इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला में देखने को मिलता है आर्क रिएक्टर,जानिए क्या 800 साल पहले से मौजूद है ये आधुनिक तकनीक?

arc reactor in temples

Arc Reactor Found in Indian Temple’s? Secret Energy Device of The God’s

दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां देवी-देवताओं के सबसे अधिक मंदिर पाए जाते हैं। यहां मौजूद प्रत्येक मंदिर किसी ना किसी तरह का अद्भुत रहस्य खुद में समेटे हुए हैं। एक ऐसा ही अनोखा मंदिर भारतवर्ष में मौजूद हैं, जिसका निर्माण वैज्ञानिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।

यानि इस प्राचीन मंदिर के निर्माण में विज्ञान की जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, वह अपने आपमें काफी अद्भुत है। ऐसे में इस मंदिर के विषय में आज हम आपको अनेक पुरातत्वविदों की खोज के आधार पर बताएंगे, जोकि भारत के प्राचीन मंदिरों की निर्माण शैली और उनके रहस्यों की गुत्थी सुलझाने में आपकी मदद करेंगे ।

कैसे प्राचीन समय में बिना आधुनिक मशीनों और तकनीक के भी इतने आश्चर्यजनक मंदिरों और इमारतों का निर्माण संभव हो सका। जिनका पूरी दुनिया आज भी अचंभा मानती है।

तो चलिए जानते हैं इस मंदिर में मौजूद आधुनिक विज्ञान से जुड़ी तकनीक के बारे में

(ARC Reactor) आर्क रिएक्टर मौजूद है इस मंदिर की वास्तुकला में

आपने हॉलीवुड की एक एक्शन आधारित वेब सीरीज मार्बल्स  (Marvels) में आयरन मैन (iron man) के किरदार को निभाने वाले अभिनेता टोनी स्टार्क (Tony stark) को आर्क रिएक्टर (ARC Reactor) का इस्तेमाल करते देखा होगा। जिसने आर्क रिएक्टर का आविष्कार इसलिए किया ताकि अनियमित रूप से ऊर्जा (Power) को स्टोर करके रखा जा सके।

फिल्म के लिहाज से समझें तो, आर्क रिएक्टर (ARC Reactor)  का प्रयोग इसलिए किया गया ताकि आयरन मैन के armer suit को ऊर्जा मिल सके, जोकि उसने मार्बल्स सीरीज में पहना है।

आर्क रिएक्टर है भविष्य में प्रयुक्त होने वाली तकनीक

ऐसे में, सरल शब्दों में आप आर्क रिएक्टर का इस्तेमाल तो समझ गए होंगे, जोकि गोलाकार होता है और इसमें ऊर्जा प्लाज्मा के तौर पर स्टोर करके रखी जाती है।

निकट भविष्य में, वैज्ञानिक कुछ इसी तरह की तकनीक का आविष्कार करके ऊर्जा को स्टोर करके रखने की तकनीक का इजात करने वाले हैं।

हालंकि ऊर्जा को स्टोर करके रखने की ये तकनीक आसान नहीं होने वाली है, क्योंकि ऊर्जा के इलेक्ट्रॉन निरंतर गतिशील रहते हैं, ऐसे में ये तकनीक का प्रयोग इतना आसान नहीं होने वाला है। तो चलिए ये तो रही..भविष्य की बात!

लेकिन अगर हम आपसे कहें कि हमारे भारत के एक प्राचीन मंदिर में आर्क रिएक्टर की तकनीक का प्रयोग हुआ है, यानि इस मंदिर की वास्तुकला हुबहू आर्क रिएक्टर तकनीक से मिलती जुलती है, तो क्या आप हमारी बात पर यकीन करेंगे।

क्योंकि अभी तक हमने आपको बताया कि आर्क रिएक्टर पर दुनिया भर के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और ये ऊर्जा के भंडारण की एक जटिल तकनीक है, जिसका प्रयोग हमारे पूर्वज कर चुके हैं,तो एक ओर तो ये आश्चर्यजनक तो वहीं दूसरी ओर गर्व करने वाली बात होगी।

इस प्राचीन मंदिर के स्थापना काल की बात करें तो ये मंदिर करीब 1250 ईसवी में बना होगा। यानि आज से करीब 800 साल पहले। जिसकी वास्तुकला और नक्काशी को देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे।

जी हां! इस प्राचीन मंदिर की नक्काशी में आपको कोई फूल पत्ती या केवल देवी-देवताओं की आकृति ही देखने को नहीं मिलती है, बल्कि यहां आधुनिक आर्क रिएक्टर (ARC Reactor) तकनीक को मंदिर की ऊपरी सतह पर बनाया गया है।

