ब्लॉग में ट्रैफिक कैसे बढ़ाएं?

Tutorial शुरू करने से पहले जानते हैं की traffic शब्द का blogging की दुनिया में क्या मतलब है। जो भी users आपकी site को visit करते हैं, उनके समूह को traffic कहा जाता है। किसी Website की सफलता और आमदनी दोनों का अनुमान लगाने के लिए उस site के traffic की ही जांच की जाता है। सरल रूप से समझने के लिए traffic के निम्नलिखित प्रकार बांटे गए हैं-

  • Organic traffic: यदि आपने SEO के बारे में padha है, तो यह प्रकार समझना बहुत आसान है। Search engine optimisation करने के बाद जब result page पर आपकी site का ऊंचा rank आता है, जो users उस result पेज पर दिए गए link को click करके आपकी साइट पर पहुंचते हैं, उसे organic traffic कहा जाता है। SEO करने का सारा उद्देश्य ही organic traffic को बढ़ाना है। परंतु इस प्रकार में सफलता पाने में काफी समय लग सकता है। 

  • Direct traffic: यह उन users के समूह को कहा जाता है, जो सीधा आपके website का नाम search करके आपकी साइट को visit करते हैं। ऐसा ट्रैफिक आकर्षित करना सबसे मुश्किल कार्य है, इसके लिए आपकी साइट का मशहूर होना यानी अच्छा brand name होने बहुत अनिवार्य है। किसी भी साइट के direct traffic का बड़ा आंकड़ा होना उसकी सफल होने का एक चिन्ह है, इसलिए यह हर site का सपना होता है। Traffic की यह प्रकार बिलकुल मुफ्त है परन्तु केवल तभी मुमकिन है जब users आपकी site के नाम पे पहले से ही भरोसा करते हो। 

  • Paid traffic: यह तरीका पैसे देकर users को आकर्षित करता है। यदि आप रिजल्ट page को ध्यान से देखें, तो सबसे उपर आपको गूगल द्वारा दिखाई गई ads मिलती हैं। यह websites आप की सर्च से जुड़ी ही होती है मगर यह वो websites होती है जिन्होंने गूगल को पैसे देकर अपना link ऊँचे rank पर रखवाया होता है। इनके url से पहले छोटे से box में AD शब्द लिखा होता है। सर्च engine के अलावा आप social media sites जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, आदि पर भी पैसे देकर अपनी ad दर्शा कर paid traffic बढ़ा सकते हैं। 

  • Referral traffic: SEO के कोर्स में हमने backlinks के बारे में विस्तार में समझा है। जब कोई एक site अपने content में किसी दूसरी site का URL किसी keyword साथ hyperlink करके लिखती है, तो उनको backlinks कहते हैं। इस प्रकार के traffic को बढ़ाने के लिए अच्छे quality के backlinks होने चाहिए। इसकी विस्तार में जानकारी के लिए आप link building के chapter को refer कर सकते हैं।

Search Engine Marketing (SEM)

यदि आप digital marketing की दुनिया से परिचित हैं तो SEM और SEO शब्द तो निश्चित ही सुने होंगे। Search engine marketing का अर्थ है अपनी site को results page पर ऊंचा दिखाने के लिए marketing करना यानी पैसे खर्च करना। इसलिए SEM को PPC भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है Pay per Click.

SEM होता कैसे है? 

