डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी – Abdul Kalam Biography in Hindi

Abdul Kalam ki Jivani

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक महान् भारतीय वैज्ञानिक, राजनेता, शिक्षाविद् और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के धनी थे। जिनके विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए इन्हें मिसाइल मैन की उपाधि से अलंकृत किया गया है। एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दिन अब्दुल कलाम है। जोकि भारत के 11वें राष्ट्रपति थे।

साथ ही जिन्हें भारतीय नागरिक ” जनता का राष्ट्रपति ” कहकर भी संबोधित किया करते हैं। इनके विषय में कहा जाता है कि एपीजे अब्दुल कलाम जिस कार्य को एक बार करने की सोच लेते थे, वह उस कार्य को पूरा करके ही दम लेते थे। इसलिए वह वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं। और आज हम आपके लिए एपीजे अब्दुल कलाम की प्रेरक जीवनी लेकर आए हैं। जिसे पढ़कर आप अवश्य ही अब्दुल कलाम के जीवन के बारे में काफी कुछ जान जाएंगे।


Abdul Kalam Biography in Hindi

जन्म वर्ष15 अक्टूबर 1931
मृत्यु वर्ष27 जुलाई 2015
जन्म स्थानरामेश्वरम, तमिलनाडु
मृत्यु स्थानशिलोंग, मेघालय
लोकप्रियतादेश के 11वें राष्ट्रपति, परमाणु वैज्ञानिक, रक्षा मंत्रालय में विशेष कार्यभार
उपाधिमिसाइल मैन, जनता का राष्ट्रपति
शिक्षाअंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक, इंजीनियरिंग की पढ़ाई
उम्र83 पूर्ण
पिता का नामजैनुलाब्दीन
माता का नामअशिअम्मा
भाई और बहन10
धर्ममुस्लिम (हिन्दू धर्म में गहरी आस्था)
वैज्ञानिक उपलब्धियांरोहिणी उपग्रह, अग्नि और पृथ्वी मिसाइल, परमाणु परीक्षण,उपग्रह प्रक्षेपण आदि
अन्य विशेषताएंशिक्षाविद्, लेखक और एक महान् राजनीतिज्ञ
पुरस्कारभारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और अन्य मानक उपाधियां

एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय- Life Story

अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारत के एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनका जन्मस्थान तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित धनुषकोडी गांव है। जहां वह एक संयुक्त परिवार में रहा करते थे। इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था। जोकि मछुआरों से रुपए लेकर उनको नाव किराए पर दिया करते थे। इनकी माता का नाम अशिअम्मा था।

साथ ही अब्दुल कलाम को मिलाकर उनके पांच भाई और पांच बहन थे। जिनमें से इनकी बड़ी बहन का नाम आसिम जोहरा था। और इनके भाइयों का नाम कासिम मोहम्मद, मुस्तफा कमल, मोहम्मद मुथु मीरा लेबाई मारिकायर था। वैसे तो अब्दुल कलाम के माता पिता पढ़े लिखे नहीं थे।

लेकिन वह बच्चों को सदैव ही पढ़ने के लिए प्रेरित किया करते थे। तो वहीं अब्दुल कलाम के पूर्वज उस समय के काफी बड़े जमींदार और व्यापारी हुआ करते थे। लेकिन 1920 का दशक आते आते उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई।


अब्दुल कलाम की आरंभिक शिक्षा – Education

जब अब्दुल कलाम पांच वर्ष के हुए। तब उनका दाखिला एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में करवा दिया गया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि स्कूल के दिनों में ही अब्दुल कलाम ने यह तय कर लिया था कि वह आगे चलकर विमान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाएंगे।

क्योंकि जब अब्दुल कलाम पांचवीं कक्षा में पढ़ा करते थे। तब एक दिन विज्ञान की कक्षा में उनके शिक्षक सभी बच्चों को पक्षी कैसे उड़ते है? इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। लेकिन जब शिक्षक ने देखा कि बच्चे उनका मतलब समझ नहीं पा रहे हैं। तो वह सभी बच्चों को लेकर समुन्द्र के निकट गए। जहां उन्होंने बच्चों को उड़ते हुए पक्षी दिखाए और उनके विषय में काफी कुछ बताया।

