पत्र लेखन – Patra Lekhan in Hindi

पत्र लेखन एक प्रकार की कला है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने से दूर बैठे संबंधियों, मित्रों, परिचितों से संपर्क स्थापित करता है। पत्र लेखन के लिए कागज और कलम की आवश्यकता होती है। प्राचीन समय में निजी और सरकारी संवाद के लिए पत्र लेखन किया जाता था। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि पत्र लेखन करते समय किन बातों का मुख्य रूप से ध्यान रखना चाहिए और पत्र लेखन कितने प्रकार का होता है।

पत्र लेखन विधि – Patra Lekhan Vidhi

सर्वप्रथम पत्र लेखन के लिए एक सादे कागज का प्रयोग किया जाता है। जिसके दाईं ओर उस स्थान का नाम लिखा जाता है, जहां पत्र भेजना होता है। तत्पश्चात् पत्र लिखते समय संबोधन शब्दों जैसे आदरणीय, पूजनीय, मान्यवर, परम पूज्य आदि का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद अल्पविराम (,) लगाया जाता है और पत्र का विषय स्पष्ट किया जाता है। फिर अभिवादन शब्दों का प्रयोग करके पत्र की भूमिका लिखी जाती है।


पत्र लेखन के दौरान भाषा सरल और स्वाभाविक होनी चाहिए ताकि पत्र को पढ़ने वाले व्यक्ति को कठिनाई ना हो। पत्र लेखन के समय भूमिका और मध्य भाग को भागों में बांटकर लिखा जाना चाहिए ताकि उसे आसानी से समझा जा सके। पत्र की समाप्ति में उपसंहार के दौरान आज्ञाकारी, विनीत, शिष्य और भवदीय आदि शब्दों को लिखा जाता है।

अंत में पत्र लिखने वाले का नाम लिखकर पत्र लेखन संपन्न किया जाता है। चाहे तो आप पत्र के अंत में बाई ओर अपना पता भी लिख सकते हैं। इसके अलावा आप पत्र लेखन के दौरान निम्न बातों का ध्यान भी रख सकते हैं।

  1. पत्र लेखन के दौरान आपकी भाषा शुद्ध, सरल, प्रवाहपूर्ण और रोचक होनी चाहिए।

  2. पत्र लेखन के दौरान आप छोटे छोटे प्रभावशाली वाक्यों का प्रयोग करें।

  3. पत्र लेखन के दौरान आपके शब्दों या वाक्यों की पुनरावृत्ति न हो।

  4. पत्र लेखन के दौरान विराम चिन्हों का उचित प्रयोग करना चाहिए।

  5. पत्र लेखन के दौरान आपको संबोधन, अभिवादन और उपसंहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।


पत्रों के प्रकार – Patra ke Prakar

पत्र लेखन के अंतर्गत लिखे जाने वाले पत्रों के निम्नलिखित दो प्रकार होते हैं – औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र।

औपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र वे पत्र होते हैं जिन्हें किसी विशेष उद्देश्य हेतु लिखा जाता है। यह पत्र किसी पारिवारिक या निजी कार्य से सबंधित नहीं होते हैं बल्कि ये पत्र सरकारी विभागों में, विद्यालयों में तथा किसी अधिकारी तथा वरिष्ठ अधिकारी को भेजने के लिए लिखे जाते हैं।औपचारिक पत्र के अंतर्गत निम्नलिखित पत्रों को लिखा जाता है-

  1. प्रार्थना पत्र – इन पत्रों के अन्तर्गत वे पत्र शामिल किए जाते है जिसमें किसी विद्यार्थी द्वारा अपने प्रधानाध्यापक को अवकाश हेतु, शुल्क माफी हेतु, छात्रवृति हेतु पत्र लिखा जाता है। इसके अतिरिक्त जब किसी कार्यालय के कर्मचारी द्वारा अपने प्रबंधक को अवकाश हेतु, आर्थिक सहायता हेतु पत्र लिखा जाता है। तो वे पत्र भी प्रार्थना पत्र कहलाते हैं।

  2. आवदेन पत्र – आवदेन पत्र वे पत्र होते है, जिन्हें किसी व्यक्ति द्वारा नौकरी प्राप्त करने हेतु कार्यालय, कंपनी अथवा संस्था को लिखें जाते हैं।

  3. शिकायती पत्र – जब किसी कार्यालय अथवा व्यवसाय विभागों में किसी कारणवश प्रमुख अधिकारी को अथवा प्रबंधक को पत्र लिखकर शिकायत की जाती है। तब वे पत्र शिकायती पत्र कहलाते हैं।

  4. संपादक को पत्र – जब किसी समाचार पत्र या मैगजीन या पत्रिका के संपादक को अपनी कोई कविता, लेख तथा किसी सूचना को जनहित में प्रकाशित कराने के लिए पत्र लिखा जाता है। तो वे पत्र संपादकीय पत्र कहलाते हैं।

  5. कार्यालयी पत्र – जब विभिन्न कार्यालयों के बीच पत्र भेजने तथा प्राप्त करने के लिए पत्र लिखे जाते हैं तो उन्हें कार्यालयी पत्र कहते हैं।

  6. धन्यवाद पत्र – जब हम किसी अधिकारी को या कार्यालय के प्रबंधक किसी कार्य के उचित रूप से पूर्ण होने पर धन्यवाद हेतु पत्र लिखते हैं, तो वे पत्र धन्यवाद पत्र कहलाते हैं।

