भगत सिंह के विचार – Bhagat Singh Quotes in Hindi

भगत सिंह का जीवन

“इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज्बातों से,
अगर लिखना चाहूं भी इश्क तो भी इंकलाब लिख जाता है”

उपयुक्त क्रांतिकारी विचारों से ओत प्रोत शहीद भगत सिंह के बारे में कौन नहीं जानता होगा? सरकारी दस्तावेजों में भले ही भगत सिंह को शहीद मान लिया गया हो। लेकिन भारतीय नागरिकों के दिल में भगत सिंह आज भी जिंदा हैं। भगत सिंह ब्रिटिश सरकार से भारत देश को आजादी दिलवाना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने क्रांति का मार्ग चुना। इनका जन्म 27 सितंबर 1907 को वर्तमान पाकिस्तान के लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था।

इनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। भगत सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़कर क्रांति का रास्ता चुन लिया था। ऐसे में इनके क्रांतिकारी जीवन पर जलियांवाला कांड औऱ काकोरी कांड ने काफी प्रभाव डाला था। जिसके चलते वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नीतियों के विरोधी हो गए थे। भगत सिंह ने सदैव ही अंग्रेजों से भारतीय समाज को छुटकारा दिलाने के लिए प्रतिशोध लिया। एक बार जब भगत सिंह ने दिल्ली की सेण्ट्रल असेम्बली पर अपने साथियों के साथ मिलकर बम विस्फोट किया था। तब उन्हें राजगुरु, सुखदेव समेत 23 मार्च 1931 को अंग्रेज सरकार द्वारा फांसी पर लटका दिया गया था।

ऐसे में भारतीय समाज में यह दिन शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार, भगत सिंह ने अपनी छोटी सी आयु में भारतीय समाज के समक्ष देशभक्ति का एक नायाब उदाहरण पेश किया था। यह एक महान् भारतीय क्रांतिकारी होने के साथ-साथ, अच्छे लेखक, वक्ता, अध्ययनशील विचारक, चिंतक, दार्शनिक औऱ देशभक्त भी थे। ऐसे में आज हम आपके लिए महान् शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार लेकर आए हैं। जिन्हें पढ़कर आप अवश्य ही देशभक्ति के विचारों को अपनाने के विवश हो जाएंगे।

शहीद भगत सिंह के विचार – Bhagat Singh Quotes

  1. मनुष्य को जिंदगी अपने कंधों पर जीना चाहिए, क्योंकि दूसरों के कंधों पर तो जनाजे उठाए जाते हैं।

  2. मनुष्य को मारना कठिन हैं लेकिन उसके विचारों को नहीं। ठीक उसी प्रकार से, राजाओं के राज्य टूट जाते हैं लेकिन उनके विचार बच जाते हैं।

  3. कानून तभी तक सार्थक होता है जब तक वह लोगों की अभिव्यक्ति का आधार न बने।

  4. क्रांतिकारी बनने के लिए दो आवश्यक चीजों का होना आवश्यक है, पहला हद से अधिक निंदा औऱ दूसरा स्वतंत्र विचारों से ओत प्रोच सोच।

  5. मेरे सीने में जो दर्द दफन है वह सब फूलों के गुच्छे हैं। हम पागल ही अच्छे है और हमें पागल ही रहने दो।

  6. मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में रहकर भी आजाद है। अर्थात् राख का एक-एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है।

  7. संसार में बुराई इसलिए नहीं बढ़ रही है क्योंकि बुरे लोग अधिक है। बल्कि बुराई को सहन करने वाले लोग बढ़ गए हैं।

  8. मेरे जिंदा रहने की एक शर्त है कि मैं पांबद होकर नहीं जी सकता हूं।

  9. जीवन में सफलता माहौल और अवसर पर निर्भर करती है इसलिए व्यक्ति को प्रयत्नशील रहना चाहिए।

  10. इस दुनिया में चाहे वह प्रेमी हो, पागल हो या फिर कवि, सब एक ही चीज के बने होते हैं।

  11. बहरे व्यक्ति को यदि कुछ सुनाना है तो आवाज को जोरदार करना होगा। जैसे हमने असेम्बली में बम फोड़कर अंग्रेजों को भारतीय आजादी की गूंज सुनाई थी।

  12. क्रांति शब्द की व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस शब्द के मयाने अलग अलग होते हैं।

  13. लोग जिन चीजों के आदि हो जाते हैं तो वह उनमें बदलाव की कोशिश ही नहीं करते हैं। हमें इसी भावना को क्रांतिकारी सोच में बदलने की आवश्यकता है।

  14. जो व्यक्ति विकास की बात करता है उसे सदैव ही रूढ़िवादी चीजों का विरोध करना चाहिए। साथ ही रूढ़िवादी चीजों पर अविश्वास करना चाहिए तभी वह उन्हें चुनौती दे सकता है।

