Moral Stories in Hindi – नैतिक कहानियाँ

अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के चलते मनुष्य सदैव किसी ना किसी खोज में लगा रहता है। और यदि कोई व्यक्ति किसी माध्यम से खुद को प्रेरित होता देखता है, तो वह उस हर कर्म में सफलता हासिल करता है। जिसके लिए वह लगातार प्रयासरत रहता है।

ऐसे में मानव जीवन में प्रेरक कहानियां भी व्यक्ति को प्रेरित करने के एक माध्यम की भांति है। जिनके लगातार अध्ययन और सुनने मात्र से ही मनुष्य को अपने वास्तविक रूप का एहसास होने लगता है। इसलिए आज हम आपके लिए प्रेरक कहानियों की श्रृंखला लेकर आए हैं, जिसे पढ़कर आप अवश्य ही खुद को उत्साहित महसूस करेंगे।

मुंह से निकले शब्द फिर वापस नहीं आते

एक बार एक किसान की अपने पड़ोसी से किसी बात को लेकर काफी लड़ाई हो गई। और देखते ही देखते लड़ाई इतनी बढ़ गई कि किसान ने अपने पड़ोसी को अपशब्द कहने शुरू कर दिए। हालांकि बाद में किसान को अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन उसके मन में एक अजीब सी उलझन थी। कि कहीं यदि वह अपने व्यवहार के लिए पड़ोसी से माफी मांगेगा तो कहीं बात और ना बढ़ जाए। ऐसे में वह अपनी उलझन का समाधान पाने के लिए एक साधु पास गया। और उनसे बोला बाबा, क्या कोई ऐसा तरीका है। जिससे मैं अपने बोले हुए शब्दों को वापस ले सकूं। जिस पर साधु ने किसान से कहा, कि तुम खूब सारे पंख एकत्रित कर लो। और शहर के बीच जाकर उन्हें रख दो। साधु के काहेनुसार किसान ने ठीक वैसा ही किया। और दुबारा साधु के पास चला गया। तो साधु ने उसे कहा कि अब तुम उन पंखों को वापस ले आओ। जिस पर जब किसान वापस शहर गया, तो उसे वहां एक भी पंख रखा हुआ नहीं मिला। ऐसे में साधु ने उस किसान को समझाया कि ठीक इसी तरीके से, जैसे तुम शब्दों को आसानी से अपने मुख से निकाल तो सकते हो। लेकिन चाह कर भी उन्हें  वापस नहीं ला सकते। इसलिए हमेशा शब्द तोल मोल करके ही बोलने चाहिए।