अनौपचारिक पत्र

अनौपचारिक पत्र वे पत्र होते है, जिनके अन्तर्गत औपचारिक पत्रों को सम्मिलित नहीं किया जाता है। वे सभी पत्र जो किसी निजी उद्देश्य हेतु अपने किसी परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, मित्र आदि निजी संबंधों को लिखें जाते हैं, अनौपचारिक पत्र कहलाते हैं। इनके अन्तर्गत निम्नलिखित पत्रों को लिखा जाता है-

  1. बधाई पत्र – वे पत्र जो अपने किसी सगे संबंधियों रिश्तेदारों तथा मित्रों को उनकी अच्छी नौकरी लगने, शादी होने या शादी की सालगिरह आदि उपलक्ष्य पर बधाई देने हेतु लिखें जाते हैं, बधाई पत्र कहलाते हैं।

  2. आमंत्रण पत्र – वे पत्र जो अपने सगे संबंधियों रिश्तेदारों तथा मित्रों को अपने किसी कार्यक्रम में, शादी समारोह में, जन्मदिवस में आदि खुशी के अवसर पर बुलाने के लिए लिखे जाते हैं, आमंत्रण पत्र कहलाते हैं।

  3. शुभकामना पत्र – ये वे पत्र होते है जो अपने किसी रिश्तेदार/ मित्र आदि के जन्मदिवस की शुभकामनाएं देने हेतु या राष्ट्रीय पर्व की शुभकामनाएं देने हेतु अथवा नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देने हेतु लिखें जाते हैं।

  4. शोक पत्र – जब किसी व्यक्ति द्वारा अपने किसी निजी संबंधी, मित्र अथवा रिश्तेदार को उनकी दुखद परिस्थिति के समय सांत्वना देने हेतु पत्र लिखा जाता है, तब वे पत्र शोक पत्र कहलाते हैं। यह पत्र प्रायः निजी संबंधों में किसी की मृत्यु, गंभीर परिस्थितियों में लिखे जाते हैं।

  5. त्योहार पर पत्र – विभिन्न त्योहारों पर जब हम अपने सगे संबंधियों, रिश्तेदारों तथा मित्रगणों को होली की शुभकामनाएं, रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं, दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं देने हेतु पत्र लिखते हैं, वे पत्र त्योहार पर लिखें जाने वाले पत्र कहलाते हैं।


पत्रों का प्रारूप

औपचारिक पत्र का प्रारूप-

सेवा में,

आदरणीय प्रधानाचार्य जी/ प्रबंधक महोदय/ मंत्री महोदय,
विद्यालय/कार्यालय/ विभाग का नाम व पता______

विषय __ ( पत्र लिखने का मुख्य उद्देश्य )
मान्यवर/ महोदय,
प्रथम अनुच्छेद ___________________________ ___________________________
___________________________ ___________________________ ___________________________

द्वितीय अनुच्छेद __________________________ ___________________________
___________________________ ___________________________ ___________________________

सधन्यवाद/ धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य/भवदीय/ प्रार्थी,
नाम _______
कक्षा/ पता/________
दिनांक_________


अनौपचारिक पत्रों का प्रारूप-

भेजने वाले का पता
________________
________________

दिनांक _________

संबोधन शब्द______(प्रिय मित्र/भाई/बहिन अथवा आदरणीय पिता जी इत्यादि)
अभिवादन शब्द_____( नमस्ते/ नमस्कार/ प्रणाम)

(कुशलक्षेम हेतु) प्रथम अनुच्छेद ___________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________

(विषय- वस्तु) द्वितीय अनुच्छेद____________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________

(समाप्ति) तृतीय अनुच्छेद______________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________ ___________________

पत्र पाने वाले के साथ पत्र प्रेषक का संबंध______
(तुम्हारा प्रिय मित्र/ भाई/ बहिन) अथवा (आपका प्रिय पुत्र आदि)

पत्र भेजने वाले का नाम ________________


पत्रों में प्रयुक्त शब्दावली

पत्रों के अन्तर्गत मुख्य रूप से संबोधन, अभिवादन शब्दों का प्रयोग किया जाता है। संबोधन तथा अभिवादन जैसे शब्दों को पत्र प्रापक के अनुरूप निम्नलिखित तरीके से प्रयोग किया जाता है।

  1. औपचारिक पत्रों में संबोधन हेतु शब्द-
    आदरणीय, माननीय, सम्मानित, मान्यवर।

  2. अनौपचारिक पत्रों में संबोधन हेतु शब्द-
    प्रेषक से छोटे उम्र के लोगों के लिए – प्रिय भाई/बहिन/सखी, स्नेही मित्र आदि।

    प्रेषक से बड़े उम्र के लोगों के लिए – आदरणीय/ पूज्य / पूजनीय/ मान्यवर/ माननीय / श्रद्धेय।

  3. अभिवादन शब्दों का प्रयोग अनौपचारिक पत्रों के अन्तर्गत किया जाता है। 
    जैसे – सादर प्रणाम, चरण स्पर्श, अभिनन्दन, नमस्कार, नमस्ते, सादर अभिवादन, खुश रहो, आशीर्वाद आदि।

  4. इसके अतिरिक्त, अनौपचारिक पत्रों के समापन पर प्रेषक का प्रापक से संबंध बताते हुए निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
    प्रेषक से छोटे या बराबर उम्र के लोगों के लिए – तुम्हारा प्रिय मित्र/ भाई/ बहिन या तुम्हारा शुभचिंतक या तुम्हारा हितैषी आदि।

    प्रेषक से बड़े उम्र के लोगों के लिए – आपका स्नेही पुत्र/पुत्री/भतीजा/भाई आदि।

अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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