माँ पर कविताएँ | Poems on Mother in Hindi

poem on mother in hindi

आपकी माँ आपके लिए कितनी मायने रखती है, इसे शब्दों में बयां करना पाना आसान नहीं है। आखिरकार, आप उस प्यार और समर्थन को कैसे व्यक्त कर सकते हैं जो आपकी माँ ने आपको इतने वर्षों से दिया है, ये निश्चित रूप से आसान नहीं है। इसलिए इन खूबसूरत कविताओं में से एक जो आपके मन के मुताबिक हो उसे चुने और अपनी माँ से अपना प्रेम व्यक्त करें। 

इन माँ पर कविताओं के माध्यम से आपको अपनी माँ से अपना प्रेम व्यक्त करने में आसानी होगी। माँ और बच्चे के बीच के शक्तिशाली संबंध को व्यक्त करने में कविताएं आपकी मदद कर सकती हैं। इनके ज़रिए आप आसानी से अपने मन के अनुसार अपनी बात कह सकते हैं। 

जबकि हम जानते हैं कि ये शब्द किसी भी उपहार या हावभाव को मात देंगे, वो भी कुछ अतिरिक्त की हकदार है। आप जब इन कविताओं को उनके सामने पढ़कर उनसे अपने मन की बात कहेंगे तो उन्हे बेहद खुशी होगी। माता के लिये उपहार लेना न भूलें और पूरे परिवार के लिए अपने माता-पिता के साथ आनंद लें।

Poems on Mother in Hindi

Maa par Kavita

घुटनो से रेंगते रेंगते
कब पैरो पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाव में
ना जाने कब बड़ा हुआ।

काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा हैं ,
एक मैं ही मैं हूँ हर जगह
प्यार ये तेरा कैसा हैं।

सीदा-सादा , भोला-भाला
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊं बड़ा माँ
मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ।

कैसा था नन्हा बचपन वो
माँ की गोद सुहाती थी ,
देख देख कर बच्चों को वो
फूली नहीं समाती थी।

ज़रा सी ठोकर लग जाती तो
माँ दौड़ी हुई आती थी ,
ज़ख्मों पर जब दवा लगाती
आंसू अपने छुपाती थी।

जब भी कोई ज़िद करते तो
प्यार से वो समझाती थी,
जब जब बच्चे रूठे उससे
माँ उन्हें मनाती थी।

खेल खेलते जब भी कोई
वो भी बच्चा बन जाती थी,
सवाल अगर कोई न आता
टीचर बन के पढ़ाती थी।

सबसे आगे रहें हमेशा
आस सदा ही लगाती थी ,
तारीफ़ अगर कोई भी करता
गर्व से वो इतराती थी।

होते अगर ज़रा उदास हम
दोस्त तुरन्त बन जाती थी ,
हँसते रोते बीता बचपन
माँ ही तो बस साथी थी।

माँ के मन को समझ न पाये
हम बच्चों की नादानी थी ,
जीती थी बच्चों की खातिर
माँ की यही कहानी थी।

Poem On Mother in Hindi

जमीन पर जन्नत मिलती है कहाँ
दोस्तों ध्यान से देखा करो अपनी माँ

जोड़ लेना चाहे लाखों करोड़ो की दौलत
पर जोड़ ना पाओगे कभी माँ सी सुविधा

आते हैं हर रोज फरिश्ते उस दरवाजे पर
रहती है खुशी से प्यारी माएं जहाँ जहाँ

छिन लाती है अपनी औलाद की खातिर खुशियाँ
कभी खाली नही जाती माँ के मुहं से निकली दुआ

वो लोग कभी हासिल नही कर सकते कामयाबी
जो बात बात पर माँ की ममता में ढूँढते है कमियां

माँ की तस्वीर ही बहुत,बड़े से बड़ा मन्दिर सजाने को
माँ से सुंदर दुनिया में नही होती कोई भी प्रतिमा

माँ का साथ यूँ चलता है ताउम्र आदमी संग
जैसे कदमों तले झुका रहता हो सदा आसमां

माँ दिखती तो है जिस्म के बाहर सदा
पर माँ है रूह में मौजुद बेपनाह होंसला

कभी गलती से भी बुरा ना सोचना माँ के बारे में
ध्यान रहे माँ ने ही रचा हर जीवन का घोंसला

मर कर भी बसी रहती है माँ धरती पर ही अ नीरज
कभी नही होता औलाद की खातिर उसके प्रेम का खात्मा

Maa Poem in Hindi

हर एक साँस की कहानी है तू
परी कोई प्यारी आसमानी है तू,
जीती मरती है तू औलाद की खातिर
सिर्फ ममता की भूखी दीवानी है तू।

