अनमोल वचन | Anmol Vachan in Hindi

येषा न विद्या न तपो न दांन ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म: ।
ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्य रूपेण मृगाश्चरन्ति ।।


भावार्थ – यदि मनुष्य के पास विद्या, तप, सदाचार, शील, ज्ञान, धर्म इत्यादि गुण नहीं हैं तो इस धरती पर वह बोझ से अधिक कुछ नहीं है। ऐसे मनुष्य को जन्म तो इंसान का मिला होता है लेकिन वह इस धरती पर पशु समान ही होते हैं। उनके जीवन का कोई अर्थ नहीं होता है।

ठीक उसी प्रकार से, मनुष्य के जीवन में नैतिक संस्कारों का होना अति आवश्यक है। जिससे उसे इस समाज में पहचान मिलती है। साथ ही नैतिक संस्कारों के बल पर ही समाज उसे संस्कारवान कहता है। ऐसे में आज हम आपके लिए नैतिक शिक्षा से जुड़े कुछ सुविचार लाए है। जिन्हें अपने आचरण में उतारने से आप अवश्य ही इस समाज के सुसंस्कृत और सभ्य नागरिक कहलाएंगे।

  1. अपने जीवन में आप हर किसी को खुश नहीं रख सकते तो ऐसा कोई कार्य भी मत करो, जिससे किसी को दुख पहुंचे।

  2. यदि कोई व्यक्ति आपके पीठ पीछे आपकी बातें लोगों से करता फिरता है तो आपको दुखी नहीं होना चाहिए। अक्सर पीठ पीछे बातें उन्हीं की होती है जिनमें कोई बात होती है।

  3. मनुष्य को सदैव सत्य, संयमित और कम बोलना चाहिए। ऐसे ही व्यक्ति को हर जगह सम्मान मिलता है।

  4. जो व्यक्ति बिना परेशानी और संघर्ष के मंजिल पा लेता है। उसकी जिंदगी अनुभवहीन रह जाती है।

  5. खुशहाल व्यक्ति से ईश्वर भी खुश रहते हैं इसलिए परिस्थिति चाहे जैसी हो। व्यक्ति को सदैव ही खुश रहना चाहिए।

  6. मनुष्य के पास यदि हर विषय का थोड़ा थोड़ा ज्ञान है तो वह कभी उस व्यक्ति से श्रेष्ठ नहीं हो सकता, जिसके पास एक विषय का सम्पूर्ण ज्ञान होता है।

  7. जिस प्रकार से चाहे आप कितना भी प्रयत्न कर लो, वृक्ष समय से पहले कभी फल नहीं देते। ठीक उसी प्रकार से किसी भी कार्य का फल तुरंत ही नहीं प्राप्त होता है इसलिए मनुष्य को सदैव संयम बरतना चाहिए।

  8. यदि आप सदैव छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान होते रहोगे तो जीवन में कभी बड़ी उपलब्धियां हासिल नहीं कर पाओगे।

  9. जो व्यक्ति अपने मां बाप की इज्जत नहीं करता है, उसके किसी भी कार्य में उसे सफ़लता प्राप्त नहीं होती है।

  10. इंसान को अपनी कमजोरियां और परेशानियों का जिक्र हर किसी के सामने नहीं करना चाहिए क्योंकि जमाने में खुली तिजोरियों को हर कोई लूटकर ले जाया करता है।

  11. व्यक्ति को यदि कोई काम किसी की पहचान से मिलता है तो उसका अधिक समय तक मोल नहीं रहता। ठीक उसी प्रकार से काम से मिली पहचान सदैव जीवित रहती है।

  12. जो व्यक्ति अपनी मेहनत और समय का सदुपयोग करता है। वह जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता।

  13. किसी इंसान के सामने सिर्फ उतना ही झुको जितना जरूरी लगे। यदि आप अधिक झुकोगे तो दुनिया आपको सीढ़ी बनाकर आगे निकल जाएगी।

  14. इंसान को अपने जीवन में खतरा मोल लेने से कभी नहीं डरना चाहिए। खतरा लेकर या तो जीत मिलेगी या हार। यदि हार मिली तो हमेशा पहले से बेहतर करने की प्रेरणा मिल जाएगी।

  15. मनुष्य का शरीर जितना घूमता है वह उतना ही तंदुरुस्त रहता है। ठीक इसके विपरीत मन जितना स्थिर रहता है वह उतना ही स्वस्थ रहता है।

  16. जैसे दीपक में रोशन होता प्रकाश उसके बारे में बताता है, ठीक उसी प्रकार से व्यक्ति के कर्म उसके व्यक्तित्व के बारे में परिचय देते हैं।

  17. अक्सर हम ईश्वर से वह चाहते हैं, जो हमें चाहिए होता है लेकिन ईश्वर हमें वह देता है जो हमारे लिए अच्छा होता है।

  18. कोई मनुष्य बड़ा आदमी बन भी गया तो क्या हुआ। यहां अच्छा आदमी बनना अधिक महत्वपूर्ण है।

  19. इंसान सोचता रहता है कि काश पैसा होता तो मैं ये कर सकता था। पैसा सोचता है काश तू ऐसा कर सकता तो मैं आज तेरे पास होता।

  20. जो व्यक्ति अपने जीवन में बैठे बैठे बस ख्याली पुलाव पकाता रहता है, उसे कभी सफ़लता प्राप्त नहीं होती है।

