Chanakya Neeti Quotes in Hindi | चाणक्य नीति की उद्धृतियाँ

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Chanakya Neeti Quotes in Hindi

आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य जो कौटिल्य के नाम से भी जाने जाते हैं, मगध राज्य अथवा मौर्य साम्राज्य के
राज गुरु थे। उन्होंने महान चन्द्रगुप्त मौर्य को मगध का सम्राट बनाने में मुख्य भूमिका निभाई तथा विश्व
सम्राट अशोक का भी मार्गदर्शन किया । उन्होंने सम्राट अशोक को चौबीस भाषाऐं सीखने का निर्देश दिया जोउनके विश्व सम्राट बनने के मार्ग में बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

Chanakya Neeti Quotes in Hindi
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उन्होंने तक्षशिला से शिक्षा प्राप्त की औरआगे चलकर तक्षशिला में ही आचार्य बने। कौटिल्य कई विषयों के विशेषज्ञ थे, हालाँकि उनके लेखन कार्यों सेपता चलता है कि रासायनिक एवं धातु विज्ञान में उनकी विशेष रुचि थी, परंतु वे राजनीति के सर्वश्रेष्ठजानकार अथवा आचार्य माने गए हैं। वे अध्ययन व शोध कार्य, सोचने की कला, आन्वीक्षिकी, नेतृत्व की कलाइत्यादि, में निपुण थे।

अपने पूर्ण जीवन काल में अर्जित किए गए ज्ञान को उन्होंने दो किताबों द्वारा भविष्यमें आने वाली पीढ़ियों के लिए समर्पित किया- चाणक्य नीति और अर्थशास्त्र। इस निबंध में हम आचार्यचाणक्य की किताब चाणक्य नीति (Chanakya Neeti Quotes in Hindi) के महत्त्वपूर्ण उपदेशों की बात करेंगें तथा उन्हें समझने का प्रयास करेंगें।

Chanakya Neeti Quotes in Hindi

Chanakya Neeti Quotes in Hindi
Chanakya Neeti Quotes in Hindi
  1. चाणक्य कहते हैं कि परिवार से अत्यधिक लगाव व्यक्ति के लिए डर एवं कष्ट का कारण बनता है, क्योंकि मोह ही दु:ख-शोक आदि का मूल कारण बनता है। अतः सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए मनुष्य को हर प्रकार का मोह त्याग देना चाहिए।

  2. समझदार व्यक्ति अपनी योजनाओं को गोपनीय रखता है। अपने रहस्यों व योजनाओं को औरों के समक्ष प्रकट करना व्यक्ति के विनाश का कारण बनता है।

  3. ऐसा व्यक्ति जो अपने लक्ष्यों को तय नहीं कर पाता उसका पराजित होना निश्चित है।

  4. ऐसे व्यक्ति से सदैव बचना चाहिए जो मुँह पर मीठी बाँतें करता हो और पीठ-पीछे आपके विनाश की कामना करता हो क्योंकि ऐसा व्यक्ति उस विष के पात्र की भाँति है जो ऊपर से दुग्ध से ढँका हो।

  5. व्यक्ति को बहुत अधिक ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष सबसे पहले काटे जाते हैं।

  6. विष-रहित सर्प को भी अपनी प्रतिष्ठा का बचाव करने हेतु विषैला होने का कृत्य करना चाहिए।

  7. कोई भी कार्य आरंभ करने से पूर्व स्वयं से तीन प्रश्न पूछिए, “हम यह कार्य क्यों कर रहे हैं”, “इस कार्य के क्या परिणाम होंगे”, “क्या हम यह कार्य कर पाने के योग्य हैं”। ध्यानपूर्वक विचार कीजिए एवं इन प्रश्नों के उत्तर मिल जाने पर ही कार्य प्रारंभ करें।

  8. जिस प्रकार दर्पण व्यक्ति के चहरे का प्रतिबिंब दिखाता है, उसी प्रकार व्यक्ति के मित्र तथा उसकी संगति उसके व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होते हैं। अतः व्यक्ति को सोच-समझकर ही मित्रता करनी चाहिए। व्यक्ति के मित्र उसकी आंतरिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

  9. व्यक्ति जन्म से नहीं परंतु कर्मों से महान बनता है। 

  10. शिक्षा सबसे अच्छी दोस्त है। शिक्षित व्यक्ति का हर जगह सम्मान होता है। शिक्षा सुंदरता और यौवन को मात दे सकती है।

  11. ज्ञान व्यवहार में आए बिना खो जाता है; अज्ञानता के कारण मनुष्य खो जाता है; सेनापति के बिना सेना खो जाती है; और पति के बिना स्त्री खो जाती है।

  12. एक बार कोई कार्य आरंभ करने के पश्चात असफलता से न डरें और उस कार्य को छोड़ें नहीं। ईमानदारी से काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं।

  13. जैसे ही भय निकट आता है, उस पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर देना।

  14. ईश्वर मूर्तियों में मौजूद नहीं है। आपकी भावनाएं ही आपका भगवान हैं एवं आपकी आत्मा आपका मंदिर है।

