मकर संक्रान्ति पर खिचड़ी खाने और दान करने के पीछे क्या है कहानी?

भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिती कामये।
मकरसंक्रांन्तिपर्वण: सर्वेभ्य: शुभाशया:।।

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य देवता धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। साथ ही इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व  है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल के छह महीने यानि मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायन और छह महीने सूर्य दक्षिणायन में होते हैं, इसलिए इस दिन सूर्य देवता के उत्तरायन में आने के बाद उन्हें खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।

साथ ही इसका तात्पर्य सूर्य के अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने से लगाया जाता है। इतना ही नहीं मकर संक्रांति से दिन बड़े और रात छोटी होने लगती है। तो वहीं मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास समाप्त हो जाते हैं और सभी प्रकार के शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में हर साल 14-15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।

माना जाता है कि महाभारत में वर्णित भीष्म पितामह ने भी मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायन में आने के बाद ही प्राण त्यागे थे और इसी दिन गंगा जी भागीरथ के पीछे आते हुए कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में मिल गई थी। इसलिए हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति पर्व को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में इस दिन लोग खासकर खिचड़ी, तिल, गुड़, कपड़े इत्यादि का दान करते हैं परन्तु क्या आप जानते है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी को खाने और दान करने के पीछे क्या कहानी है? यदि नहीं तो चलिए आपको बताते है इसके पीछे की वजह।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के अवतार  गोरखनाथ ने खिलजी से संघर्ष के दौरान अपने सहयोगियों को दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी थी ताकि उनके सहयोगियों को भर पेट भोजन मिल सके और उनका समय भी बच सके। कहते है तभी से खिचड़ी व्यंजन प्रसिद्ध हुआ। ऐसे में हर साल मकर संक्रांति के दिन गोरखनाथ मंदिर पर खिचड़ी भोज का आयोजन होता है। इसके अलावा, भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां मकर संक्रांति के आस पास ही फसल तैयार होती है।

ऐसे में मकर संक्रांति वाले दिन सूर्य देवता को नई फसल का भोग लगाया जाता है। दूसरी ओर, मकर संक्रांति का पर्व हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है। जिसके चलते जाड़ों के मौसम में चावल, उड़द की दाल और अनेकों प्रकार की सब्जियों से निर्मित खिचड़ी खाना स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को शीत ऋतु में जरूरी ऊर्जा प्रदान करते हैं। साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से, खिचड़ी पाचन तंत्र को तंदुरुस्त बनाए रखती है।

तो वहीं ज्योतिष विद्या के अनुसार, खिचड़ी में प्रयोग की जाने वाली सामग्री को सातों ग्रहों का प्रतीक भी माना गया है। इसके अलावा खिचड़ी में प्रयोग किया जाने वाला घी सूर्य देवता से संबंधित माना गया है और उड़द दाल का संबंध शनि देव से माना गया है। साथ ही खिचड़ी का जरूरी हिस्सा चावल चन्द्र देवता से संबंधित है इसलिए ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से आरोग्य में वृद्धि होती है और व्यक्ति के जीवन में व्यवधान कम आते हैं। उपयुक्त कारणों के चलते मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने की प्रथा है।

मकर संक्रांति पर दान करना क्यों जरूरी है?

शास्त्रों में वर्णित है कि व्यक्ति को अपनी आय का एक हिस्सा दान दक्षिणा के कार्यों में लगाना चाहिए तभी उसे जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देवता अपने पुत्र शनि से मिलने आते हैं और यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि की स्थिति ठीक नहीं है तो वह दान दक्षिणा से अपने ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच सकता है।

ऐसे में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी समेत अन्य कई चीजों के दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति पर तिल गुड़ का दान भी किया जाता है क्योंकि इसका सेवन सेहत को दुरुस्त रखता है। इसके साथ ही देशी घी और कंबल दान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।साथ ही इस दिन काले तिल को दान करने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि शनि महाराज अपने पिता सूर्य से रुष्ठ थे क्योंकि उन्होंने उनकी माता  छाया को उनसे अलग कर दिया था।