तेरी गोदी से बढकर नही कोई भी चमन
हमेशा फरिश्तों से घिरा रहता था तन,
गुजरा है तेरे संग हर लम्हा जन्नत में
ताउम्र महसूस होती रहेगी तेरी चाहतों की तपन,
इश्क करना फितरत है तेरी
हर देवता की जानी पहचानी है तू।

तू अदभुत साँस बनकर जिस्म को महकाती
हसीन जन्नत खुद तेरे करीब आ जाती
अजीब कशिश है तेरी चाहतों में माँ,
तू रोते बालक को पल में हंसाती
कोई नही तुझसे बढकर खुबसुरत जग में
हजारों परियों की रानी है तू।

दुआ है तेरी कोख से हो हर बार जन्म
भूलकर भी कभी ना हो तुझे कोई गम
तुझ जैसा कोई और चाह नही सकता,
तू ही सच्ची दिलबर तू ही सच्ची हमदम
हर करिश्मे से है तू बड़ी
खुदा की जमीन पर मेहरबानी है तू।

Poem On Mother in Hindi

मेरी ही यादों में खोई
अक्सर तुम पागल होती हो
माँ तुम गंगा-जल होती हो!

जीवन भर दुःख के पहाड़ पर
तुम पीती आँसू के सागर
फिर भी महकाती फूलों-सा
मन का सूना संवत्सर

जब-जब हम लय गति से भटकें
तब-तब तुम मादल होती हो।

व्रत, उत्सव, मेले की गणना
कभी न तुम भूला करती हो
सम्बन्धों की डोर पकड कर
आजीवन झूला करती हो

तुम कार्तिक की धुली चाँदनी से
ज्यादा निर्मल होती हो।

पल-पल जगती-सी आँखों में
मेरी ख़ातिर स्वप्न सजाती
अपनी उमर हमें देने को
मंदिर में घंटियाँ बजाती

जब-जब ये आँखें धुंधलाती
तब-तब तुम काजल होती हो।

हम तो नहीं भगीरथ जैसे
कैसे सिर से कर्ज उतारें
तुम तो ख़ुद ही गंगाजल हो
तुमको हम किस जल से तारें

तुझ पर फूल चढ़ाएँ कैसे
तुम तो स्वयं कमल होती हो।

Mother Poem in Hindi

घुटनो से रेंगते रेंगते
कब पैरो पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाव में
ना जाने कब बड़ा हुआ।

काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा हैं ,
एक मैं ही मैं हूँ हर जगह
प्यार ये तेरा कैसा हैं।

सीदा-सादा , भोला-भाला
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊं बड़ा माँ
मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ।

कैसा था नन्हा बचपन वो
माँ की गोद सुहाती थी ,
देख देख कर बच्चों को वो
फूली नहीं समाती थी।

ज़रा सी ठोकर लग जाती तो
माँ दौड़ी हुई आती थी ,
ज़ख्मों पर जब दवा लगाती
आंसू अपने छुपाती थी।

जब भी कोई ज़िद करते तो
प्यार से वो समझाती थी,
जब जब बच्चे रूठे उससे
माँ उन्हें मनाती थी।

खेल खेलते जब भी कोई
वो भी बच्चा बन जाती थी,
सवाल अगर कोई न आता
टीचर बन के पढ़ाती थी।

सबसे आगे रहें हमेशा
आस सदा ही लगाती थी ,
तारीफ़ अगर कोई भी करता
गर्व से वो इतराती थी।

होते अगर ज़रा उदास हम
दोस्त तुरन्त बन जाती थी ,
हँसते रोते बीता बचपन
माँ ही तो बस साथी थी।

माँ के मन को समझ न पाये
हम बच्चों की नादानी थी ,
जीती थी बच्चों की खातिर
माँ की यही कहानी थी।

माँ के लिए हम कितना भी लिख लें या बोल लें हमेशा कम ही होगा। हम कितने भी बड़े हो जायें लेकिन अपनी माँ के लिए सदैव बच्चे ही रहते। हम माँ के लिए चाहें कितना भी कुछ क्यूँ न कर लें लेकिन उनका ऋण कभी नहीं चुका सकते। वैसे तो मातृ दिवस एक दिन के लिए आता है लेकिन हमें रोज ही माँ को प्रसन्न रखने का प्रण लेना चाहिए। हमारे जीवन का ये सबसे पहला लक्ष्य होना चाहिए कि मेरी वजह से कभी भी मेरी माँ की आँखों में आंसू नहीं आयें।

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