श्रीमद् भागवत गीता के अनमोल विचार – Bhagavad Gita Quotes in Hindi

Gita Quotes in Hindi

श्रीमद् भागवत गीता हिंदुओं के पवित्र धार्मिक ग्रंथों में सर्वोपरि है। इसमें महाभारत के सर्वशक्तिशाली पात्र भगवान श्री कृष्ण और सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन के बीच कुशल संवाद दर्शाया गया हैं। गीता के प्रत्येक श्लोक में मानव जीवन का सम्पूर्ण सार विद्यमान है। यह व्यक्ति को धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।

साथ ही उन्हें अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करती है। इसलिए यह भारतीयों समेत विदेशियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ऐसे में आज हम आपको श्रीमद् भागवत गीता में वर्णित अनमोल विचारों के बारे में बताएंगे। जो अवश्य ही आपको जीवन के कर्तव्य पथ पर बनाए रखने में सक्षम होंगे।

Bhagavad Gita Quotes in Hindi

  1. जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उसी प्रकार निश्चित है, जितना कि मरने वाले के लिए जन्म लेना। इसलिए इस विषय पर शोक मनाना व्यर्थ है।

  2. तुम्हारे साथ जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वो भी अच्छा है और जो होगा वो भी अच्छा होगा।

  3. जीवन का आनंद ना तो भूतकाल में है और ना भविष्यकाल में। बल्कि जीवन तो बस वर्तमान को जीने में है।

  4. अर्जुन तुम भला क्यों रोते हो? तुमने जो खोया, क्या वह तुमने पैदा किया था। आज जो तुम्हारा है वह कल किसी और का होगा। क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।

  5. यदि कोई व्यक्ति विश्वास के साथ इच्छित वस्तु को लेकर नित्य चिंतन करता है, तो वह जो चाहे वह बन सकता है।

  6. कोई भी व्यक्ति अपने विश्वास से बनता है। वह जैसा विश्वास करता है, उसी अनुरूप बन जाता है।

  7. मेरे लिए समस्त प्राणी समान हैं। ना तो कोई मुझे अत्यधिक प्रिय है और ना ही कम। लेकिन जो मेरी भक्ति पूरे मन से करते हैं, मैं सदैव आवश्यकता पड़ने पर उनके काम आता हूं।

  8. जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता है, वह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।

  9. अपना, पराया, छोटा, बड़ा, इत्यादि को भूलकर यह जानो कि यह सब तुम्हारा है और तुम प्रति एक के हो।

  10. जो व्यक्ति क्रोध करता है, उसके मन में भ्रम पैदा होता है, जिससे उसका बौद्धिक तर्क नष्ट हो जाता है। और तभी व्यक्ति का धीरे धीरे पतन होने लगता है।

  11. इस सम्पूर्ण संसार में अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक खराब होती है।

  12. जीवन में सफलता का ताला दो चाबियों से खुलता है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ़ संकल्प। 

  13. कठिन परिश्रम से बचने के लिए व्यक्ति को भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

  14. मनुष्य को अपने कर्मों के अच्छे और बुरे  फल के विषय में सदैव सोचकर चिंता ग्रस्त नहीं होना चाहिए।

  15. जो मनुष्य प्रतिदिन खाने, सोने और आमोद प्रमोद के कार्यों में लिप्त रहता है। वह नियमित तौर पर योगाभ्यास करके समस्त क्लेशों से छुटकारा पा सकता है।

  16. श्रीमद भागवत गीता का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण करना है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सदैव मानव कल्याण की ओर अग्रसरित रहना चाहिए।

  17. व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।

  18. किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।

  19. व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।

  20. इस संसार में विद्यार्थी का उद्देश्य धर्म के अनुसार विद्या ग्रहण करना और सैनिक का कर्तव्य देश की रक्षा करना होना चाहिए। यानि जिस व्यक्ति का जो कर्तव्य है उसे वह पूरा करना चाहिए।

  21. हालांकि मैं भूत, भविष्य और वर्तमान काल के तीनों जीवों को जानता हूं लेकिन मुझे वास्तव में कोई नही जानता है।

  22. मनुष्य जिस रूप में ईश्वर को याद करता है, ईश्वर भी उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं। 

  23. सज्जन व्यक्तियों को सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इन्हीं के पद चिन्हों पर सामान्य व्यक्ति अपने रास्ते चुनता है।

  24. मन अवश्य ही चंचल होता है लेकिन उसे अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से वश में लाया जा सकता है।

  25. इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं।

  26. हे पार्थ! मैंने और तुमने अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए धरती पर कई अवतार लिए हैं। लेकिन मुझे याद है और तुम्हें नहीं।

  27. जो मनुष्य जिस देवता की विश्वास के साथ भक्ति करता है। मैं उस व्यक्ति की उसी देवता में दृढ़ता बढ़ा देता हूं।

  28. जो व्यक्ति मैं और मेरा इत्यादि की भावना से मुक्त हो जाता है, उसे जीवन में शांति की प्राप्ति होती है।

  29. जिस प्रकार से प्राकृतिक मौसम में बदलाव आता है। ठीक उसी प्रकार से, जीवन में भी सुख दुख आता रहता है। वह कभी स्थाई नहीं रहते हैं। 

  30. जो लोग परमात्मा को पाना चाहते है, वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

  31. बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी कामुक सुख में आनंद लेते हैं। वह सदैव मोक्ष की प्राप्ति में लगे रहते हैं।

  32. सम्पूर्ण संसार में जब अधर्म और पाप बढ़ता है, तो मैं धर्म की पुनः स्थापना के लिए धरती पर अवतार लेता हूं।

  33. जो व्यक्ति मृत्यु के दौरान मेरा नाम लेता है। वह सदैव मेरे ही धाम को प्राप्त होता है। इसमें कोई शक नही है।

  34. परिवर्तन ही इस सम्पूर्ण संसार का नियम है। इसलिए व्यक्ति को कभी अपने वर्तमान पर घमंड नहीं करना चाहिए।

  35. मनुष्य का सम्पूर्ण शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है, अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी। और अंत में उसके शरीर को इन्हीं पंचतत्वों में ही विलीन हो जाना है।

  36. व्यक्ति को अपने आप को सदैव ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए। तभी वह दुखों, चिंता और परेशानियों से मुक्त रह सकता है।

  37. तुम बिना किसी कारण के चिंता करते हो और बेवजह ही घबराते हो? तुम तो आत्मा हो। जिसे ना तो कोई मार सकता है और ना ही जला सकता है। यही जीवन की सच्चाई है। जिसे प्रत्येक व्यक्ति को जानना चाहिए।

  38. भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं इस संसार की सुगंध हूं, अग्नि की ऊष्मा हूं और समस्त जीवित प्राणियों का आत्म संयम हूं।

  39. जैसे अंधेरे में प्रकाश की ज्योति जगमगाती है। ठीक उसी प्रकार से सत्य की चमक भी कभी फीकी नही पड़ती। इसलिए व्यक्ति को सदैव सत्य बोलना चाहिए।

  40. आप कितने भी अच्छे कर्म कर लो, लेकिन समाज आपके बुरे कार्यों को ही सदैव याद रखता है।इसलिए लोग क्या कहेंगे यह सोचने से बेहतर है कि आप अपना कर्म करें।

इस प्रकार, उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा लेख – Bhagavad Gita Quotes in Hindi पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य प्रेरक लेख पढ़ने के लिए Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।  


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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