On Page SEO Kya hai

On-Page SEO Kya hota hai

On-page SEO उन तकनीकों को कहते हैं जिनको हम अपने वेबसाइट या blog के अंदर apply कर सकते हैं। इनमे आपके blog के कंटेंट की quality, blog की loading स्पीड, meta tags (जिनके बारे में हम आगे पढ़ेंगे) etc आते है।

क्योंकि ये सब चीज़े हमारे बस में होती है इसलिए इन तकनीकों से SEO करना सबसे आसान और लाभदायक होता है। इनमें से कुछ चीजें website बनाने समय ध्यान में रखनी होती है और कुछ उसके बाद। आइए इन strategies को एक एक करके विस्तार से जानते हैं।

On page seo kaise kare

Page का शीर्षक

Page title se हमारा मतलब है वो शब्द जो SERP पे नीले रंग में दिखाई देते हैं, जो एक तरह से हमारी website का चेहरा होते है, जिस को हम क्लिक करके उस site को खोलते हैं। अगर हम user हो कर सोचे तो हम वो नीले रंग वाला शीर्षक पढ़कर ही किसी site को खोलते हैं, इसलिए page title बहुत important है, user के लिए भी और google के लिए भी। 

यदि user द्वारा search किए हुए शब्द हमारे पेज title के शब्दों से मिलेंगे, तभी गूगल हमारी site को SERP पर ऊंचा rank देगा। और results page पर शीर्षक की character लिमिट होती है, इसका matlab हम 60 character से ज़्यादा लंबा शीर्षक लिखेंगे तो गूगल उसको काट कर आगे … लगा देगा। इसलिए पेज को शीर्षक देते समय सही कीवर्ड का उपयोग करना और उसकी लम्बाई कम रखना अनिवार्य है।

Meta Tags

Meta tags एक HTML document (जिसमे website बनती है) के वह parts होते हैं जो users को तो नहीं दिखते लेकिन Google जैसे search-engines को आपकी website या blog के बारे में कई सारी जानकारी देते हैं। जैसेकि – SERP पर blog post का क्या title दिखाना है, SERP पर blog के title के नीचे article के बारे में क्या information दिखानी है, article कब publish हुआ, कब update हुआ, article का author कौन है इत्यादि। 

आइये अब कुछ commonly used meta tags के बारे में जाने –

  1. Meta Title – ये आपके blog या website का वह title है जिसे SERP पर दिखाया जाता है। यह आपके blog के title जैसा भी हो सकता है और अलग भी। जैसे कि आपके ब्लॉग का title हो सकता है – “अंग्रेजी लिखना और पढ़ना सीखें” और आपके meta title को search पेज पर दिखेगा वो कुछ ऐसा हो सकता है – “अंग्रेजी लिखना और पढ़ना सीखें सिर्फ 21 दिनों में”। इस तरह के meta title से user के आपके link पर click करने की सम्भावना बढ़ जाती है।
    बस हमे ये ध्यान रखना चाहिए कि blog के अंदर दिखने वाला title और बाहर SERP पर दिखने वाला title बिलकुल अलग न हो।
  2. Meta description – Search results page मे ही आगे बढ़ते हैं, जो नीले शीर्षक के नीचे website की छोटी सी description दी होती है, वो भी रैंकिंग के नज़रिए से बहुत ज़रूरी है। यह डिस्क्रिप्शन लिखते समय अपनी website की qualities लिख सकते hain और कोशिश करें कि को पेज title के keywords हैं, वो description में firse use हो सकें। इससे ranking में भी फायदा होगा और ज़्यादा users भी attract होंगे। इसमें स्पेशल characters का उपयोग कम से कम करें।
  3. Meta keywords – ज़्यादा users को अट्रैक्ट करने के लिए कभी भी description या title में वो कीवर्ड का उपयोग मत करे जो आपकी website या page पर नहीं hai। वहीं कीवर्ड का चुनाव करें जिसके बारे में आपने content लिखा hai, नहीं तो search इंजन आपकी site या blog को penalty भी डाल सकता है।

Header Tags (h1, h2, h3, h4, h5)

आपके content की heading भी रिजल्ट पेज पर शो होने vale page title जितनी important hai। आईए फिर से student वाला उदाहरण लेकर समझते हैं। जब हम कोई science की किताब पड़ते थे तो पूरा पाठ एक अनु-क्रम (heirarchy) में होता था। सबसे उपर वाली heading सबसे बड़े size की होती है, फिर दूसरी उससे छोटी, और बाकी भी इसी क्रम में…। 

बिलकुल इसी तरह आपके website के page का अनुक्रम होना चाहिए. H1 tag में सबसे उपर वाली heading होनी चाहिए जो आपके सारे content का highlight हो। यह बात ध्यान में रखे कि H1 tag में एक ही heading हो, एक से अदा होने पर google confuse हो जाएगा और आपको ज़्यादा ऊंचा रैंक नहीं देगा। H1 के बाद H2 का ही प्रयोग करें, कोई level बीच में से skip मत करें और इसी क्रम में चलते रहें। हर heading में ज़बरदस्ती keyword डालने की कोशिश mt करें, heading में वही लिखें जो सच्ची आपके content को दर्शाता हो, google ऐसी sites को तरजीह देगा।

URL की optimization

URL का पूरा नाम होता है Uniform Resource Locator।सरल शब्दों में URL आपके site या blog का address होता है जो user और google दोनों को आपकी site का पता बताता है।

जैसे किसी डाकिए को आसान address वाला घर ढूंढने में कम समय लगता था उसी तरह google को भी simple address वाली website ढूंढना आसान लगता है जिस वजह कोसे vo उनको रिजल्ट page पर ऊंचा rank करता है। 