तभी अब्दुल कलाम ने यह सोच लिया था कि वह विमान की दुनिया में ही अपने भविष्य की संभावनाएं तलाश करेंगे। हालांकि इससे आगे का सफर अब्दुल कलाम के लिए आसान नहीं था। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए अनेकों जगह काम किया। यहां तक कि उन्होंने अखबार वितरण करके भी अपनी आजीविका चलाई थी।

परन्तु एपीजे अब्दुल कलाम बचपन से ही पढ़ाई में काफी रुचि रखते थे। साथ ही वह बहुत तीव्र दिमाग के थे। वह सदैव नई चीजों को सीखने के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने 12 वीं तक की पढ़ाई रामनाथपुरम स्च्वातर्ज मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूर्ण की थी।


करियर की शुरुआत – A. P. J. Abdul Kalam Career

इसके अलावा अब्दुल कलाम ने साल 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातक की शिक्षा ग्रहण की। और साल 1955 में उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री मद्रास के एक कॉलेज से हासिल की।

फिर वह साल 1960 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास ( वर्तमान चेन्नई) पहुंचे। जहां से उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद वर्ष 1962 में वह भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (Defence Research and Development Organization) में हावरक्राफ्ट की योजना पर कार्य करने लगे।

जिसकी सफलता पर इनकी मेहनत को काफी सरहाना मिली।  इसी दौरान भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ गया। जिसमें भारत को मिली करारी हार के बाद अब्दुल कलाम ने देश को नए हथियारों से सुसज्जित करने की ठान ली। फिर साल 1963 में अब्दुल कलाम को विक्रम स्पेस रिसर्च सेंटर में रॉकेट इंजीनियर के   पद पर भेज दिया गया।

जहां इन्हें प्रसिद्ध वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ कार्य करने का मौका मिला। और इसके बाद वर्ष 1969 में अब्दुल कलाम ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Reasearch Organization) में परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया।

जहां उन्होंने प्रथम उपग्रह satelite launch vehicle – SLV III और ध्रुवीय उपग्रह polar satelite Launch Vehicle – PSLV आदि के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके सफल प्रक्षेपण ने अब्दुल कलाम को सम्पूर्ण देश में प्रसिद्ध कर दिया।


वैज्ञानिक उपलब्धियां – Abdul Kalam’s Scientific Achievements

साल 1980 में अब्दुल कलाम को भारत सरकार ने आधुनिक मिसाइल परियोजना का कार्यभार सौंप दिया। जहां अब्दुल कलाम की मेहनत का सफल परिणाम यह रहा कि भारत को अंतरिक्ष मिशन क्लब की अंतरराष्ट्रीय सदस्यता प्राप्त हो गई। क्योंकि अब्दुल कलाम के प्रयासों से ही रोहिणी उपग्रह को धरती की कक्षा के समीप स्थापित किया गया था।

इसी दौरान अब्दुल कलाम ने अग्नि और पृथ्वी जैसे भारतीय प्रक्षेपास्त्र तकनीकों का  निर्माण किया था। साथ ही इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम का श्रेय भी इन्हीं को दिया जाता है। अब्दुल कलाम की वैज्ञानिक सफलता के कारण ही साल 1992 में अब्दुल कलाम को रक्षा मंत्री का वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किया गया। और अब्दुल कलाम की अध्यक्षता में ही वर्ष 1998 में पोखरण में दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया गया था।

इस प्रकार, अब्दुल कलाम की वैज्ञानिक सोच के परिणामस्वरूप ही भारत देश का नाम परमाणु संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हो गया। इतना ही नहीं, अब्दुल कलाम पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च नामक संस्था के भी सदस्य थे। और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी अब्दुल कलाम ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया था।

साथ ही अब्दुल कलाम ने डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर चिकित्सा के क्षेत्र में कम कीमत वाला और प्रभावी कोरोनरी स्टेंट विकसित किया। जिसे बाद में कलाम राजू स्टेंट नाम दिया गया। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने के उद्देश्य से टैबलेट पीसी बनाया गया। जिसको भी अब्दुल कलाम की अध्यक्षता में तैयार किया गया था। जिसे हम कलाम राजू टैबलेट के नाम से जानते हैं।


