क्रिस गार्डनर- जानिए, कैसे एक अनाथ ने तय किया सेल्समैन से लेकर अरबपति बनने का सफर

Chris Gardner success story

‘जीवन में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत करना आवश्यक है’

इस कहावत से हम सभी भली भांति परिचित है। लेकिन समाज में कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जो इस कहावत को पूर्णतया सत्य साबित कर पाते है,

अर्थात् जीवन को काफी संघर्षपूर्ण तरीके से व्यतीत करने के पश्चात् ही उन्हें जीवन में सफलता मिलती है। इन्हीं में से एक हैं- अमेरिका के जाने माने अरबपति क्रिस गार्डनर (Chris Gardner)।

जोकि एक सफल वक्ता, उद्यमी, लेखक और व्यापारी के तौर पर भी जाने जाते हैं। इनका सम्पूर्ण जीवन चरित्र वर्तमान और आने वाली पीढ़ी दोनों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

ऐसे में हमारा आज का यह लेख उन लोगों के लिए लाभदायक रहने वाला है, जो जीवन में कड़ी मेहनत करके सफल होना चाहते हैं या संघर्ष करने के बाद भी सफलता के लिए प्रयासरत है।

क्योंकि क्रिस गार्डनर की जीवनी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि लाख परेशानियों के बावजूद हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदैव कोशिश करते रहना चाहिए।

तो चलिए अब जानते हैं क्रिस गार्डनर के जीवन की संघर्षपूर्ण कहानी के बारे में….

क्रिस गार्डनर का बचपन बीता था काफी अभावों में

9 फरवरी साल 1954 को क्रिस गार्डनर का जन्म अमेरिका (America) के मिलवॉकी (Milwaukee), विस्कान्सिन (Wisconsin) में हुआ था।

इनका पूरा नाम क्रिस्टोफर पॉल गार्डनर है। इनके पिता थॉमस टर्नर की मृत्यु के बाद इनकी माता बेट्टी जीन ने फ्रेडे ट्रिप्लेट नाम के व्यक्ति के साथ शादी कर ली थी। 

साथ ही क्रिस गार्डनर की तीन बहनें हैं। जिनमें एक बड़ी बहन ओफेलिया (पहले पिता की संतान) और दो छोटी बहनें शेरोन और किम्बर्ली (दूसरे पिता की संतान) हैं।

इनके सौतेले पिता इनकी माता को शारीरिक रूप से काफी प्रताड़ित किया करते थे, जिससे इनका बचपन काफी प्रभावित हुआ था।

इतना ही नहीं, एक बार जब इनकी माता अपने पति के अत्याचारों से बहुत परेशान हो गई थी, तब उन्होंने अपने पति को जिंदा जलाने की कोशिश की।

जिसके बाद पुलिस ने क्रिस की माता को गिरफ्तार करके उन्हें जेल में डाल दिया। जिसके बाद क्रिस और उनकी बहनों ने अपना सारा जीवन माता-पिता के बिना ही व्यतीत किया।

माता-पिता के अभाव में क्रिस और उनकी बहनों को बाल गृह भेज दिया गया। जहां उन्हें अनाथों की भांति जीवन व्यतीत करना पड़ा।

हालांकि क्रिस गार्डनर अपने बचपन के बारे में बताते हुए अपने तीन मामाओं आर्चीबाल्ड, विली और हेनरी का भी जिक्र करते हैं, जिन्होंने उन्हें काफी प्रेम और स्नेह दिया।

इन तीनों में से क्रिस अपने मामा हेनरी से काफी प्रभावित थे, जोकि अमेरिका नौसेना में कार्यरत थे।

क्रिस गार्डनर बचपन से ही काफी शांत और सौम्य स्वभाव के थे, लेकिन जीवन के उत्तरार्ध में वह कई सारी गलत आदतों का शिकार हो गए थे।

जिसमें शराब पीना और ड्रग आदि सम्मिलित हैं। लेकिन क्रिस गार्डनर को जब स्वयं ये अनुभव हुआ कि उन्हें जीवन को यूं व्यर्थ नहीं गंवाना है,

तो उन्होंने जीवन में सफलता पाने के लिए सदा शराब, ड्रग्स, अशिक्षा, भय और घरेलू अपमान से बचने की ठानी और अपनी माता के कहे प्रेरक वचन को जीवन का सच मन लिया। जोकि निम्न प्रकार से है….

