लाल किले पर निबंध | Red Fort Essay In Hindi

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लाल किला सम्पूर्ण भारतवर्ष की ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर जाना जाता है, जोकि देश की राजधानी दिल्ली में स्थित है। लाल किले को देखने के लिए दूर- दूर से लोग यहां आते हैं, और हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं।

हमारे आज के इस लेख में हम लाल किले पर निबंध लेकर आए हैं। जोकि स्कूल के बच्चों के लिए काफी ज्ञानवर्धन रहने वाला है, जिसे पढ़कर बच्चे लाल किले के बारे में काफी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

लाल किले का इतिहास

जब भारत देश पर मुगल शासकों का राज्य हुआ करता था। उस दौर में पांचवे मुगल शासक शाहजहां ने लाल किले का निर्माण कराया था। शाहजहां को लाल रंग अति प्रिय था, यही कारण है कि लाल किले का निर्माण लाल पत्थर से किया गया था।

मुगल शासक शाहजहां ने वर्ष 1638 में दिल्ली (पुरानी दिल्ली) में लाल किला बनवाया था। हालंकि इससे पहले उनकी राजधानी आगरा हुआ करती थी, लेकिन जब उन्होंने अपनी राजधानी दिल्ली घोषित की, तब उन्होंने दिल्ली में लाल किले का निर्माण कराया।

इसके अलावा भी, शाहजहां ने ताजमहल, मयूर सिंहासन, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद का निर्माण किया था। यही कारण है कि मुगल शासक शाहजहां को बिल्डरों के राजकुमार के नाम से भी जाना जाता है।

अब हम लाल किले के बारे में बिंदुवार तरीके से जानेंगे

  • लाल किले का डिजाइन अहमद लाहौरी ने तैयार किया था, जिन्होंने ही ताजमहल का डिजाइन भी बनाया था। 

  • लाल किले का निर्माण यमुना नदी के समीप हुआ है। 

  • इसका निर्माण कार्य मुसलमानों के पावन पर्व मोहर्रम के दिन शुरू हुआ था। 

  • 13 मई 1938 को लाल किले की पहली नींव इज्जत खान ने रखी थी।

  • लाल किले को बनने में करीब 10 वर्षों का समय लगा था, जिसका निर्माण कार्य 1638 से शुरू होकर 1648 में पूर्ण हुआ था।

  • इस किले के निर्माण में शाहजहां के अलावा, इज्जर खान, अलीवर्दी खान और मुकर्मत खान का भी सहयोग था।

  • किले में पहले शाहजहां का एक शयन कक्ष भी हुआ करता था, जहां वह आराम किया करते थे। साथ ही शाहजहां ने अपनी बेगमों के लिए रंग महल की भी स्थापना कराई थी, जहां केवल किन्नरों को काम पर रखा जाता था, और वहां किसी पुरुष को जाने की अनुमति नहीं थी।

  • लाल किले में लूटपाट और चोरी सर्वप्रथम 1747 में नादिर शाह (सोने का सिंहासन) और उसके बाद ब्रिटिश (कोहिनूर) लोगों ने की। 

  • लाल किले में दर्शनीय स्थल दीवाने खास, मोती महल, शीश महल, छाबरी बाजार, दिल्ली दरवाजा, पानी दरवाजा, चट्टा चौक, नौबत खाना, दीवान ए आम, राज दरबार, मुमताज महल, रंग महल, दीवाने खास, मीना बाजार, मोती मस्जिद, राजसी मीनार और बगीचा आदि हैं।

  • आजादी की लड़ाई के दौरान कई सारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को लाल किले में बनाई गई जेल में रखा गया था।

  • लाल किले के लाहौरी गेट पर सर्वप्रथम 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने झंडा फहराया था।

  • लाल किले में हर शाम को लाइट शो का आयोजन किया जाता है, जोकि मुगलों के इतिहास को दर्शाता है। जिसके लिए 50 रुपए का शुल्क पर्यटकों से लिया जाता है।

  • आजादी के बाद लाल किले को छावनी के तौर पर प्रयोग किया जाता था, साल 2003 तक लाल किला भारतीय सेना का गढ़ रहा।

  • लाल किला करीब 254.67 एकड़ में बना हुआ है, जिसकी दीवारों की ऊंचाई 33 मीटर है। जिसकी वास्तुकला को रचने का श्रेय उस्ताद अहमद और हमीद को दिया जाता है।

  • यहां कुल मिलाकर 6 दरवाजे मौजूद हैं। लाल किला काफी ऊंचाई से देखने पर अष्टभुजाकार प्रतीत होता है।

  • लाल किले का नाम लाल किला इसलिए पड़ा क्योंकि इसे बलुआ नामक लाल पत्थर से बनाया गया था।

  • इसे वर्ष 2007 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था। लाल किले को अद्भुत नक्काशी, चित्रकारी और शिल्पकला को देखने के लिए लोग बड़ी दूर दूर से यहां आते हैं।

  • लाल किले में दर्शन योग्य मुगल शासकों के अस्त्र-शस्त्र, तीर कमान, तलवार, कवच आदि मौजूद हैं। इसके अलावा भी, ऐसी कई वस्तुएं और बाजार मौजूद हैं, जोकि भारतीय संस्कृति को उजागर करती हैं। 

  • लाल किले में देश के स्वतंत्रता सेनानियों और हिंदू राजाओं की भी आवश्यक वस्तुओं और सामान को संग्रहित करके रखा गया है।

  • हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि लाल किले का निर्माण हिंदुओं के राजा पृथ्वी राज चौहान ने कराया है। जिस कारण इसका नाम लाल किला नहीं बल्कि लालकोट है। जबकि मुगल शासक इसे किला ए मुबारक कहकर संबोधित करते थे।

लाल किले पर इन लोगों ने किया राज

1712: जहंदर शाह उसके बाद फरुखसियर

1719: मुहम्मद शाह

1739: नादिर शाह

1752: मराठाओं का शासन

1761: अहमद शाह दुर्रानी

1803: ब्रिटिश लोग

1857: बहादुर शाह जफर उसके बाद पुन: ब्रिटिश हुकूमत।

इस प्रकार, वर्तमान में लाल किले को देखने जाने के लिए देश विदेश से पर्यटक आते हैं, जोकि लाल किले के माध्यम से देश की सभ्यता और संस्कृति को समझते हैं।

लाल किला देखने जाने के लिए अब निर्धारित समय (सुबह 9:30 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे तक) दिया जाता है और अंदर जाने के लिए टिकट (भारतीयों के लिए 10 और विदेशियों के लिए 150 रुपए) भी लगता है।

लाल किले के अंदर प्रवेश करने के लिए दो दरवाजे हैं। जिसमें से लाहौरी गेट आम लोगों के लिए खोला जाता है और वीआईपी लोगों के लिए दिल्ली गेट खोला जाता है।

सुरक्षा की दृष्टि से, लाल किले के आसपास नो फ्लाई जोन एरिया बना दिया गया है, ताकि यहां किसी भी प्रकार की आतंकी घटना को अंजाम नहीं दिया जा सके।

ऐसे में लाल किले की आज भी भारतीय विरासत के तौर पर देखभाल की जाती है, जहां जाकर आप भारतीय संस्कृति, सभ्यता और इसके प्राचीन इतिहास को और करीब से जान सकते हैं।

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अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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