राजनैतिक जीवन – Abdul Kalam Political Life

एपीजे अब्दुल कलाम को एनडीए सरकार में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था। जिसके बाद साल 2002 में एपीजे अब्दुल कलाम को 90 प्रतिशत बहुमत से राष्ट्रपति चुन लिया गया। इन्होंने राष्ट्रपति के चुनाव में 922,884 वोटों और बहुमत के आधार पर अपने विपरित लक्ष्मी सहगल को पराजित किया था। ऐसे में अब्दुल कलाम ने अपनी दूरदर्शिता और देश के प्रति राष्ट्र प्रेम के चलते राष्ट्रपति पद पर रहते हुए कई कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया। और एक परमाणु वैज्ञानिक होने के तौर पर एपीजे अब्दुल कलाम भारत देश को अंतरिक्ष की दुनिया में सिरमौर बनाना चाहते थे। जिसके लिए अब्दुल कलाम जीवनपर्यंत भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत रहे।


अब्दुल कलाम को मिले पुरस्कार – Abdul Kalam Awards

भारत देश को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नए मुकाम तक पहुंचाने वाले डॉ. अब्दुल कलाम को वर्ष 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया है। साथ ही इन्हें इनकी वैज्ञानिक सफलताओं के लिए वर्ष 1981 में पद्म भूषण और वर्ष 1990 में पदम विभूषण से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा अब्दुल कलाम को वर्ष-

  • 1998 में वीर सावरकर पुरस्कार
  • 2000 में अलवरस रिसर्च सेंटर के द्वारा रामानुजन पुरस्कार
  • 2003 और 2006 में एमटीवी यूथ आइकॉन ऑफ़ द ईयर
  • 2007 में ब्रिटेन रॉयल सोसयटी द्वारा किंग चार्ल्स द्वितीय मेडल
  • 2008 में सिंगापुर में डॉक्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग की उपाधि
  • 2009 में अमेरिका एसएमई फाउंडेशन द्वारा हूवर मेडल
  • 2010 में वाटरलू यूनिवर्सिटी द्वारा मानक उपाधि
  • 2013 में राष्ट्रीय अंतरिक्ष सोसायटी द्वारा वॉन ब्रौन पुरस्कार
  • 2014 में ब्रिटेन द्वारा साइंस उपाधि समेत 40 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधि मिली है।


अब्दुल कलाम के बारे में रोचक तथ्य – Abdul Kalam Facts

अब्दुल कलाम बेहद ही अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे। साथ ही बच्चों से काफी प्रेम किया करते थे। इसलिए उन्हें जब भी मौका मिलता था, तब वह बच्चों के साथ काफी समय व्यतीत किया करते थे। फिर चाहे वह स्कूली छात्रों के बीच जाकर भाषण देना हो। या फिर उनके साथ तस्वीर छपवाना।

अब्दुल कलाम सदैव बच्चों की खुशी के लिए उनके साथ वक्त बिताया करते थे। अब्दुल कलाम इतने संवेदनशील थे कि इन्होंने डीआरडीओ की चहारदीवारी पर कांच के टुकड़े लगाने से मना कर दिया था। ताकि पक्षियों को किसी प्रकार की कोई हानि ना पहुंच सके।

अब्दुल कलाम की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में जब अब्दुल कलाम का नाम मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की मेरिट सूची में आया। तब उनकी मां और बहन ने अपने जेवर बेचकर उनकी फीस दी थी।

इतना ही नहीं अब्दुल कलाम ने अपने पिता से सहन शीलता और अनुशासन का गुण सीखा था। बचपन में जब इनके पिता एक बार मां के हाथ की बनी जली रोटी खा रहे थे। तब कलाम को उनके पिता ने एक नसीहत दी थी कि रिश्तों में गलतियां माफ कर दी जाती है और जो आपको पसंद नहीं है। उसके प्रति सहनशील हुआ जाता है।

इन्होंने करियर के शुरुआती दिनों में भारतीय वायु सेना में भी कार्य किया था। हालांकि इनका लड़ाकू पायलट बनने का सपना अधूरा रह गया था। क्योंकि वह इसके साक्षात्कार में असफल हो गए थे। जिसके बाद वह रक्षा विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक के तौर पर कार्य करने लगे।

इन्होंने वैज्ञानिक बनने की राह में कई बाधाओं को पार किया था। क्योंकि अपनी वैज्ञानिक असफलताओं को लेकर इनको कई बार तीखी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन इन्होंने स्वयं पर विश्वास के बल पर कई सारे सफल वैज्ञानिक शोधों को अंजाम दिया।

जब अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बने थे। तब उन्होंने राष्ट्रपति भवन में की जाने वाली इफ्तार पार्टी पर रोक लगा दी थी। हालांकि इससे उनकी काफी आलोचना हुई थी। लेकिन उन्होंने ऐसा करके अनाथालयों तक जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की ठानी थी।

