सद्गुरु के विचार – Sadhguru Quotes in Hindi

“सद्गुरु” के तौर पर प्रख्यात जग्गी वासुदेव का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वह एक महान लेखक होने के साथ-साथ योग गुरु भी हैं। इनके द्वारा संचालित ईशा फाउंडेशन पर्यावरण और समाज सेवा के कार्यों में प्रमुख रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जिसके लिए इन्हें भारत सरकार से पदम विभूषण भी प्राप्त हो चुका है। ऐसे में आज हम आपको सद्गुरु के महान विचारों से रूबरू कराने जा रहे हैं। जिनके विचारों को पढ़ने के बाद आपका भी जीवन को देखने का नजरिया अवश्य बदल जाएगा।

”सद्गुरु” के महान विचारों (Sadhguru quotes in hindi) को जानने से पहले चलिए जान लेते हैं सद्गुरु के जीवन के बारे में।


सद्गुरु का जीवन परिचय | Sadhguru Biography in Hindi

5 सितंबर 1957 को कर्नाटक के मैसूर में जग्गी वासुदेव यानि सद्गुरु का जन्म एक तेलगु परिवार में हुआ था। इनके पिता जी एक डॉक्टर थे। बचपन से ही इनको प्रकृति से बहुत लगाव था। इनकी पत्नी का नाम विजया कुमारी है।

इन्होंने मानव जाति की सेवा के लिए वर्ष 1992 में तमिलनाडु राज्य में ईशा फाउंडेशन की स्थापना की थी। जोकि योग शिक्षा, पर्यावरण और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत है। “सद्गुरु” जग्गी वासुदेव केवल भारत के लोगों को ही नहीं अपितु विदेशों में भी योग और अध्यात्म की शिक्षा दे रहे हैं।

इसलिए इनके नाम के आगे सद्गुरु लगाया जाता है। इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनके द्वारा करीब 4 अलग अलग भाषाओं में 100 से ज्यादा किताबों का लेखन किया गया है।
तो चलिए अब जानते हैं इनके महान् विचारों के बारे में…..


सद्गुरु के महान विचार – Sadhguru Quotes in Hindi

1. ध्यान मानव द्वारा अपने अस्तित्व की खूबसूरती को जानने का एक तरीका है।


2. ध्यान कोई कार्य नहीं है बल्कि यह एक मानवीय गुण है।


3. जीवन बाहर नही है बल्कि आप स्वयं जीवन हैं।


4. व्यक्ति की अधिकतर इच्छाएं उसकी अपनी नहीं होती है, बल्कि वह उन्हें बाहरी सामाजिक परिवेश से ग्रहण कर लेता है।

5. आध्यात्मिक से तात्पर्य क्रमिक विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।


6.  जब किसी व्यक्ति का मन पूरी तरह से स्थिर हो जाता है, तब समझिए उसकी बुद्धि मानवीय सीमाओं को पार कर लेती है।


7. ध्यान करने के दौरान जब आपको यह अहसास होता है कि आपकी सीमाएं सब आपके द्वारा बनाई गई हैं। तब आपके भीतर उन्हें तोड़ने की चाहत भी पनपती है।


8. जब आपका सामना परिस्थितियों से होता है, तब आपको जो उत्तम लगे उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। तब सीखना आपके जीवन की प्रक्रिया बन जाती है।


9. ध्यान से केवल आप ही जीवन में नही मुस्कुराते हैं, बल्कि ध्यान से ऐसी शक्ति विकसित करें कि आपकी हड्डियां भी मुस्कुराने लगें।

10. व्यक्ति को खुशी, दुःख और चिंता का अनुभव भीतर से ही होता है। इसलिए कम से कम इन सबको आपके मुताबिक ही जन्म लेने दीजिए।


11. लोग कहते हैं कि किसी भी काम को पूरी मेहनत से करो। मैं कहता हूं किसी भी काम को प्रेम और लगन से पूरा करो।