  21. कोई व्यक्ति यदि हारकर भी मुस्कुराता है तो सामने वाले की जीत से अधिक शोर उसकी हार का होता है।

  22. जीवन में ठोकरें लगना भी जरूरी है, उसके बिना आपको अपनों का पता नहीं लगता है।

  23. अच्छा काम करने के बावजूद आपको प्रशंसा नहीं मिल रही हो लेकिन आपको अच्छा काम करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

  24. दुनिया में आपको चारों ओर सब कुछ ग़लत तभी लगता है जब आप गलत का विरोध करना भूल जाते हैं।

  25. आपके रिश्तेदार, दोस्त और आपके चाहने वाले यह तो चाहेंगे कि आप सफल हो लेकिन उनसे अधिक नहीं।

  26. हर कोई जीवन में सफ़लता प्राप्त करना चाहता है लेकिन उसके लिए प्रयत्न कम ही लोग कर पाते हैं।

  27. जो व्यक्ति अपनी गलतियों पर पर्दा डालता है, वह कभी तरक्की नहीं कर सकता। इसके विपरित जो व्यक्ति गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ता है, वह अपने जीवन में सफल हो जाता है।

  28. मनुष्य यदि कुछ करने की ठान ले तो वह अवश्य ही उस कार्य को पूरा कर सकता है।

  29. प्रत्येक व्यक्ति में कोई ना कोई हुनर जरूर छुपा होता है और जो व्यक्ति उसे पहचान लेता है। वहीं जीवन में उच्च पद हासिल करता है।

  30. अगर आप जीवन में सफलता चाहते हैं तो उसके लिए जरूरी नहीं। किसी नए कार्य को शुरू किया जाए बल्कि किसी कार्य को नए ढंग से भी किया जा सकता है।

  31. हर व्यक्ति को अपने जीवन में इतना खुश रहना चाहिए कि जो भी उससे मिले वह खुश हो जाए।

  32. वही मनुष्य अपने भविष्य को सुंदर बना सकता है जो अपने सपनों पर विश्वास रखता है।

  33. यदि कोई मनुष्य सफल होने के लिए संकल्पबद्ध हो जाए तो उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।

  34. यदि आप किसी असंभव कार्य को संभव कर दिखाना चाहते हो तो सबसे पहले अपने लक्ष्य को स्थापित करो।

  35. यदि आप सोचते हो कि आप साहसी हो, प्रतिभाशाली हो और कुछ कर पाने में सक्षम हो तो आप सही रास्ते पर हो।

  36. जिस व्यक्ति के मन में हार का भय होगा वह निश्चय ही जीवन में सफलता प्राप्त करेगा।

  37. जो लोग सदैव गिरकर उठना सीख जाते हैं। असल में वहीं व्यक्ति जीवन जीना जानते है।

  38. यदि आप बिना रुके अपने उद्देश्य की ओर बढ़ रहे हैं तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि आप कब तक वहां तक पहुंच पाते हैं।

  39. मनुष्य को यदि कुछ पसंद नहीं आता तो उसे बदल देना चाहिए परन्तु यदि आप नहीं बदल सकते तो आपको अपना नजरिया बदल लेना चाहिए।

  40. यदि आप अपने दिमाग को सकारात्मक चीज़ों से भरना शुरू कर देंगे, तभी से यह आपका जीवन बदल देगा।

  41. मनुष्य को हर कार्य उचित समय पर संपन्न करना चाहिए क्योंकि समय और समुन्द्र की लहरें किसी का इंतज़ार नहीं करती।

  42. जैसे कुत्ते को रोटी डालकर उसका भोंकना बंद किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार से बुरे व्यक्ति के साथ भी अच्छे से पेश आया जा सकता है।

  43. जो मनुष्य जन्म और मृत्यु के भय से परे हैं, असल में ऐसे ही व्यक्ति कभी उत्साह और शोक में धैर्य नहीं खोते हैं।

  44. यदि ईश्वर से कुछ पाना चाहते हो तो प्रयत्नशील रहना होगा। खुदा देने के लिए दोनों हाथ फैलाए बैठा है।

  45. जिस तरह से किसी किसी गहरी नदी का प्रवाह शांत और गंभीर होता है। ठीक उसी प्रकार से सज्जन व्यक्ति भी हर जगह मौन का परिचय देते हैं।

  46. इंसान को सदैव अपनी आय के अनुसार ही खर्च करना चाहिए क्योंकि यदि कुबेर भी अपने भंडार से अधिक खर्च करते हैं तो निर्धन हो जाते हैं।

  47. जो कार्य अपने कल अधूरा छोड़ दिया था। असल में इस संसार का सबसे जरूरी कार्य वहीं था।

  48. हार मानकर बैठने से अच्छा है आगे बढ़ना। ईश्वर जहां एक रास्ता बंद करते है तो कई और रास्ते खोल दिया करते हैं।

  49. मनुष्य की इच्छाओं का पेट कभी नहीं भरता है। दूसरी ओर सभी मूल दुखों का कारण इच्छा ही है।

  50. जैसे एक गुणकारी व्यक्ति की तलाश एक जौहरी को होती है। ठीक उसी प्रकार से एक गुणवान व्यक्ति ही दूसरों के गुणों की पहचान कर सकता है।


इस प्रकार हमने सर्वश्रेष्ठ विचारों के माध्यम से आपके नैतिक जीवन को उन्नत बनाने का प्रयास किया है। इसी प्रकार के सकारात्मक विचारों को पढ़ने के लिए Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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