हमे अपना URL बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि वो google ko ढूंढ ने में और user को याद करने में आसान हो। उदाहरण के तौर पर हमने किसी cookery website पर chocolate cake की विधि के बारे में search किया तो address बनेगा– www.examplebakery/cake-recipes/chocolate-cake

इस url में hierarchy बिलकुल साफ़ समझ आ रही wहै।इसी तरह  URL अनुक्रम में हो और ज़्यादा special characters का उपयोग ना हो तो आपकी site google-friendly हो जाती है और user को भी URL आसानी से समझ आ जाता है।

पेज का Content

“Content is king” – ये कहावत blogging और SEO में काफी famous है। आपकी website या blog का सबसे important हिस्सा content ही होता है। Google का कहना है कि bloggers को सिर्फ अपने content पर ध्यान देना चाहिए बाकी सब चीज़े गूगल संभाल लेगा। 
ब्लॉग का design, theme, आपके blog की loading speed ये सब चीज़े बाद में आती हैं सबसे पहले आपका content ऐसा हो जिसे user और Google जैसे search engines पसंद करे। 

अब देखते हैं कि अच्छा content लिखने के लिए क्या करना चाहिए –

  • सही keywords – इस बात का खास ध्यान रखें कि user को आपके content से किस जानकारी की अभिलाषा है, user जो keywords search कर रहे  हैं, उन कीवर्ड का उपयोग करने की कोशिश करें।
  • Keywords की सही मात्र – हर लाइन में keywords ज़बरदस्ती डालने की कोशिश ना करें, जहां ज़रूरत हैं, वही लिखें नहीं तो इस strategy का उल्टा प्रभाव नकारात्मक हो सकता है।
  • Relevance – User आपके blog पर जिस जानकारी के लिए आया है उसे वो जानकारी जरूर दें। Google ज्यादा content पसंद करता है लेकिन कुछ bloggers ज्यादा content के चक्कर में इधर-उधर की बातें ब्लॉग में डाल देते हैं जो कई बार आपके ब्लॉग के हिसाब से relevant नहीं होता या user जिस जानकारी के लिए आया है उससे मिलता जुलता नहीं होता। 
  • समय के साथ update करना – कोई भी content हमेशा के लिए उपयुक्त नहीं रह सकता, समय के साथ उसको update करना बहुत अनिवार्य है नहीं तो google आपकी site का rank कुछ समय बाद नीचे कर सकता है।
  • Copy बिलकुल ना करें – Plagiarism एक गुनाह है, किसी भी और site या blog से नकल ना करें, google द्वारा आपकी साइट को सज़ा हो सकती है or रैंक भी नीचे आ सकता है।
  • Grammar और spelling चैक करें – अपने content को साइट पर upload करने से पहले उसको अच्छे से जांच करें, कोई भी व्याकरण या spelling की गलती हो तो सुधार लें, नहीं तो यह negavtive point में गिना जा सकता है।
  • Linkable होना चाहिए: यदि आपकी site का content आसानी से accessible नहीं है तो यह seo के नज़रिए से नकारात्मक बात है। अगर आपकी site का content देखने से पहले login करना ज़रूरी है, या फिर वो जानकारी के लिए कुछ फीस देनी पड़ती हो तो आपकी site users के लिए इतनी तरजीह नहीं रखेगी इसलिए गूगल भी आपको results page पर नीचे रैंक करेगा। 

Media optimization

Students वाले उदाहरण को फिर से लेते हुए देखें तो हम बिना किसी फोटो वाली किताब कभी शोंक से नहीं पड़ते थे मगर यदि कोई रंगीन या तस्वीरों वाली किताब होती तो उसे दिलचस्पी से पढ़ते थे। Google के साथ भी यही केस है, गूगल और users दोनों वो content पसंद करते है जिसमें media होता है। परंतु उस media को add करने के भी कुछ सही तरीके होते हैं:

  • Alt tags: जब भी हम अपने content में कोई तस्वीर लगाते हैं तो उस तस्वीर को upload करने के लिए coding में Alternate टैग का उपयोग करना पड़ता है और इस tag में उस तस्वीर के बारे में description लिखनी होती है। इस बात का ध्यान रखें कि उस description में अपने मुख्य विषय से जुड़े हुए शब्द या कोई keyword ही लिखें ताकि google के लिए वो समझना आसान हो जाए क्युकी गूगल को तस्वीरों का मतलब समझ नहीं आता बस उसके बारे में लिखी हुई description ही समझ आती है। ऐसे relevant description vala मीडिया डालने से आपकी site का रैंक बढ़ सकता है।
  • Interactive media: यह बात का ख्याल रखें कि जो भी मीडिया add कर रहें हैं, तस्वीरें या वीडियो, वो व्यर्थ ना जाए, वो किसी ना किसी रूप में user को फायदा दे। यदि सजावट के लिए मीडिया लगा रहे हैं तो आपको उसकी description अलग तरीके से दे ताकि google कन्फ्यूज ना हो। 

Conclusion

इस chapter में हमने on-page seo के मुख्य तरीके detail में सीखें। अपने website developer साथ बैठकर इस विधि को pratical use करके देखें, यदि आप खुद ही design कर रहे हैं तो dos और don‘ts को ध्यान में रखें। ज़्यादा ज़ल्दबाज़ी ना करें, सही strategy का result दिखने में समय लगता है, रात भर में इसका असर नहीं दिखेगा। बस google के नियम अनुसार चलें तो आप अपना blog optimise करने में ज़रूर कामयाब होंगे।

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