साथ ही इनकी महानता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति बनने के बाद साल 2002 में केरल भ्रमण के दौरान जिन दो व्यक्तियों को राजभवन में निमंत्रण दिया था वह था एक मोची और एक ढाबे वाला व्यक्ति। जिनसे इनकी मुलाकात राष्ट्रपति बनने से पहले हुई थी।

इनके जीवन चरित्र पर साल 2020 में “अब्दुल कलाम: द मिसाइल मैन” नाम से हिंदी फिल्म बनाई गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब्दुल कलाम के जन्मदिवस को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। और तमिलनाडु में इनके जन्मदिवस को युवा पुनर्जागरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इनकी बचपन से ही गणित विषय में अत्यधिक रुचि थी। इसलिए यह गणित पढ़ने के लिए अपने एक शिक्षक के पास सुबह ही चले जाया करते थे। आपको बता दें कि डॉ. अब्दुल कलाम हिन्दू धर्म में काफी विश्वास रखते थे। वह भगवान राम और कृष्ण भक्ति से जुड़े संगीत को सुनना पसंद करते थे। और वह शाकाहार भोजन लिया करते थे।

वह जीवनभर अविवाहित रहे। और अब्दुल कलाम ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत के विकसित देश की संकल्पना में व्यतीत कर दिया। साथ ही वह अपनी सारी तनख्वाह एक ट्रस्ट को दान दे दिया करते थे। अब्दुल कलाम इतने साधारण व्यक्ति थे कि एक बार जब आईआईटी बनारस के दीक्षांत समारोह में अब्दुल कलाम को बुलाया गया। तब इनको वहां बैठने के लिए अन्य लोगों से अधिक ऊंची कुर्सी दी गई। जिसका विरोध करके इन्होंने सबके लिए समान कुर्सियों की व्यवस्था कराई।

वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में डॉ. कलाम के जन्मदिन की 84 वीं वर्षगांठ पर डाक टिकट जारी किया है। इसके अलावा इनपर बनी एक फिल्म मैं हूं कलाम में इनका रोल निभाने वाले बच्चे ने इनके जीवन चरित्र से प्रभावित होकर अपना नाम कलाम रख लिया था।

इनके नाम पर तमिलनाडु सरकार द्वारा मानविकी, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में महान कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कार की शुरुआत की गई है। जिसका नाम डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार है। इसके तहत स्वर्ण पदक और 5 लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाती है।


अब्दुल कलाम के विचार – Abdul Kalam Quotes in Hindi

जो लोग महान् सपने देखते हैं,
उनके महान् सपने पूरे भी होते हैं।

  • किसी भी स्थान पर ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए आपके भीतर ताकत होनी चाहिए। फिर चाहे आपको माउंट एवरेस्ट पर जाना हो या पेशा।

  • इस समाज को यदि भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है तो यह सुंदर कार्य केवल  माता, पिता और गुरु ही कर सकते हैं।

  • यदि आप स्वतंत्र नहीं है तो कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा।

  • भारत एक ऐसा देश है, जहां हम सिर्फ मौत, बीमारी, आतंकवाद और अपराध के बारे में पढ़ते हैं।

  • अपने आज का दान करके ही हम आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर बना सकते हैं।

  • जीवन में कठिनाईयां आवश्यक है, क्योंकि तभी आपको सफलता का आनंद मिलता है।

  • भारतीय मीडिया इतना नकारात्मक क्यों है? हमारे पास अच्छाईयां और उपलब्धियां समेत दिखाने को बहुत कुछ है। लेकिन हम अपने देश की सफलता से जुड़ी गाथाएं स्वीकारते नहीं है।

  • लक्ष्य को पाने के लिए आपको निष्ठावान होना पड़ेगा।

  • जो लोग सिर्फ इंतज़ार करते हैं, उन्हें सिर्फ उतना ही मिलता है। जितना कि कोशिश करने वाले त्याग देते हैं।


अब्दुल कलाम द्वारा लिखी गई किताबें – Abdul Kalam Books

अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ साथ लेखन की कला में भी माहिर थे। उनके द्वारा लिखित इंडिया 2020: ए विजन फॉर द न्यू मिलिनियम में उन्होंने भारत को एक विकसित देश बनाने की चेष्टा का व्याख्यान किया है। इसके साथ ही अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा माई जर्नी भी लिखी थी। जिसमें उन्होंने अपने संघर्ष भरे दिनों से लेकर राष्ट्रपति बनने तक के सफर का वर्णन किया है।