  15. धन, मित्र, पत्नी और राज्य खो जाने पर पुनः प्राप्त किया जा सकता है, किंतु यह शरीर खो जाने पर फिर कभी प्राप्त नहीं हो सकता है।

  16. कभी भी ऐसे लोगों से दोस्ती न करें जो ओहदे में आपसे ऊपर या नीचे हों। ऐसी दोस्ती आपको कभी खुशी नहीं देगी।

  17. पहले पाँच वर्षों के लिए अपने बच्चे के साथ अत्यंत प्रेम का व्यवहार करें। अगले पाँच वर्षों तक उन्हें डाँटें। जब वे सोलह वर्ष के हो जाएँ, तब तक उनके साथ एक मित्र की भाँति व्यवहार करें। बड़े होकर वे आपके सबसे अच्छे मित्र बनेंगे।

  18. विनम्रता आत्म-नियंत्रण के मूल में है।

  19. एक उत्कृष्ट चीज़ जो शेर से सीखी जा सकती है, वह यह है कि मनुष्य जो कुछ भी करने का आशय रखता है उसे पूरे दिल से और कड़ी मेहनत के साथ किया जाना चाहिए।

  20. जिस प्रकार एक मुरझाया हुआ सूखा वृक्ष जलकर पूरे जंगल को जला देता है, उसी प्रकार एक दुष्ट पुत्र पूरे परिवार को नष्ट कर देता है।

  21. वाणी, मन, तथा इंद्रियों की पवित्रता, और करुणामय हृदय की आवश्यकता उस व्यक्ति को होती है जो दिव्यता की ओर बढ़ने की इच्छा रखता है।

  22. फूलों की सुगंध सिर्फ़ हवा की दिशाओं में ही फैलती है। लेकिन, व्यक्ति की अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।

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  23. हमें अतीत की चिंता नहीं करनी चाहिए और न ही भविष्य की चिंता करनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान के विषय में विचार करते हैं।

  24. जिसका ज्ञान किताबों तक ही सीमित है और धन दूसरों के पास है, वह आवश्यकता पड़ने पर न तो ज्ञान का उपयोग कर सकता है और न ही धन का।

  25. हर दोस्ती के पीछे कोई न कोई स्वार्थ होता है। स्वार्थ के बिना मित्रता नहीं होती। यह कड़वा सच है।

  26. एक अशिक्षित व्यक्ति का जीवन कुत्ते की पूँछ के समान बेकार है जो न तो अपने पिछले सिरे को ढकता है और न ही कीड़ों के काटने से बचाता है।

  27. संतुलित मन के समान कोई तप नहीं है, और संतोष के समान कोई सुख नहीं है; लोभ के समान कोई रोग नहीं है, और दया के समान कोई गुण नहीं है।

  28. जब तक शत्रु की दुर्बलता का पता नहीं चलता, तब तक उसके साथ मित्र की भाँति व्यावहार करना चाहिए।

  29. ऐसे नीच व्यक्ति जो दूसरों के गुप्त दोषों की बात करते हैं, वे स्वयं को उन सर्पों की भाँति नष्ट कर देते हैं जो चींटियों की पहाड़ियों पर भटकते हैं।

  30. आप जिस चीज़ के लायक हैं उससे कम पर कभी भी समझौता न करें। यह अभिमान नहीं, स्वाभिमान है।

  31. अपमान सहकर जीवन की रक्षा करने से मर जाना अच्छा है। जीवन की हानि केवल एक क्षण का दर्द देती है, परंतु अपमान प्रतिदिन पीड़ा का कारण बनता है।

  32. इस पृथ्वी पर तीन रत्न हैं, भोजन, जल और मनभावन वचन- मूर्ख चट्टानों के टुकड़ों को रत्न मानते हैं।

  33. वह जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी स्थिति में चतुराई से निपटने के लिए तैयार है, प्रसन्न रहेंगे, किंतु ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से भाग्य पर निर्भर है, वह नष्ट हो जाता है।

  34. दुष्ट व्यक्तियों या काँटों से निपटने के केवल दो तरीके हैं। या तो उन्हें कुचल दो या फिर उनसे दूर रहो।

  35. अत्यधिक सौन्दर्य सीता के अपहरण का कारण बना, अत्याधिक अहंकार ने रावण को मार डाला और अत्यधिक दान ने राजा बलि को गहरे संकट में डाल दिया। इसलिए अति किसी भी चीज की बुरी होती है।
Chanakya Neeti Quotes in Hindi
Chanakya Neeti Quotes in Hindi

चाणक्य नीति जैसी अद्भुत किताब को पूर्णतः इतने कम शब्दों में पिरोना संभव नहीं परंतु फिर भी अचार्य चाणक्य के महत्वपूर्ण उपदेशों (Chanakya Neeti Quotes in Hindi) को इस निबंध में प्रस्तुत किया गया है। यह उपदेश आज के समय में भी उतने ही कारगर हैं जितने प्राचीन काल में थे।


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