भारत में आया शादी का ये नया ट्रेंड, जानिए इस नए टर्म Sologamy के बारे में

sologamy kya hai

प्रेम एक ऐसी पवित्र भावना है जो आपको किसी दूसरे के प्रति समर्पित कर देती है। इसके साथ ही हम जब भी प्यार- मोहब्बत की बात करते हैं तो उसमें जिक्र सदैव दो लोगों का किया जाता है। जो आपस में एक दूसरे की परवाह करते हैं वही कुछ समय बाद जब ये प्यार दिन पर दिन बढ़ता जाता है तो हम निश्चय करते हैं कि अब शादी के बंधन में बंध कर एक साथ रहा जाए।

भारतीय संस्कृति की बात करें तो उसमें शादी को एक बेहद पवित्र रिश्ता माना जाता है। आमतौर पर शादी में एक लड़का और एक लड़की एक ही परिवार में जन्मो जन्मो तक बंध जाते हैं। यूं तो कई परिभाषाएं गढ़ी जा सकती हैं इस रिश्ते की लेकिन आज की सदी में ये प्यार दो लोगों में बंधना जरूरी नहीं रह गया। कारण ये है कि हाल ही में खुद से शादी करने का एक नया चलन शुरू हो गया है जिसे ‘सोलोगैमी’ कहा जाता है।

कई लोगों ने सोलोगैमी के बारे में सुनो तक नहीं होगा। तो चलिए आज जानते हैं कि आखिर सोलोगैमी क्या होती है? दरअसल हाल ही में सोलोगैमी का ट्रेंड चल रहा है। आमतौर पर कहा जाए तो सोलोगैमी का अर्थ होता है खुद से ही शादी करना। अब जाहिर है कि ये सुनने के बाद आपके मन में कई सवाल आ रहे होंगे कि खुद से शादी कर सकते हैं क्या?

क्या बिना पाटनर के भी शादी हो सकती है? सोलोगैमी क्या है? और आखिर क्यों लोग खुद से ही शादी करना चाहते हैं? ऐसे बहुत से सवाल जो आपके मन में पनप रहे होंगे। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताएंगे कि आखिर सोलोगैमी क्या होती है और इसके पीछे का कारण क्या है?

क्या है सोलोगैमी? ( What is Sologamy? )

What is Sologamy?

दरअसल अगर आप अपने आप से भी उसी तरह का प्यार करते हैं जिस प्रकार का प्यार दो लोग एक दूसरे से करते हैं। तो शादी करने के लिए दो लोगों की जरूरत ही नहीं। आसान भाषा में कहा जाए कि अगर आप अपने आप से ही प्रेम करते हैं और शादी करना चाहते हैं तो इसे सोलोगैमी कहा जाता है।

साथ ही अगर आपको लगता है कि आपको अपनी जीवन में किसी जीवन साथी की आवश्यकता नहीं है तो आप खुद से भी शादी कर सकते हैं। वही ऐसे लोग जो अपने मन मुताबिक जीवन जीना चाहते हैं और उन्हें किसी साथी की आवश्यकता नहीं महसूस होती तो सो लोग सोलोगैमी की ओर रुख कर सकते हैं।

सोलोगैमी के मुख्य कारण

▪️सोलोगैमी का एक बड़ा कारण ये है कि महिलाओं को ऐसा लगता है कि वो जितना खुश स्वयं के साथ रह सकती हैं, उतना उनके पार्टनर उन्हें नहीं रख पाएंगे।

▪️ कई लड़कियों को ऐसे लगता है कि उन्हें किसी पार्टनर की जरूरत नहीं इसीलिए वो सोलोगैमी को अपनाती हैं।

▪️जब लड़कियों को कोई विश्वसनीय पाटनर नहीं मिलता या फिर वो धोखा खाई होती हैं तो सोलोगैमी की तरफ रुख करती हैं।

▪️सबसे बड़ा कारण यही है कि 16 मई को अपनाकर लड़कियां खुद से और जीवन से एक खूबसूरत जुड़ाव महसूस करती हैं, जिसके बाद उन्हें किसी अन्य व्यक्ति की जरूरत महसूस नहीं होती।

कब हुई थी सोलोगैमी की शुरुआत?

