लिपि क्या है? – Lipi in Hindi

Lipi in hindi

लिपि से तात्पर्य किसी भाषा को लिखने के लिए प्रयोग किए जाने वाले चिन्हों से है। सरल शब्दों में, लिपि भाषा को लिखने का एक ढंग है। हमारे पिछले लेख में हमने आपको भाषा क्या है? इस बारे में बताया था। तो हम लिपि को ऐसे समझ सकते हैं कि भाषा को लिखित रूप में वर्णित करने के लिए जिन चिन्हों का इस्तेमाल किया जाता है, वह लिपि कहलाते हैं।

इस प्रकार, किसी भी भाषा को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए हमें एक लिपि की आवश्यकता होती है। जिसके माध्यम से हम चिन्हों और संकेतों के आधार पर भाषा के लिखित रूप को प्रयोग में लाते हैं।  वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व में दर्जनों लिपियां मौजूद है, जिनको एक या एक से अधिक भाषाओं को लिखने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।


लिपि की विशेषताएं

  1. लिपि किसी भी भाषा के उच्चारण के अनुरूप लिखी और बोली जाती है।

  2. लिपि को कलम के माध्यम से बाई से दाईं ओर लिखा जाता है।

  3. लिपि में प्रयुक्त समस्त वर्णों की आकृति समान होती है।

  4. भारत के समस्त धार्मिक ग्रंथों की रचना किसी ना किसी लिपि में हुई है, इसलिए कहा जा सकता है कि भारत में लिपियों का प्रचलन काफी पुराना है।

  5. किसी भी सभ्य समाज में भाषा, बोली और खासकर लिपि का प्रयोग किया जाता है।


लिपि के भेद

लिपि के कई भेद है। जिनके आधार पर इनको वर्गीकृत किया गया है। जैसे-
ब्रामही लिपि, देवनागरी लिपि, अरबी लिपि, गुजराती लिपि, कांजी लिपि, थाना लिपि, ओड़िया लिपि, सिंहल लिपि, तेलुगु लिपि, थाई लिपि, खमेर लिपि, लिम्बू लिपि, बोरमा लिपि, बाली लिपि, बेबे लिपि, बुहिद लिपि, ब्रेल लिपि (दृष्टि बाधित लोगों के लिए), चीनी लिपि, तमिल लिपि, बर्मी लिपि, रोमन लिपि, कन्नड लिपि, गुरुमुखी लिपि, जावा लिपि, लाओ लिपि, लेप्चा लिपि, बंगाली लिपि, मलयालम लिपि, लोन्तरा लिपि, तिब्बती लिपि आदि।


लिपि के प्रकार

लिपि के मुख्यता तीन प्रकार हैं-

  1. चित्रलिपि– इन लिपियों का मूल रूप से प्रयोग प्राचीन मिस्र, चीन (मंडारिन, कैण्टोनी), जापान (कांजी) और कोरियन देशों में होता है।

  2. ब्राह्यी लिपियां– इनमें देवनागरी, दक्षिण एशिया और पूर्व एशिया में प्रयुक्त लिपियां आती है। साथ ही भारतीय गुप्त काल में ब्राह्यी लिपियों के दो रूप उत्तरी और दक्षिणी देखने को मिले थे। और इसमें आने वाली देवनागरी लिपि भारतीय भाषा हिंदी की सर्वश्रेष्ठ लिपि मानी जाती है। क्योंकि इसका उच्चारण और लिखते समय इसमें कोई खासा बदलाव देने को नही मिलता है। साथ ही इसमें मूक वर्णों का अभाव होता है। देवनागरी लिपि के अंतर्गत हिंदी, संस्कृत, नेपाली और मराठी भाषा की विवेचना की जाती है।

  3. फोनेशियन लिपियां– यूरोप, मध्य एशिया और उत्तरी अफ्रीका आदि देशों में इस लिपि का प्रयोग किया जाता है।


लिपि के रूप

लिपियां मुख्यता दो रूपों में विभाजित होती हैं-

  1. अल्फाबेटिक लिपियां – इसमें अधिकतर लैटिन यानि रोमन (अंग्रेजी, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, पश्चिम और मध्य यूरोप, फ्रांसीसी, जर्मन), यूनानी, अरबी (उर्दू, फारसी, कश्मीरी), इब्रानी और सिरिलिक लिपियों (रूसी, सोवियत संघ) का प्रयोग किया जाता है।

  2. अल्फासिलैबिक लिपियां – उपरोक्त में शारदा (कश्मीरी, पंजाबी, तिब्बती, उत्तर और पश्चिम भारत, हिमाचली, लद्दाखी), देवनागरी (हिंदी, उड़िया, बंगाली, राजस्थानी, असमिया, गुजराती, मारवाड़ी, अवधी, छत्तीसगढ़ी, कोंकणी, मराठी, भोजपुरी, काठमांडू, सिंधी, गढ़वाली), मध्य भारत (तेलुगु), द्रविड़ (कोलंबो, मलयालम, कन्नड़, तमिल) और मंगोलियन (जापानी, तुर्कमेनिस्तान, चीनी, कोरियाई, मंडारिन) आदि लिपियां आती हैं।

इस प्रकार, हमारा यह लिपि का लेख यहीं समाप्त होता है। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा, हमें नीचे कमेंट करके अवश्य बताएं। और आपको अन्य किस विषय पर लेख चाहिए। उसके विषय में भी हमें बताएं। साथ ही इसी तरह के लेख पढ़ने के लिए Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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