Suvichar in Hindi – महापुरुषों के सुविचार

Suvichar

हमारे समाज में कई सारे ऐसे उदाहरण मौजूद है। जिनका जीवन  दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है और उनके द्वारा प्रेषित किए गए विचार समय समय पर समाज को दिशा निर्देश देते रहते हैं। ऐसे में आज हम ऐसे ही प्रेरक व्यक्तियों के महान विचार आपके लिए लाए हैं, जिसे पढ़कर आप अपने जीवन में उत्साहित हो सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद के सुविचार – Swami Vivekanand Suvichar

  1. हम दूसरों के साथ जितना अच्छा करते हैं, उतना ही हमारा हृदय पवित्र हो जाता है। स्वयं भगवान उस व्यक्ति में बसते हैं।

  2. कोई मनुष्य जितना भीतर से प्रेम, दया और करुणा से भरा होगा, उसे समस्त संसार वैसा ही दिखेगा।

  3. जैसा आप सोचोगे, आप वैसे ही बन जाओगे। ऐसे में यदि आप खुद को कमजोर मानते हो तो कमजोर बन जाओगे। यदि मजबूती से सोचोगे तो मजबूत बन जाओगे।

  4. आप जिस काम को करने की प्रतिज्ञा लेते हो, उस कार्य को तभी संपन्न करो। अन्यथा लोगों का तुम पर से विश्वास उठ जाएगा।

  5. इंसान को दिन में कम से कम एक बार स्वयं से बात करनी चाहिए। ताकि वह एक विशेष व्यक्ति से बैठक करना ना भूल जाए।

  6. मनुष्य को ऐसी शिक्षा की जरूरत है, जिससे उसके चरित्र का विकास हो, बुद्धि विकसित हो और व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सके।

  7. व्यक्ति को एक वक्त पर एक ही कार्य को सम्पन्न करना चाहिए। ऐसे में उसे अपनी सम्पूर्ण ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए और बाकी सब भूल जाना चाहिए।

  8. सदैव परिश्रम करना ही व्यक्ति का सच्चा साथी है। ऐसे में व्यक्ति को अपने श्रम को सही जगह इस्तेमाल करना चाहिए। वरना अपराधी द्वारा किया गया श्रम मानव समाज को दूषित करने के काम आता है।

  9. व्यक्ति को सत्य वचन बिना डरे सबके सामने रखने चाहिए। हालांकि इससे किसी को दुख भी पहुंच सकता है। लेकिन आपको इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए।

  10. यदि कोई व्यक्ति आपको गाली दे तो आपको आशीर्वाद समझकर सुन लेना चाहिए। साथ ही यह समझना चाहिए कि एक व्यक्ति तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालने में कैसे तुम्हारी मदद कर रहा है।


महात्मा गांधी के सुविचार – Mahatma Gandhi Suvichar

  1. यदि आप अपने अस्तित्व की तलाश में हो, तो उसका सबसे अच्छा उपाय है। खुद को दूसरों की सेवा में लगा लो।

  2. सामने वाला व्यक्ति कभी भी आपके आत्मसम्मान को चोट नहीं पहुंचा सकता। जब तक आप स्वयं उसे यह मौका नहीं देते हैं।

  3. यदि आप किसी देश की तरक्की का अंदाजा लगाना चाहते हैं, तो वहां रहने वाले पशुओं के साथ होने वाले व्यवहार से इसका अंदाजा लगा सकते हैं।

  4. मनुष्य को अपने मन को मंदिर मानना चाहिए। जिसमें किसी को गंदे पांव यानि दूषित विचारों के साथ प्रवेश की अनुमति ना हो।

  5. मनुष्य को जीवन में असली खुशी तभी मिलती है। जब वह जो कहता है और जो करता है। उनमें समानता होती है।

  6. कभी भी मानव को मानव जाति से विश्वास नहीं खोना चाहिए। जैसे यदि किसी सागर की कुछ बूंदे खराब हो जाने से सम्पूर्ण सागर गंदा नहीं होता। ठीक उसी प्रकार से मानवता है। किसी एक व्यक्ति के बुरा करने से सभी मानवों को दोष देना उचित नहीं है।

