कौन होते हैं Zen Monks? इनसे जानिए जीवन जीने की कला।

संसार में अनेक ऐसे लोग हुए हैं। जिनके द्वारा बताए गए रास्तों पर चलकर लोगों ने अपने जीवन का उद्धार किया है। Zen monks भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जिनके बताए गए सन्मार्ग पर यदि आप भी चलते हैं तो अपनी जीवन रूपी नैया को आसानी से पार लगा सकते हैं। ऐसे में इनके द्वारा दी गई शिक्षा के बारे में जानने से पहले चलिए जानते हैं कि आखिर कौन होते हैं जेन साधु (zen monks)?

Zen एक चीनी शब्द है। जिसका तात्पर्य ध्यान लगाना या चिंतन करने से लगाया जाता है। 5वीं शताब्दी के दौरान चीन में लोगों द्वारा ध्यान लगाने के अभ्यास पर जोर दिया जाता था। धीरे-धीरे यह चलन जापान, कोरिया और वियतनाम में भी होने लगा।

ऐसे में जो लोग zen संप्रदाय में बताई गई नीतियों का पालन करते हैं, उन्हें ही zen monks कहा जाता है। जिनके अनुसार, ईश्वरीय भक्ति और भजन से बेहतर आत्मचिंतन करके परम ज्ञान हासिल किया जाना चाहिए। Zen monks का प्रमुख महाकाश्यप को कहा जाता है।

जोकि महात्मा बुद्ध के शिष्य थे, इन्होंने ही जैन साधुओं के अस्तित्व का सूत्रपात किया था।इस प्रकार कह सकते हैं कि zen बौद्ध धर्म के ही प्रमुख 12 संप्रदायों में से एक हैं। मुख्य रूप से ये पहले जापान के सेमुराई जाति के लोगों का धर्म हुआ करता था। जिसमें बताए गए सूत्र मानव जीवन को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। तो चलिए अब जानते हैं कि zen monks के अनुसार, हमें जीवन कैसे व्यतीत करना चाहिए।

  1. एक समय में एक ही कार्य करे –
    ज़ेन साधु एक समय पर एक ही कार्य करते हैं। यानि जब वह खाते है, तो शांति से भोजन करते हैं और पानी पीते हैं, तो आराम से पानी पीते हैं। आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी में लोग एक ही समय पर कई सारे कार्यों को अंजाम देते हैं। वह ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि आजकल के लोगों के पास समय का अभाव है। जैन साधुओं का मानना है कि यदि हम एक समय पर एक ही कार्य को पूर्ण लगन के साथ करते हैं, तो इससे जहां एक ओर हमारी शक्ति का बचाव होता है और दूसरा हम किसी भी कार्य में अपना शत प्रतिशत दे पाते हैं। इसलिए हमें एक समय पर एक ही कार्य को सम्पन्न करना चाहिए अन्यथा हमारे कार्यों में गलती की संभावना बनी रहती है।

  2. किसी भी काम को हड़बड़ी में ना करें-
    जब कोई व्यक्ति किसी एक कार्य को ही एक समय पर करता है। तो अक्सर वह अन्य कार्य को करने की कोशिश में पहले कार्य में जल्दबाजी करता है। जिसका परिणाम यह रहता हैवह कोई भी कार्य ठीक तरह से नही कर पाता है। इसलिए जेन साधुओं का मानना है कि व्यक्ति जब भी कोई एक कार्य करें तो उसमें समय देने के बाद ही आगे बढ़े। ऐसा करने से ही वह अपने कार्य को ठीक तरह से करने में सफल हो पाता है।

  3. प्रत्येक कार्य को पूरा करके ही हटें-
    ज़ेन साधुओं के अनुसार, अगर आपने किसी कार्य को करने का सोचा है तो उसे पूरा करके ही आगे बढ़ना चाहिए। तभी आपको किसी कार्य का पूर्ण परिणाम प्राप्त होता है। ऐसे में यदि आप किसी कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़ देते हैं या कल पर टाल देते हैं। तो वह कार्य अगले दिन आपको बोझ लगने लगेगा और अगले दिन के कार्यों की हड़बड़ी में आप उस कार्य को कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। 

  4. हर कार्य को करने का समय निर्धारित करें-
    जो लोग अपना सारा काम निश्चित समय पर पूर्ण करते हैं। ज़ेन साधुओं के अनुसार ऐसे लोग जीवन में सफलता और खुशहाली अर्जित करते हैं। इसके विपरित जो लोग कार्य को समय सीमा के अंतराल नही बांटते हैं, वह अपने समय को बर्बाद करते हैं। साथ ही जिस कार्य पर उन्हें अधिक समय देना होता है, वह उसपर अधिक समय ना लगाकर व्यर्थ के कार्यों में अपना समय गवां देते हैं। जिस कारण उन्हें आगे चलकर बहुत पछताना पड़ता है। इसलिए हमें अपने जरूरी कामों को समयानुसार बांट देना चाहिए ताकि उनको समय रहते पूरा किया जा सके।