जो हमने चैप्टर के शुरुआत में traffic के प्रकार पढ़े, उस में से जो paid traffic है, वो SEM का ही नतीजा है। SEM करने वाली websites SERP पर सबसे मुख्य जगह पराइवेटाइजेशन दिखाई जाती हैं, और उनके कीवर्ड आप के द्वारा search किए गए keywords के समान होते हैं, ताकि user उन्हें विजिट करने में मजबूर हो जाए।

SEM ho या SEO, दोनों का आधार उपयुक्त keywords ही होते हैं। Keyword research के chapter में हम पहले ही इस विषय को विस्तार में समझ चुके हैं। सही Ad भी हम तभी खरीद सकते हैं जब हमें उचित कीवर्ड की जानकारी होगी। 

SEM के फायदे

यदि SEM करने में इतना समय और पैसा लगता है, तो लोग SEM करते ही क्यों हैं, इसके लाभ निम्नलिखित हैं–

  • SEO के परिणाम तक इंतजार की ज़रूरत नहीं: जिन्होंने SEO के बारे में विस्तार में पढ़ा है, वे जानते होंगे कि SEO के strategy अपनाने के बाद भी उसके परिणाम दिखने में बहुत समय लग जाता है। परंतु यह समस्या SEM में नहीं आती। जैसे ही आप अपने AD के लिए पैसे देते हैं, SERP पर आपकी site का लिंक मुख्य जगह पर नजर आना शुरू हो जाता है। 

  • Quality visitors: SEM करने के लिए ज़्यादा तर वही keywords का उपयोग किया जाता गई, जो serious visitors को आकर्षित करें। यानी जो किसी निश्चित मकसद से आपकी साइट विजिट करेंगे। 

  • ट्रैफिक का बढ़ना: SEO करने से जो sites SERP पर उपर दिखाई जाती हैं, SEM की गई sites Ads के रूप में उससे भी उपर दिखाई जाती हैं, यानी संभव है कि SEO वाली साइट से पहले user paid ad को विजिट करे। 

  • आसानी से Ads manage करना: SEO करने के बहुत सारे तरीके होते हैं, और सब तरीके समझ कर एक सही strategy बनानी पड़ती है मगर दूसरी तरफ देखें तो SEM करने के लिए सिर्फ ads की management समझने की ज़रूरत है। इसी सीखने में SEO सीखने से कम समय लगता है। 

Search Engine Optimization

Search Engine Optimisation एक स्पेशल तकनीक या methodology है जो आपकी वेबसाइट को SERP पर ऊंचे दर्जे पर show कराती है ताकि आपकी साइट के लिए ट्रैफिक increase हो सके। इसके नाम से ही समझ आता है कि यह तकनीक search engine को किसी ना किसी तरीके से trick करके हमारी वेबसाइट को optimise करती है मतलब इससे हमारी website के नाम की उपर आने की सम्भावना बढ़ जाती है जिसकी वजह से ज़्यादा लोग उसको visit करे।

SEO के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं–

On-Page SEO वो होता है जो हमारे कंट्रोल में हो, जैसे हमारी website की coding, उसका content, meta टैग्स, पन्नों की लोडिंग की गति, उपयुक्त शीर्षक, navigation में आसानी, आदि। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआत में तो हमे खुद ही website को उपर लाने का प्रयास करना होगा, ब्रांड का नाम बनने के बाद ही Off पेज तकनीक काम करती है। यदि आपका on-site SEO कामयाब है तो users बारी बारी आपकी site देखेंगे एवं और लोगो को भी सलाह देंगे।

Off-Page SEO वो होता है जो coding पे निर्भर नहीं करते और वो हमारे कंट्रोल में नहीं होते, जैसे social मीडिया द्वारा प्रचार, social bookmarking, प्रेस द्वारा reviews, videos, आदि। यह वाली तकनीक की भी अपनी ख़ासियत है, यह वो कार्य करता है जो on-site नहीं जो पाता। इससे आपकी website पर users का विश्वास बनता है और credibility भी बढ़ती hai।

इस विषय पर विस्तार में जानकारी के लिए आप हमारी Site पर फ्री SEO कोर्स कर सकते हैं। 

सारांश

इस chapter में हमने संक्षेप में web traffic से जुड़ी सारी जानकारी दी है। आपके blog के ready होने के बाद आपको traffic आकर्षित करने में यह सारी जानकारी सहायक होगी।

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