  • प्रदूषित जल को स्वच्छ और पीने योग्य बनाने के लिए लगातार अनुसंधान और बदलाव किए जाने चाहिए।
  • सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी जाने चाहिए।

जल प्रदूषण के संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई जानी चाहिए। लोगों तक इसके कारणों, दुष्प्रभावों और इसके रोकथाम के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए। सरकार द्वारा समय-समय पर तालाबों, नदियों, नालों आदि अन्य जल स्त्रोतों की नियमित रूप से जाँच, और साफ-सफाई और सुरक्षा करवाई जाए।

निष्कर्ष ( Water Pollution )

तेजी से बढ़ती जल प्रदूषण की समस्या आगे भविष्य के लिए खतरा बन रही है, उतनी ही तेजी से जल प्रदूषण का दुष्प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। इसीलिए अब हम सभी को जागरूक होना होगा और हमें पूरी तरह से संख्या में आगे आकर जल प्रदूषण को खत्म करने के लिए एक साथ आना होगा।

ये प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि हम सभी को जल प्रदूषण से पृथ्वी को बचाने में अपना थोड़ा सा ही सही लेकिन खुल के थोड़ा योगदान अवश्य दें और दूसरों को भी बदलने से पहले अपने भीतर बदलाव लाना बहुत जरूरी होता है।

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