सनातन धर्म में 25 दिसंबर क्यों विशेष है?

भारत देश विविध संस्कृतियों, धर्मों और विभिन्न त्योहारों के लिए विश्व भर में जाना जाता है। यहां समस्त धर्म के लोग मिलकर सौहार्द और भाईचारे के साथ त्योहार मानते हैं। ऐसे में जब हिन्दू समाज के लोग देश में दीवाली का त्योहार मनाते हैं तो अन्य समुदाय के लोग भी इसे बड़ी ही धूमधाम से संपन्न करते हैं। इस प्रकार भारत में दीवाली, होली, ईद, लौहड़ी आदि त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं।

ठीक उसी प्रकार से 25 दिसंबर को भी ईसाई धर्म के लोग क्रिसमस पर्व के तौर पर मनाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह ने धरती पर जन्म लिया था जिसकी खुशी में ईसाई धर्म के लोग इस दिन को अपने सबसे बड़े त्योहार के रूप में मनाते हैं। तो वहीं सनातन धर्म में भी 25 दिसंबर का विशेष महत्व है…..चलिए जानते है इसके पीछे क्या है कारण।

सूर्य देवता का जन्म

भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार, 25 दिसंबर का दिन साल के अन्य दिनों में सबसे बड़ा होता है। जिसके चलते इसे सूर्य देवता के उत्तरायण का दिन माना जाता है और तब से 25 दिसंबर को गैर ईसाई धर्म के लोग सूर्य देवता के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

गीता जयंती

जैसा कि आपको ज्ञात है कि हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता की रचना स्वयं भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय अपने मुख से की थी। जिसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को धर्म और युद्ध नीति से जुड़े उपदेश दिए थे। माना जाता है भगवान कृष्ण ने अर्जुन को 25 दिसंबर के दिन ही गीता के ज्ञान से अवगत कराया था।

ऐसे में इस दिन को सनातन धर्म में गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है जोकि हर साल मार्गशीष मास के शुक्लपक्ष को मनाई जाती है। आपको बता दें कि हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। जिसे लगभग 5157 साल पहले भगवान कृष्ण ने रचित किया था। 

इसके अलावा हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि इसके अध्ययन के पश्चात् व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। व्यक्ति को जीवन में सही और गलत का ज्ञान हो जाता है। साथ ही गीता के अध्ययन से व्यक्ति जीवन की हर मुश्किल परिस्थिति में खुद को संभाल लेता है। गीता में वर्णित श्लोक व्यक्ति को धर्म और अधर्म की पहचान कराते हैं।

साथ ही गीता व्यक्ति के जीवन को पुरुषार्थ की ओर ले जाती है। इसके अध्ययन से व्यक्ति को काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार से मुक्ति मिलती है।  इतना ही नहीं मानवता को सही दिशा देने के कारण रचना के इतने सालों बाद भी गीता हम मनुष्यों के लिए प्रासंगिक है। ऐसे में 25 दिसंबर को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है।

गीता जयंती पूजा विधि

सनातन धर्म को मानने वाले इस दिन उपवास रखते हैं। साथ ही भगवान कृष्ण का विधि विधान से पूजन करते हैं। इसके अलावा इस दिन पवित्र ग्रंथ गीता का पाठ किया जाता है। माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी के दिन उपवास रखने वाले व्यक्तियों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। गीता जयंती के दिन शंख बजाने से आपके द्वार पर लक्ष्मी जी का आगमन होता है। साथ ही कहा जाता है कि गीता जयंती के दिन श्रीमद्भागवत गीता को खरीदकर घर लाने पर भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।


इस प्रकार, 25 दिसंबर को जहां एक ओर ईसाई धर्म से जुड़े लोग क्रिसमस मनाते हैं तो वहीं हिन्दू धर्म में इस दिन को पवित्र ग्रंथ गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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