हालांकि साधारण लोग इसे देखकर किसी हवाई जहाज का जेट इंजन कह सकते हैं, लेकिन इसका आकार बिल्कुल आर्क रिएक्टर की तरह है, जिसमें बल्ब लटकाकर उसे प्रकाश स्रोत के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें तार को दो छोर से जोड़ा गया है। इस आर्क रिएक्टर की तरह दिखने वाली नक्काशी में पांच सकेंद्रिकत गोले है, जोकि एक दूसरे से गोलाकार तरीके से जुड़े हैं। 

इसके अलावा, मंदिर की अन्य नक्काशियों को गौर से देखें तो पाएंगे कि मंदिर के निर्माणकर्ताओं ने अद्भुत कारीगरी की है। उन्होंने आर्क रिएक्टर को मंदिर की ऊपरी सतह पर दिखाया है, जिसके नीचे कई सारे लोग जो एक रस्सी को पकड़े हुए हैं।

हालांकि इसे साधारण रूप से देखने वाले लोग समुद्र मंथन भी कह सकते हैं, लेकिन इस रस्सी का सिरा जाकर आर्क रिएक्टर के समान दिखने वाली नक्काशी से जुड़ जाता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि ये रस्सी पकड़े लोग और आर्क रिएक्टर की नक्काशी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जो किसी ना किसी खास तकनीक या प्रबंध की ओर इशारा करती है। 

मंदिर की अन्य नक्काशियों पर नजर डालें तो मंदिर में जगह जगह पर आर्क रिएक्टर का सबसे भीतरी गोला, जोकि देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि नीचे से किसी मोटे केबल तार से जोड़ा गया है, जिसके आसपास एक सिलेंडर लिया आदमी खड़ा है, जो एक दूसरे से जुड़े हैं।

इस मंदिर के स्तंभ भी थोड़े अलग तरह से बनाए गए है, जोकि लंबे और ऊपरी सतह से गोलाकार आकृति के बने हुए हैं। इन विशाल स्तंभों के ऊपर ही आर्क रिएक्टर बना हुआ है, जिसके चारों ओर रस्सी पकड़े व्यक्ति बने हुए है।

जिससे ये स्पष्ट होता है कि इन गोलाकार स्तंभों, रस्सी पकड़े व्यक्तियों और आर्क रिएक्टर आपस में मिलकर किसी बहुत अद्भुत तकनीक को दर्शाते हैं।

इस मंदिर में आर्क रिएक्टर पकड़े व्यक्तियों या आर्क रिएक्टर जैसी तकनीक या गोले पर पैर टिकाए व्यक्तियों की आकृति पाई गई है, जोकि ऐसा प्रतीत होता है कि मानो पहले उस दौर के लोग भी ऊर्जा भंडारण के लिए आर्क रिएक्टर जैसी तकनीक का इस्तेमाल करना जानते थे।

इस तरह से स्पष्ट होता है कि उपरोक्त मंदिर में आर्क रिएक्टर की जो नक्काशियां देखने को मिल रही है, वह कहीं ना कहीं प्राचीन लोगों द्वारा ऊर्जा के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल की जाती रही होंगी।

जैसे आधुनिक समय में हम सौर ऊर्जा भंडारण, सोलर बैटरी और जनरेटर आदि को उधर उधर आसानी से ले जाकर ऊर्जा को एक जगह इक्कठा करके उसका इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही प्राचीन समय में लोग भी आर्क रिएक्टर जैसी तकनीक को ऊर्जा भंडारण के लिए प्रयोग में लाते होंगे, जिसका प्रत्यक्ष नमूना हमें इस मंदिर में देखने को मिलता है।

हमें इस मंदिर में आर्क रिएक्टर के पिछले हिस्से को भी दर्शाया गया है, जोकि एक बाड़े में सिलेंडर के माध्यम से प्रयोग में लाया जाता है। इन बाड़ों से आर्क रिएक्टर को ठंडक प्रदान की जाती है, जोकि जब ऊर्जा अवशोषित करती है तो गर्म हो जाती है, जिसे ठंडा रखने के लिए इसे बाड़ों में सुरक्षित रखा जाता है।

हालंकि मंदिर की इन नक्काशियों को मंदिर के भीतर इस तरह से बनाया गया है कि बिना प्रकाश के इन्हें देखना असंभव है, तो ऐसा माना जाता है कि प्राचीन लोगों ने इन नक्काशियों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को आर्क रिएक्टर की तकनीक से रूबरू कराया है, वरना ये उस समय की उन्नतशली तकनीक है, जोकि हुबहू आर्क रिएक्टर से मिलती है और ऊर्जा भंडारण का संकेत देती है।

उम्मीद करते हैं कि आपको उपरोक्त लेख के माध्यम से बताया गया आर्क रिएक्टर के बारे में । इसी प्रकार के अन्य धार्मिक लेखों की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें।

Feature image: iampraveenmohan


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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