“आपको केवल स्वयं पर निर्भर रहना है, आपको आगे बढ़ाने के लिए कोई घुड़सवार सेना नहीं आएगी”

जब क्रिस ने अमेरिकी नौसेना छोड़कर जाहिर की डॉक्टर बनने की इच्छा

जब क्रिस की माता जेल में और पिता भी उनके पास मौजूद नहीं थे, तो क्रिस गार्डनर की शिक्षा और करियर के बारे में सोचने वाला कोई नहीं था।

जिस कारण क्रिस गार्डनर को जीवन में आगे क्या करना है? इसका कोई ज्ञान नहीं था। लेकिन क्रिस गार्डनर मार्टिन लूथर किंग के अश्वेत व्यक्तियों के प्रति विचारों से काफी प्रभावित थे।

जिसके बाद वह भी अमेरिका में रंगभेद जैसे मुद्दों के खिलाफ अपनी राय बनाने लगे। इस दौरान उन्होंने राग और संगीत में भी अपनी विशेष रुचि दिखाई।

इसके अलावा, जब क्रिस गार्डनर ने अपने मामा हेनरी को अमेरिकी नौसेना में काम करते देखा, तो उन्होंने भी नौसेना में जाने की ठानी।

जिसके बाद अपनी आरंभिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात् क्रिस गार्डनर नौसेना में भर्ती हो गए। जहां उन्होंने कॉर्प्समैन के तौर पर एक लंबे समय तक काम किया।

हालांकि एक बार जब क्रिस गार्डनर सैन फ्रांसिस्को गए, तब वहां उनकी मुलाकात डॉ. रॉबर्ट एलिस से हुई।

जिन्होंने क्रिस को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर और एडमिनिस्ट्रेशन हॉस्पिटल के रिसर्च सेंटर में एक आवश्यक पद देने की बात कही।

जिसके बाद क्रिस ने साल 1974 में नौसेना से सेवानिवृत होकर मेडिकल रिसर्च सेंटर की ओर रुख किया। जहां उन्होंने करीब दो साल तक सर्जिकल और मेडिकल लैब में रहकर काम किया।

साल 1976 में उन्होंने डॉ. एलिस के साथ मिलकर ही कई तरह के चिकित्सा संबंधी पत्रिकाओं में बतौर लेखक भी काम किया।

इस समय क्रिस गार्डनर डॉक्टर बनने की ख्वाइश रखते थे, लेकिन क्रिस की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 

क्रिस के विवाह से लेकर उनके तलाक तक का सफर


क्रिस जब सैन फ्रांसिस्को में थे, तब उनकी मुलाकात वर्जीनिया की शेरी डायसन से हुई। जोकि एक एजुकेशनल एक्सपर्ट हैं।

उनसे क्रिस गार्डनर की दोस्ती काफी लंबे समय तक रही, जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली। लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही क्रिस ने अपने मेडिकल करियर को अलविदा कह दिया।

उनको लग रहा था कि वह इस क्षेत्र के लिए नहीं बने थे। जिसके बाद उनकी पत्नी शेरी ने भी उनसे दूरी बना ली और वर्ष 1986 में उन दोनों का तलाक हो गया।

इसी दौरान क्रिस गार्डनर को जैकी मेडिना/ लिंडा नाम की एक डेंटिस्ट से प्रेम हो गया और उसके बाद क्रिस ने मेडिना से शादी कर ली।

जिससे उनका एक बेटा क्रिस्टोफर जैरेट मेडिना गार्डनर हुआ। सूत्रों के अनुसार, इनकी एक बेटी जैसिंथा डार्लिन भी है।

क्रिस अपनी दूसरी शादी के दौरान एक रिसर्च लैब में बतौर असिस्टेंट कार्यरत थे। जहां मिलने वाले वेतन से घर चलाना क्रिस के लिए काफी कठिन था।

जिसके बाद उन्होंने एक मेडिकल सेल्स मैन के तौर पर काम करना शुरू कर दिया।

क्रिस ने जब शेयर बाजार में रखा पहला कदम


मेडिकल सेल्स मैन के तौर पर काम करते समय उनकी मुलाकात एक स्टॉक ब्रोकर जिसका नाम बॉब ब्रिजेस था उससे हुई,

जिसके पास फरारी थी और क्रिस के पूछने पर उस व्यक्ति ने बताया कि वह महीने का 80,000 डॉलर प्रति माह कमाता है।

क्रिस उस व्यक्ति की बात से काफी प्रभावित हुए। जिसके बाद क्रिस गार्डनर ने भी शेयर बाजार में आगे बढ़ने की ठान ली।

लेकिन क्रिस की यह यात्रा भी कहां आसान होने वाली थी। ऐसे में जब क्रिस ने शेयर बाजार से जुड़ी एक कंपनी में ट्रेनिंग लेने का फैसला लिया।

तो वहां इंटरव्यू से एक दिन पहले गलत जगह गाड़ी खड़ी करने के आरोप में क्रिस को जेल में डाल दिया गया।

जहां से निकलने के बाद क्रिस तुरंत ही कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए पहुंच गए। वहां सब लोग उनके गंदे कपड़ों और हालत को देखकर आश्चर्य में पड़ गए और इंटरव्यू ले रहे व्यक्ति ने भी उनको टोक दिया।

जिस पर क्रिस ने उन्हें सारी कहानी बताई कि कैसे वह इंटरव्यू से एक दिन पहले जेल में पहुंच गए और वहां उन्हें इतना वक्त भी नहीं मिला कि वह अपने कपड़े भी बदल लेते, लेकिन उन्हें शेयर बाजार में काम सीखना है ,