साथ ही शनि महाराज ने अपने पिता सूर्य को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया था। जिसके प्रभाव से अपने पिता सूर्य को बचाने के लिए यमराज ने तपस्या की और सूर्य देवता को कुष्ठ रोग से मुक्त कर दिया। जिसके बाद सूर्य देवता ने शनि की राशि कुंभ को जला दिया। जिसके बाद शनि महाराज ने अपने पिता की काले तिल से पूजा की थी। कहते है तभी से मकर संक्रांति के दिन तिल का दान किया जाता है। जिससे व्यक्ति के जीवन में शनि के बुरे प्रभाव का असर खत्म हो जाता है।

इसके अलावा रेवड़ी, गजक और तिल गुड़ के लड्डू भी प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। तो वहीं मकर संक्रांति के दिन उत्तर भारत में लोग पतंग भी उड़ाते हैं। साथ ही मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है, ऐसे में इस दिन नदियों में स्नान की प्रथा भी प्रचलित है। इसके अतिरिक्त यदि आप ज्योतिषशास्त्र में विश्वास करते हैं तो आप मकर संक्रांति वाले दिन अपनी राशि के अनुरूप दान कर सकते हैं।

मकर संक्रांति के दिन राशिनुसार क्या करें?

  • मकर संक्रांति वाले दिन मेष राशि के जातकों को गुड़, मूंगफली और तिल का दान करना चाहिए।

  • वृषभ राशि के जातकों को तिल, दही और सफेद कपड़े का दान करना चाहिए।

  • मिथुन राशि के जातकों को कंबल, चावल और मूंग दाल का दान करना चाहिए।

  • कर्क राशि के जातकों को सफेद तिल, चांदी और चावल का दान करना चाहिए।

  • सिंह राशि के जातकों को सोना, मोती, गेहूं और तांबा का दान करना चाहिए।

  • कन्या राशि के जातकों को हरे रंग के कपड़े, कंबल और खिचड़ी का दान करना चाहिए।

  • तुला राशि के जातकों को कंबल, शक्कर और सफेद डायमंड दान करने की सलाह दी जाती है।

  • वृश्चिक राशि के जातकों को तिल, लाल कपड़ा और मूंगा दान करना चाहिए।

  • धनु राशि के जातकों को सोना, खड़ी हल्दी और पीला कपड़ा दान करना चाहिए।

  • मकर राशि के जातकों को काले तिल, तेल और काला कम्बल दान करना चाहिए।

  • कुंभ राशि के जातकों को तिल, खिचड़ी, काली उड़द और काला कपड़ा दान करना चाहिए।

  • अन्तिम मीन राशि के जातकों को तिल, चावल, चने की दाल और रेशमी कपड़ा दान करने की सलाह दी जाती है।

मकर संक्रांति पर क्या करें और क्या नहीं

  • मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, चावल, मूंगफली, गजक इत्यादि का दान करना चाहिए।

  • मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने का भी प्रचलन है।

  • मकर संक्रांति के दिन नदी में स्नान करना भी जरूरी माना जाता है।

  • इस दिन सूर्य को लोटे में लाल फूल और रोली डालकर अघ्र्य देना चाहिए।

  • इस दिन सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए। चाहे तो आप श्रीमद्भागवत गीता का पाठ भी कर सकते हैं।

  • इस दिन शनि महाराज को प्रकाश का दान करना लाभकारी माना जाता है।

  • इस दिन किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान करना चाहिए। इससे शनि महाराज के प्रकोप से आपकी रक्षा होती है।

  • इस दिन किसी भी पेड़ की कटाई और छटाई नहीं करनी चाहिए।

  • इस दिन मसालेदार भोजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए।

  • मकर संक्रांति के दिन शराब, सिगरेट और किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए।

  • इस दिन व्यक्ति को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस दिन किसी के साथ भी गली गलौज नहीं करना चाहिए।

  • इस दिन अपने द्वार से किसी भी गरीब व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए।

इस प्रकार, मकर संक्रांति का त्योहार भारत के तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों में विभिन्न रीत रिवाजों के माध्यम से मनाया जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति का त्योहार भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, म्यांमार, श्री लंका, बंगलादेश, थाइलैंड इत्यादि देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विशेषकर सूर्य देवता की उपासना और आराधना की जाती है। साथ ही इस दिन हिन्दू धर्म से जुड़े लोग दान, श्राद्ध, स्नान, तर्पण, तप इत्यादि धार्मिक कार्यों को विधि विधान से करते हैं।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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