12. प्रत्येक युवा को यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि जल्दी जीवन जीने की कोशिश ना करें। जिंदगी जीना का समय आने दीजिए। और अगर आप बेहतर तरीके से जीना चाहते हैं तो स्वयं को पूर्ण रूप से विकसित कीजिए।


13. व्यक्ति को अपना जीवन सही और गलत निर्णय लेने में व्यर्थ नहीं गंवाना चहिए। बल्कि जब आप स्पष्ट, संतुलित और खुश हों। तब आप कोई निर्णय लें, इसके बाद अपना सारा जीवन उसमें लगा दीजिए। इससे आपके जीवन में कुछ ना कुछ शानदार जरूर होगा।

14. कर्म का तात्पर्य किस्मत के भरोसे बैठे रहना नहीं है। बल्कि कर्म का मतलब होता है अपनी किस्मत का मालिक बनने से।


15. जीवन समस्या नही एक प्रक्रिया है, जिसे जीने के लिए आपने खुद को तैयार किया है या नहीं।

16. एक चींटी को बने वाले ने उस पर उतना ही ध्यान दिया है, जितना उसने मानव को बनाने में दिया है।


17. अगर आप जीवन में सांत्वना पाना चाहते हैं तो मान्यताएं और विश्वास की तमाम प्रणालियां आपके लिए ठीक हैं। लेकिन यदि आप समाधान ढूंढना चाहते हैं तो आपको खुद ढूंढना और खोजना होगा।


18. व्यक्ति के मन में ईर्ष्या और जलन की भावना अधूरेपन और अपूर्णता के कारण जन्म लेती हैं। लेकिन यदि आप आनंद में हैं तो आपके मन में कभी ईर्ष्या का भाव नहीं आएगा।

19. बुद्धि जोकि याददाश्त के साधन के तौर पर इस्तेमाल की जाती रूपांतरित नही किया जा सकता है।


20. हर वो मनुष्य जो अस्तित्व की संपूर्णता को सुनता है, उसके लिए सब कुछ संगीत है।


21. आप जीवन में कितने सफल है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का इस्तेमाल किस तरह से करते हैं।


22. प्रत्येक व्यक्ति मानव जाति के कल्याण से अधिक अपने तुच्छ सांसारिक सुखों पर ध्यान देता है। हमें इसी चीज़ में बदलाव करना है।

23. अगर आप सत्य के खोजी है। तो इसका मतलब है कि आप हर उस चीज के बारे में कोई भी कल्पना या धारणा को मानने से इंकार कर देते हैं।


24.कोई व्यक्ति यदि अपने मन और शरीर से वैसा वातावरण बना लेता है, जैसा वह चाहता है। तो उस व्यक्ति को अपनी खुशहाली के विषय में नहीं सोचना चाहिए।


25. जीवन की सुंदरता और भव्यता के विषय में केवल वहीं जानता है, जो हर चीज में पूरी तरीके से शामिल होता है।


26. मानव जीवन में तनाव किसी विशेष परिस्थिति के कारण नहीं होता, बल्कि आप अपने सिस्टम को संभाल पाने में सक्षम नहीं होते हैं, तब ऐसा होता है।


27. एक मानव के रूप में आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि जीवन आपको कहां ले जाएगा। बल्कि सिर्फ ये सोचना चाहिए कि आप अपने जीवन को कहां ले जा सकते हैं।


28. मानव समाज को सभ्य बनाने का मतलब यह है कि हर व्यक्ति बिना दूसरे की जिंदगी में दखलंदाजी किए पूर्ण अभिव्यक्ति पा सके।


29. जीवन में आपका अनुभव कितना है और आप जो कर रहे हैं। उसमें आप कितने असरदार हैं, असल में यही जीवन में मायने रखता है।


30. मनुष्य का शरीर पांच प्रकार के तत्वों से मिलकर बना है:- वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल और आकाश। ऐसे में आपके जीवन की गुणवत्ता इसी बात पर निर्भर करती है कि यह तत्व आपके भीतर कितने शानदार हैं।