  7. यदि कोई मनुष्य अपनी ग़लती को स्वीकार कर लेता है। तो इसका तात्पर्य यह होता है कि उसने अपनी सतह को झाड़ू लगाकर साफ बना लिया है।

  8. सच्ची भक्ति के लिए केवल मन की शुद्धता ही नहीं चाहिए। बल्कि आंखों और कानों का भी एकाग्रचित होना आवश्यक होता है।

  9. जो मनुष्य सदैव स्वतंत्रता के बारे में विचार करे, वह कभी किसी दूसरे व्यक्ति को अपना गुलाम बनाने की नहीं सोचता है।

  10. यदि आपको लगता है कि उपुक्त संस्कृति मानव जाति के विनाश का कारण है। तो उस संस्कृति से जुड़ी किताबें जलाने से क्या होगा? इससे अच्छा लोग उसे पढ़ना बंद कर दें।


सुभाष चन्द्र बोस के सुविचार – Subhas Chandra Bose Suvichar

  1. हमें सदैव अपनी स्वतंत्रता के लिए खून बहाना चाहिए। ताकि जो आज़ादी हमें अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से मिली हो, बाद में हमारे अंदर इतनी सामर्थ्य हो कि हम उसकी रक्षा कर सकें।

  2. यदि देश की मुख्य समस्याओं जैसे गरीबी, अशिक्षा और बीमारी का त्वरित समाधान चाहते हैं, तो इसका उपाय सिर्फ समाजवाद से ही हल हो सकता है।

  3. अगर जीवन में शहद का अभाव हो तो मनुष्य को गुड़ से ही कार्य चला लेना चाहिए।

  4. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपमें जन्म से कोई प्रतिभा नहीं है। तो कभी भी कठोर परिश्रम से जी ना चुराएं।

  5. आपकी राह में कितने ही रोढ़े क्यों ना आए, चाहे कितने भी परेशानियां आ जाएं। आपको सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए क्योंकि सफलता मिलने में देरी हो सकती है पर एक दिन मिलती जरूर है।

  6. मैंने अपनी जिंदगी में कभी किसी की खुशामद नहीं की है। अक्सर दूसरों को जो बातें अच्छी लगती हैं, वह मैं नहीं करता हूं।

  7. इस दुनिया में केवल मां ही एक ऐसा रिश्ता है, जिसका प्रेम स्वर्थरहित होता है। साथ ही ऐसा कोई तराजू मौजूद नहीं, जिससे मां के प्रेम को नापा जा सके।

  8. मनुष्य सिर्फ अपने किए हुए और किए जाने वाले कर्म पर अधिकार जमा सकता है। लेकिन उसका परिणाम क्या होगा, यह निर्धारित करना ईश्वर के हाथ में है।

  9. मनुष्य को अपने जीवन के अनुभवों से सदैव सीखना चाहिए। ताकि उसे अपने दुखों से उबरने के लिए कोई ना कोई आशा की उम्मीद जरूर मिलती रहे।

  10. यदि कोई मनुष्य, वृक्ष आदि समय से पहले ही परिपक्व हो जाते हैं तो उन्हें आगे चलकर नुकसान उठाना पड़ता है।


राजा राम मोहन राय के सुविचार – Raja Ram Mohan Roy Suvichar

  1. यदि मनुष्य ऐसा सोचता है कि नदी में स्नान करने से, पीपल की पूजा करने से और पंडितों को दान पुण्य करके वह अपने बुरे कर्मों से निजात पा सकता है। तो वह व्यक्ति अंधविश्वास के अंधकार में डूबा हुआ है।

  2. यदि आप चाहते है कि समाज का पिछड़ा वर्ग आगे बढ़े। तो समाचार पत्रों का प्रचार प्रसार उन तक पहुंचा देना चाहिए, ताकि वह जागरूक हो सकें।