  5. नैतिक मूल्यों को अपनाएं-
    जो व्यक्ति जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाता है। वह सदैव ही उच्च मूल्यों से ओत प्रोत जीवन व्यतीत करता है। जैसे हमें अक्सर शारीरिक स्वच्छता रखने को कहा जाता है और अपने कार्यों को स्वयं करने की शिक्षा दी जाती है। ठीक उसी प्रकार से, जब भी हम सुबह उठते हैं या रात को सोने से पहले हमें ईश्वर का ध्यान करने को कहा जाता है। जैन साधु भी अपने जीवन में अनेक प्रकार की नैतिक शिक्षाओं को अपनाते हैं और उनका पालन करते हैं।

  6. ध्यान अवश्य लगाएं-
    व्यक्ति जिस भी कार्य को तन और मन लगाकर करता है, वह उसमें अवश्य सफल होता है। ठीक उसी प्रकार से, भगवान का ध्यान करके आप भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। जैन साधुओं के अनुसार, ऐसा करने के लिए व्यक्ति को ध्यान की अवस्था का गुण अपनाना चाहिए। जिससे एक ओर व्यक्ति की एकाग्र क्षमता में वृद्धि होती है। दूसरी ओर वह अपने साधारण से जीवन को उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में लगा देता है। जिससे उसको जीवन में सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति होती है।

  7. मुस्कुराते हुए सेवाभाव करें-
    ज़ेन साधुओं के अनुसार, वह अपना अधिकांश समय जरूरतमंदों की सेवा में लगाते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर ने हमें जो जीवन दिया है, उसको हमें केवल स्वार्थ परक होकर नही जीना चाहिए। बल्कि दूसरों की सेवा में लगाना चाहिए। फिर चाहे वह कोई निर्धन हो या कोई आपका परिचित जोकि परेशान हो और आपसे मदद की आशा रखता है। साथ ही व्यक्ति को दूसरों की मदद सदैव खुश होकर और बिना किसी दवाब में आए करनी चाहिए। तभी उस व्यक्ति को अपनी सेवा का असली फल प्राप्त होता है।

  8. आसपास साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें-
    ज़ेन साधुओं द्वारा साफ सफाई और अपना भोजन स्वयं तैयार किया जाता है। उनका मानना है कि व्यक्ति को अपने आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। इससे व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। दूसरी ओर, जो व्यक्ति अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उनको कभी भी अपने कामों के लिए दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ता है और उनका जीवन सदा सुचारू रूप से व्यवस्थित रहता है।

  9. जरूरी चीजों के बारे में विचार करें-
    जीवन में अधिकतर वह लोग कभी सुखी नही रहते हैं, जो हमेशा विलासिता पूर्ण चीज़ों के बारे में विचार करते हैं। यानि जिन व्यक्तियों को जीवन जीने के अधिक से अधिक वस्तुओं का उपभोग करना होता है। ऐसे व्यक्ति कभी भी सुखमय जीवन व्यतीत नही कर पाते हैं। देखा जाएं तो जैन साधुओं के पास ना तो कार और ना ही टीवी होता। ना तो वह बंगले में रहते हैं और ना ही ब्रांड की चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में यह अवश्य ज्ञात होता चाहिए कि उसको जीवन जीने के लिए क्या आवश्यक है। और किन चीजों के ना होने पर भी वह अपना जीवन आसानी से व्यतीत कर सकता है। ऐसे करके व्यक्ति अपने जीवन को व्यर्थ की चिंताओं से मुक्त रख सकता है।

  10. सादा जीवन व्यतीत करें-
    जिस व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि उसके लिए आवश्यक क्या है? तो ऐसा व्यक्ति कभी भी मोह माया का शिकार नहीं होता है। वह हमेशा सादा जीवन जीते हुए आगे कदम बढ़ता है। ऐसे व्यक्ति को ना आगे बढ़ने की अधिक लालसा होती है और ना पीछे गिरने का भय। वह केवल स्वयं पर विश्वास रखकर आगे बढ़ता है। ज़ेन साधुओं के अनुसार, जो लोग सादा जीवन और उच्च विचारों को अपने जीवन में ग्रहण करते हैं, ऐसे व्यक्ति दुख और चिंता से कोसो दूर रहते हैं और निर्भीक होकर अपना जीवन जीते हैं।

आशा करते हैं कि आपको ज़ेन साधुओं के दिखाए गए मार्ग से प्रेरणा मिली होगी। आपको अगर यह लेख पसंद आया हो तो हमारी वेबसाइट Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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