31. जिस मनुष्य के पास देखने के लिए दृष्टि है, साथ ही बाहरी और भीतरी जीवन को महसूस करने की संवेदनशीलता है, उसे हर चीज एक चमत्कार लगेगी।


32. जो व्यक्ति परिवर्तन का विरोध करता है, समझिए वह जीवन का विरोध करता है।


33. दुनिया में बहुत से लोग भूखे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव हृदय में प्यार और दुलार की कमी है।


34. जीवन का सबसे खूबसूरत पल वह होता है, जब आप खुशी व्यक्त करते हैं। ना कि जब आप खुशी की खोज में लगे हों।


35. जिस मनुष्य को लगता है कि वह बड़ा है, तब वास्तव में वह छोटा है। और जब कोई व्यक्ति स्वयं को कुछ नही मानता है तब वह अनंत हो जाता है। यहीं सच्चे मानव की सुंदरता है।


36. जब व्यक्ति के मन में कुंठा, निराशा और अवसाद मौजूद होता है। तब समझिए वह व्यक्ति अपने खिलाफ काम कर रहा होता है।


37. अगर आपकी सम्पूर्ण ऊर्जा एक ही लक्ष्य की ओर केंद्रित है, तो ज्ञान आपसे बिल्कुल भी दूर नहीं है। क्योंकि जो आप ढूंढ रहे है, वह पहले से ही आपके भीतर है।


38. कोई गुरु ऐसा नहीं होता जो आपके लिए मशाल पकड़ा हो। बल्कि वह स्वयं एक मशाल होता है।


39. जीवन में अविश्वसनीय चीज़ें आसानी से पूरी की जा सकती हैं, यदि आप उन्हें पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


40. व्यक्ति के मन को केवल कुछ ही याद रहता है, जबकि मानव शरीर को सब कुछ याद रहता है। यह जो जानकारी रखता है, वो मानव अस्तित्व के आरंभ तक बनी रहती है।


41. व्यक्ति एक बीज की भांति है। जिसे या तो आप वैसे ही रख सकते हैं, जैसा वह है। या आप उसे फल और फूलों से लदे वृक्ष के रूप में भी विकसित कर सकते हैं।


42. दूसरे व्यक्ति से आशा रखने का मतलब है कि आप उनकी जिंदगी ठीक करने की कोशिश में लगे हुए हैं। ऐसा करने से बेहतर है कि आप खुद का जीवन बेहतर करें।


43. जीवन का अनुभव तभी गहरा सकता है, कि जब आप किसी चीज से पहचान बनाए बिना स्वयं प्रत्येक चीज़ के प्रति खुला नजरिया अपनाएं।


44. अच्छे लोगों ने दुनिया को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, इसलिए हमें खुशहाल और समझदार व्यक्तियों की जरूरत है।


45. अगर यह दुनिया छोटे बच्चों द्वारा चलाई जाती तो कितना अच्छा होता। क्योंकि वह अन्य की तुलना में जीवन के अत्यधिक नजदीक होते हैं।


46.आत्मज्ञान व्यक्ति के भीतर मौजूद एक बीज है। जो कहीं बाहर से नही आता है, बल्कि आत्मज्ञान एक बोध है।


47. कोई व्यक्ति पीड़ा के भय से सदैव अधूरा जीवन ही जीता है। अगर आपको जीवन में पूर्णता लानी है तो पीड़ा का भय दूर करिए।


48. अगर आप जीवन में तनाव मुक्त होता चाहते हैं तो ध्यान लगाएं। यह मन से परे एक व्यवस्थित आयाम है।


49. योग क्रिया के दौरान यदि आसान ढंग से किए जाएं तो प्रत्येक आसान ऊर्जा की एक नई प्रक्रिया है।


50. जो व्यक्ति जीवन में अनिश्चितता से बचने का प्रयास करते हैं, वह संभावनाओं से भी चूक जाते हैं।
आशा करते हैं कि सद्गुरू महाराज के उपरोक्त विचार आपको अवश्य ही ज्ञानवर्धक लगे होंगे।

इसी प्रकार से ज्ञानवर्धक और प्रेरणदायक विचारों को पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.