  3. अगर मानव जाति को अपना उत्थान करना है तो उसे किसी के द्वारा बताए गए विचारों का अनुसरण ना करके अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।

  4. समाज में साधारण दिखने वाले लोग ही बदलाव के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में भगवान भी उनके निर्माण से बहुत लोगों तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचाते हैं।

  5. आपको लगता है कि किसी धार्मिक ग्रंथ को पढ़ने के बाद व्यक्ति अपनी जाति, धर्म से मोह त्याग देता है। तो आपको गलत लगता है क्योंकि मैंने तो कई बार कुरान शरीफ और बाइबिल पढ़ी है, लेकिन मैं
    अब तक हिन्दू हूं।

  6. प्रत्येक समाज में स्त्री को पुरुषों के बराबर ही अधिकार प्राप्त होने चाहिए और स्त्रियों का सम्मान करना चाहिए। स्त्री ही पुरुष की जननी है।

  7. जो व्यक्ति जीवन में मोक्ष की प्राप्ति करना चाहता है। उसे पाप कर्म का त्याग करके सदैव प्रायश्चित करना चाहिए।

  8. देश और समाज में मौजूद सभी भाषाओं में हिंदी एक ऐसी भाषा है। जोकि अखिल भारतीय भाषा बनने की क्षमता रखती है।

  9. यदि मनुष्य वास्तव में पूजा करके ईश्वर को प्रसन्न करना चाहता है। तो उसे धार्मिक कर्मकांडो की जगह आत्मा की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए।

  10. मैं हिन्दू होकर हिन्दू समाज का विरोध इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे उसमें व्याप्त कुरीतियों से परेशानी है।


डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के सुविचार – A P J Abdul Kalam Suvichar

  1. कोई भी मनुष्य सफ़लता हासिल कर सकता है, यदि वह एक महान् लक्ष्य बनाएं, ज्ञान प्राप्त करें, कड़ी मेहनत करें और लक्ष्य को पाने के लिए अडिग रहे।

  2. यदि किसी मनुष्य के जीवन में किसी प्रकार की कठिनाइयां नहीं है। तो वह कभी भी सफ़लता का स्वाद नहीं चख सकता।

  3. कोई मनुष्य यदि सफल होने के लिए कोई कार्य करता है, तो उसे अपने  काम पर एकाग्र होकर ध्यान लगाना चाहिए।

  4. वर्तमान युवाओं को लेकर मेरा सदैव यही संदेश रहेगा कि वह सदैव कुछ अच्छा करने के लिए रास्ता बनाए, कुछ अलग करें और दुर्गम कार्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़े।

  5. कभी जीवन में आपको ऐसा लगे कि आप अकेले हो। तो आसमान की ओर देखना, आप पाओगे कि आप अकेले नहीं हो बल्कि पूरा ब्रह्माण्ड आपके साथ है।

  6. समाज से बेरोजगारी का अभिशाप मिटाना है तो देश के युवाओं को जॉब सीकर्स से अच्छा जॉब जनरेटर्स बनाना होगा।

  7. यदि आप एक सफल विद्यार्थी बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको प्रश्न पूछने की आदत डालनी होगी।

  8. यदि आप पूरे दिल से समर्पित होकर काम नहीं करते हैं तो आपको मिली सफ़लता आस पास कड़वाहट का माहौल पैदा कर देती है।

  9. शिक्षक होना मेरे लिए गर्व की बात है। क्योंकि शिक्षण ही ऐसा कार्य है जो किसी के व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य को आकार देने का काम करता है।

  10. जो व्यक्ति कृत्रिम और आभासी सुख को लेकर उत्साहित रहते है, वह कभी जीवन में ठोस उपलब्धियां प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

इस प्रकार हमने उन समस्त लोगों के विचारों को पढ़ा। जिन्होंने देश और समाज में अपने कार्यों और विचारों से एक नया आयाम स्थापित किया। साथ ही उनके द्वारा स्थापित किए गए उदाहरणों और समाज सुधार के कार्यों और महान विचारों के लिए समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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