इसलिए वह किसी और बात की चिंता किए बिना इंटरव्यू देने आ गए। इंटरव्यू ले रहा व्यक्ति क्रिस की बातों से काफी प्रभावित हुआ और उन्हें ट्रेनिंग के लिए चुन लिया गया।

हालांकि शेयर मार्केट की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें काफी कम वेतन मिलता था। जिससे घर खर्च चलाना क्रिस के लिए काफी मुश्किल हो रहा था।

इसी कारण क्रिस की पत्नी उनके बेटे को उनके पास छोड़कर हमेशा के लिए चली गई। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे की देखरेख के लिए उसे एक चाइल्ड सेंटर में भेज दिया था,

जिसके लालन पोषण की जिम्मेदारी भी क्रिस पर थी।  इस तरह से, क्रिस एक तरफ अपनी पेशेवर तो दूसरी तरफ अपनी निजी जिंदगी में काफी सारी चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

ऐसे में जब क्रिस के साथ उनका कोई अपना नहीं था, तब कभी कभार उन्हें अपनी रातें अनाथों की भांति रेलवे प्लेटफॉर्म और रेलवे के टॉयलेट तक में सोकर बितानी पड़ती थी।

लेकिन क्रिस ने हार नहीं मानी और वह एक के बाद एक कोशिशें करते रहे।


शेयर मार्केट की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद क्रिस को एक ब्रोकरेज फर्म में नौकरी मिल गई। लेकिन वहां स्थायी होने के लिए क्रिस को एक परीक्षा पास करनी थी।

जोकि काफी कठिन थी, लेकिन कठिन मेहनत के बाद क्रिस ने वर्ष 1982 में ये परीक्षा भी पास कर ली।

जिसके बाद अनुभव और मेहनत के बल पर क्रिस ने साल 1987 में अपनी ब्रोकरेज फर्म इलिनियोस, शिकागो में खोल ली।

जिसमें क्रिस गार्डनर की अकेले की भागीदारी 75% थी। इसके बाद क्रिस गार्डनर ने 10,000 डॉलर की पूंजी लगाकर एक अन्य कंपनी की शुरुआत की।

जिसकी हिस्सेदारी बेचने के बाद क्रिस साल 2006 में इंटरनेशनल होल्डिंग्स के सीईओ (CEO) बने।

इस प्रकार, क्रिस गार्डनर ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर शेयर बाजार की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया, जिसने देखते ही देखते उन्हें अमेरिका का अरबपति बना दिया।

क्रिस गार्डनर को मिले पुरस्कार


2002: father of the year (NFI की ओर से)

2006: friends of Africa award

क्रिस गार्डनर के बारे में अन्य बातें संक्षिप्त में…


लोकप्रियता: सफल उद्यमी और अमेरिका के शीर्ष अरबपति

जीवन आधारित फिल्म: The persuit of happines (वर्ष 2006), come on down: searching for the American dream  (वर्ष 2004)

सामाजिक कार्य: बेघरों के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था, रोजगारों को नौकरी और स्टार्टअप में मदद, अमेरिकी निधि और नेशनल फादरहुड इनिशिएटिव बोर्ड में सेवा भागीदारी, करियर काउंसलिंग

सरकारी पद: member of National education foundation board

किताबें और रचनाएं: The pursuit of happiness

आधिकारिक वेबसाइट: www.chrisgardnermedia.com

क्रिस गार्डनर के प्रेरणादायक विचार

अगर आपके पास कोई सपना है, तो उसे बचाने की जिम्मेदारी भी स्वयं आपकी ही है।
जो लोग स्वयं कुछ नहीं कर सकते, वह आपको भी यही कहेंगे कि आप भी कुछ नहीं कर सकते।
दुनिया एक सीप की तरह है, इसमें मोती आपको खुद ढूंढने हैं।
कुछ ऐसा करें, जो आपको खुशी दे और आपको अपने बारे में अच्छा महसूस कराए।
हर अंतिम पंक्ति के बाद एक नई दौड़ की शुरुआत होती है।
जो लोग मजबूत है वह अपने लिए खड़े होते हैं, और जो सबसे मजबूत होते हैं, वह दूसरों के लिए खड़े होते हैं।
बैंक बैलेंस से अधिक जरूरी है आपके जिंदगी के बैलेंस का सही और मजबूत होना।
किसी काम में असफल होना ठीक है, लेकिन हार मान लेना गलत।
अगर आपको लगता है आप यह कर सकते हैं तो आपको इसे पूरा करना चाहिए।
 मैं अब मजबूत हूं क्योंकि मैं पहले कमजोर था, मैं अब निर्भय हूं क्योंकि पहले मुझमें भय था, मैं अब बुद्धिमान हूं क्योंकि मैं पहले मूर्ख था।
इस प्रकार, क्रिस गार्डनर का जीवन ही नहीं, अपितु उनके विचार भी युवा पीढ़ी को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रशस्त करते हैं। जिनके बारे में पढ़ना प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है।

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David/Flickr


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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