अब्दुल कलाम ने विंग्स ऑफ़ फायर, इग्रटिड माइंड्स, इंस्पायरिंग थॉट्स, यू आर बॉर्न टू ब्लॉसम, द ल्यूमिनस स्पार्क्स, द साइंटिफिक इंडियन, टारगेट 3 बिलियन,  गवर्नेंस फॉर ग्रोथ इन इंडिया, द फैमिली एंड द नेशन, ब्रयोंड 2020 आदि किताबों को भी रचित किया है।

साथ ही अब्दुल कलाम के जीवन चरित्र पर कई प्रसिद्ध लेखकों ने भी रचना लिखी है। जिनको पढ़कर भी आप अब्दुल कलाम के जीवन को जान सकते हैं। जोकि हैं –  राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, महात्मा अब्दुल कलाम के साथ मेरे दिन, ए लिटिल ड्रीम, कलाम प्रभावी आदि हैं। जिनको ना केवल भारतीयों द्वारा अपितु दक्षिण कोरिया समेत अन्य देशों में काफी पसंद किया जाता है।


कलाम के जीवन के अन्य पहलू

अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात् विभिन्न शिक्षण संस्थानों में बतौर अतिथि शिक्षक के तौर पर कार्यरत रहे। जहां वह कई सारे प्रेरक और ज्ञानवर्धक सेमिनारों का आयोजन किया करते थे। इसके अलावा वह भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग, भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद, भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर आदि में लंबे समय तक प्रोफ़ेसर भी रहे।

साथ ही उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों पर अपना महत्वपूर्ण व्याख्यान बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और अन्ना विश्वविद्यालय आदि विश्वविद्यालयों में जाकर दिया था। और वह अक्सर छात्रों के बीच जाकर उनके साथ काफी समय बिताया करते थे। साथ ही उनको नवीन वैज्ञानिक सोच और आविष्कारों के लिए प्रेरित किया करते थे।

इतना ही नहीं जब भी अब्दुल कलाम स्कूली बच्चों और छात्रों से रूबरू होते थे। तब वह अपनी वीआईपी सुरक्षा पर भी ध्यान नहीं दिया करते थे। इस प्रकार, डॉ. अब्दुल कलाम ना केवल एक महान् वैज्ञानिक थे। बल्कि वह काफी हंसमुख प्रवृत्ति के व्यक्ति के थे। जोकि हर वर्ग के व्यक्ति के साथ समान भाव से व्यवहार किया करते थे।


अब्दुल कलाम की मृत्यु – Abdul Kalam Death

साल 2015 में एक बार जब डॉ. अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिलोंग में एक महत्वपूर्ण विषय ” रहने योग्य ग्रह ” पर अपना भाषण दे रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। जिसके बाद उन्हें तुरंत बेथानी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी। डॉ. अब्दुल कलाम की मृत्यु पर सरकार द्वारा सात दिवसीय शोक की घोषणा की गई थी।

इनके निधन की खबर ने भारत समेत विश्व भर के कई दिग्गज व्यक्तियों को हिलाकर रख दिया था। क्यूंकि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक ऐसे व्यक्ति थे। जिनके जीवन प्रकाश के तले भारत का नाम सम्पूर्ण विश्व में आदर के साथ लिया जाता है। इन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और राजनीति सभी क्षेत्रों में समान रूप से अपना योगदान दिया। जिसके लिए भारतवर्ष सदैव इनका ऋणी रहेगा।

इस प्रकार, डॉ. अब्दुल कलाम वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए वह प्रेरणा है, जो उनके सपनों को सदैव दिशा निर्देश दिखा सकती है। और साथ ही हम उनके जीवन से काफी कुछ सीख सकते हैं। उनका इस सम्पूर्ण संसार को अलविदा कहना एक अपूरणीय क्षति है। और जिनका स्थान कोई नहीं ले सकता है। क्योंकि एक अद्भुत व्यक्तित्व के उदाहरण थे डॉ. कलाम।

इसके साथ ही – Abdul Kalam Biography in Hindi समाप्त होती है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आयी होगी। ऐसे ही अन्य कई जीवनी पढ़ने के लिए हमारी केटेगरी – जीवनी को चैक करें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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