  15. मेरा जीवन महत्वाकाक्षाओं, आशाओं से भरा हुआ है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मैं इनका त्याग कर सकता हूं।

  16. मनुष्य द्वारा बल का प्रयोग ना किया जाना एक काल्पनिक आदर्श मात्र है।

  17. मानव द्वारा किया गया कर्म तभी सफल हो पाता है, जब वह अपने काम के औचित्य को लेकर निश्चयी होता है।

  18. समाज में क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य़ अधिकार है। साथ ही स्वतंत्रता मनुष्यों का जन्म सिद्ध अधिकार है।

  19. एक इंसान होने के नाते जो भी चीजें इंसानियत पर प्रभाव डालती हैं। मुझे उनसे प्रभाव पड़ता है।

  20. स्वयं को बचाने की कभी मैंने कोई इच्छा न रखी और न कभी इस बारे में विचार किया।

  21. क्रांति का तात्पर्य़ केवल उथल पुथल करना और हिंसक प्रदर्शन करना मात्र नहीं है।

  22. यह वक्त विवाह करने का नहीं है, क्योंकि मुझे अपने देश की सेवा करनी है। मैंने अपने दिल और आत्मा के साथ देश सेवा की प्रतिज्ञा ले रखी है।

  23. किसी भी प्रकार का विद्रोह क्रांति नही हो सकता है, अन्यथा आपका अंत हो जाएगा।

  24. फांसी के फंदे पर लटककर, मैं दुनिया को दिखाऊंगा कि एक क्रांतिकारी देशभक्ति के आगे स्वंय का बलिदान कर देता है।

  25. मैं उसके अस्तित्व के होने से इंकार करता हूं। जिसे दुनिया भगवान कहती है।

  26. व्यक्ति के धर्म को यदि राजनीति से अलग कर दिया जाए। तो हम सब इकट्ठे हो जाते हैं। धर्मों में हम सब चाहे कितने ही अलग क्यों न हो।

  27. समझौते का मतलब आत्मसमर्पण करना नहीं होता है। केवल एक कदम औऱ कुछ आराम यह हमारे लिए समझौते के समान है।

  28. इंसान के चरित्र को केवल सच्चा प्रेम ही ऊपर उठा सकता है।

  29. संसार में मौजूद दर्शन मनुष्य की कमजोरी या ज्ञान की सीमा का उच्चतम परिणाम होता है।

  30. राजा के विरूद्ध विद्रोह धर्म के अनुसार एक पाप है।

  31. देशभक्त अक्सर लोगों की नजरों में पागल होते हैं।

  32. वैसे तो सूर्य विश्व में मौजूद प्रत्येक देश की सीमा पर निकलता है, लेकिन जब वह भारत देश में उगता है। तो भारत की भांति कोई देश स्वतंत्र, खुशहाल और प्यारा नहीं दिखता है।

  33. अंहिसा को सदैव ही आत्मबल के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। साथ ही आत्मबल को शारीरिक बल से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

  34. बूढ़े आदमी कभी सुधार नहीं किया करते हैं क्योंकि वह बुद्धिमान होते हैं। सुधारों को युवकों के साहस, परिश्रम, निष्ठा और बलिदान की आवश्यकता होती है।

  35. मैं कभी भी नौजवानों को बम और पिस्तौल उठाने को नहीं कहता हूं लेकिन विद्याथियों के कंधों पर समस्त समाज के विकास का कार्यभार है।

  36. जब तक शक्तिशाली लोग भारत की जनता को उनका हक नहीं लौटा देते हैं। तब तक यह लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।

  37. मैं कोई आतंककारी नहीं हूं बल्कि मैं एक क्रांतिकारी हूं।

  38. हमारा उद्धेश्य शासन शक्ति को उन व्यक्तियों के हाथों में सौंपना है जोकि समाजवाद के समर्थक हो।

  39. क्रांति से मेरा मानना है कि मैं समाज की वर्तमान प्रणाली को पूरी तरीके से उखाड़ फेंकना चाहता हूं।

  40. जिस प्रकार से एक कपड़ा बदलकर व्यक्ति दूसरे धारण करता है। ठीक उसी प्रकार से, मृत्यु भी है। जिससे ना मैं डरूंगा और ना ही भागूंगा।

इस प्रकार, इस लेख के माध्यम से आपने भारतीय क्रांतिकारी भगत सिंह के विचारों को जाना। जिन्होंने आपको अवश्य ही आकर्षित किया होगा।

इसके साथ ही हमारा आर्टिकल – Bhagat Singh Quotes in Hindi समाप्त होता है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य कई जीवनी पढ़ने के लिए हमारी केटेगरी – जीवनी को चैक करें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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