आपको बता दें कि भले ही भारत में पहली दफा सोलोगैमी शादी होने जा रही है लेकिन ऐसी शादी का इतिहास काफी पुराना है। दरअसल पहली बार सोलोगैमी अमेरिका में हुई थी। सन 1993 में एक अमेरिकी महिला ने खुद से ही शादी कर ली थी। उस महिला का नाम था लिंडा बारकर। उसने सेल्फ मैरिज के लिए अपनी शादी में करीब 75 मेहमानों को न्योता देकर बुलाया था। इसके बाद से ही पश्चिमी देशों में सोलोगैमी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा और अब ये भारत तक पहुंच गया है।

भारत में सोलोगैमी ( Sologamy In India )

Gujarat-Girl-Kshama-Bindu-Going-To-Marry-Herself-in-Vadodara-Sologamy

Source: https://zeenews.india.com/hindi/india/gujarat-girl-kshama-bindu-going-to-marry-herself-in-vadodara-sologamy/1205326

आपको बता दें कि हाल ही में सोलोगैमी का मामला भारत में सामने आया है जहां पर गुजरात के वडोदरा की रहने वाली क्षमा बिंदु नाम की लड़की ने स्वयं से 11 जून को शादी रचाने का निर्णय लिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस शादी में बकायदा पूरी तैयारी की जा रही है।

भारत की ये पहली सोलोगैमी शादी है। इस शादी में मंडप होगा, मेहमान होंगे, दुल्हन होगी, जयमाला होगी, शादी के फेरे भी होंगे लेकिन बस अगर कुछ नहीं होगा तो वो है दूल्हा। दरअसल खुद से शादी करने का आईडिया क्षमा बिंदु का ही था। 

क्षमा के अनुसार वो कभी शादी करना ही नहीं चाहती थी लेकिन वो एक दफा दुल्हन जरूर बनना चाहती थी। वो शादी के खूबसूरत जोड़े को पहनना चाहती थी लेकिन किसी और के साथ रिश्ते में बंधने को तैयार बिल्कुल नहीं थी। यही कारण है कि उन्होंने सोलोगैमी करने का निश्चय किया।

शादी को लेकर उनका यही विचार था कि वह किसी के साथ भी शादी के बंधन में नहीं बनना चाहती थी लेकिन एक बार दुल्हन की तरह तैयार जरूर होना चाहती थी। उस कारण से उन्हें सोलोगैमी का आईडिया आया अभी उसके बाद से ही उनकी शादी की तैयारी शुरू हो गई।

सोलोगैमी पर क्या कहता है भारत का कानून?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में जब एक लड़का और लड़की संपूर्ण विधि और व्यवस्था के साथ एक दूसरे से शादी करते हैं तभी उसे पूर्ण शादी कहा जाता है। इसके अलावा किसी कानूनी मान्यता के लिए एक मैरिज सर्टिफिकेट भी लेना होता है।

लेकिन फिलहाल वर्तमान समय में ही दुनिया की कई ऐसे देश हैं जहां पर समलैंगिक शादी को भी कानूनी मानता मिल चुकी है। वही अगर सोलोगैमी की बात करें तो अभी तक भारत का कानून ऐसी शादियों को मान्यता नहीं देता है। साथ ही गौरतलब है कि इस सोलोगैमी की शुरुआत करीब दो दशक पहले ही हो गई थी।

इसी के साथ ये बात तो साफ़ है कि सोलोगैमी एक ऐसा माध्यम है जिससे आप स्वयं के प्रति प्यार जता सकते हैं। कई ऐसे लोग हैं जिन्हें अपने जीवन में किसी अन्य व्यक्ति की जरूरत महसूस नहीं होती ऐसे लोगों को सोलोगैमी एक सही उपाय नज़र आता है। अब देखना ये होगा कि ये प्रचलन और कितनी आगे तक जाता है। साथ ही समाज और लोगों की इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है।

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