सच्ची आस्था

एक बार एक व्यक्ति हमेशा की तरह अपनी दाढ़ी मूंछ और बाल कटवाने के लिए नाई की दुकान पर पहुंचा। जहां सब मिलकर कभी राजनीति पर, कभी धर्म को लेकर बातचीत किया करते थे। इतने में ही वहां भगवान का जिक्र होने लगा। तो दुकान के नाई ने तपाक से कहा कि मैं भगवान में विश्वास नहीं रखता। और मुझे लगता है कि ना ही भगवान होते है। तो उस आदमी ने उस नाई से पूछा, भाई तुम ऐसा क्यों कह रहे हो। जिस पर नाई ने कहा, इसलिए क्यूंकि यदि भगवान होते। तो वे अपने बच्चों को यूं अनाथ, बेसहारा और गरीब ना बनाते। तुम चाहो तो दूसरी गली में जाकर देख लो। वहां इस प्रकार के ना जाने कितने ही लोग मिल जाएंगे। नाई की बात सुनकर उस व्यक्ति ने उस समय तो कुछ नहीं कहा लेकिन थोड़ी देर तक वह नाई की दुकान के बाहर खड़े होकर यह सोचता रहा कि आखिर भगवान कहां है। तभी एक लम्बी दाढ़ी मूंछ वाला व्यक्ति मानो उसके सामने से आ रहा था। जिसे देखकर वह व्यक्ति पुनं नाई की दुकान में चला गया। और नाई से कहने लगा। मुझे तो लगता है कि इस दुनिया में नाई तो होते ही नहीं हैं, जिस पर नाई ने तुरंत उत्तर दिया। अरे भाई ! ऐसा क्यों कह रहे हो। मैं तो साक्षात तुम्हारे सामने हूं। जिस पर वह व्यक्ति बोला क्यूंकि यदि दुनिया में नाई होता तो वह सामने से जो व्यक्ति आ रहा है, उसकी इतनी बड़ी दाढ़ी मूंछ नहीं होती। जिस पर नाई ने उस व्यक्ति से कहा भाई वो तो जो हमारे पास आता है हम उसकी मदद करते है। नाई की यह बात सुनकर वह व्यक्ति उससे कहता है, कि हां भाई। ठीक उसी प्रकार से भगवान के पास जो भक्त या बच्चे अपनी समस्या लेकर जाते हैं। या उनका स्मरण करते हैं। तो वे उसका निवारण करते है। और जो नहीं जाते और ईश्वर का ध्यान नहीं करते। ईश्वर उनकी मदद नहीं करते। क्यूंकि ईश्वर भी उनकी मदद करते हैं, जो सबकी मदद करते है। और भगवान हर जगह विघमान है, बस सच्चे दिल से उन्हें याद करने की आवश्यकता है।

अपनों के साथ बिताया समय अनमोल पूंजी है

एक बार एक व्यक्ति ऑफिस से अपने घर वापस लौटा कि तभी उसने देखा कि उसका 5 साल का बेटा उसका इंतजार कर रहा था। वह थका हुआ था, इसलिए घर आते ही कुर्सी पर बैठ गया। और उसका बेटा भी उसके पास आ गया, वह उससे पूछने लगा। पापा आप एक घंटे में कितना कमाते हो। जिस पर वह गुस्से में अपने बेटे से कहता है, कि तुम्हें इन सब बातों से कोई मतलब नहीं होना चाहिए। जिस पर वह जिद करता है, तो वह उसे कहता है। मैं एक घंटे में 100 रुपए कमाता हूं। वो कहता है पापा तो क्या आप मुझे 50 रुपए देंगे? जिस पर वह क्रोधित होकर अपने बेटे से कहता है कि अच्छा मैं इतनी मेहनत से पैसे कमाता हूं, तुम इसलिए मुझसे पूछ रहे थे। क्यूंकि तुम्हें अपने खिलौनों के लिए मुझसे पैसे मांगना चाहते थे। इतना कहकर वो अंदर अपने कमरे में चला जाता है। लेकिन कमरे में जाते ही वह सोचता है, कि शायद उसने अपने बेटे को बेकार में ही डांट दिया। शायद वह किसी और काम के लिए पैसे लेना चाहता हो। जिस पर उसे अपनी गलती का एहसास होता है। और वह अपने बेटे के कमरे में जाता है, और उससे माफी मांगता है। साथ ही कहता है कि तुम्हें 50 रुपए चाहिए थे। और मैंने तुम्हें डांट दिया। जिस पर बच्चे ने अपनी गुल्लक निकाली और बोला पापा मेरे पास पहले से ही 50 रुपए थे। अब वह अपने बच्चे पर फिर से गुस्सा होता है और कहता है कि जब तुम्हारे पास पैसे थे। तो तुमने मुझसे क्यों मांगे। जिस पर बच्चे ने जवाब दिया। पापा मैं ये 100 रुपए इक्कट्ठे करके आपको देना चाहता हूं, ताकि आप अपने ऑफिस से एक घंटा पहले आ सको। क्यूंकि मुझे आपके साथ बैठकर डिनर करना है। बच्चे की बात सुनकर पिता की आंखों में आंसू आ गए। और उसे उस दिन समझ आया कि अपनों के साथ बिताया गया समय दुनिया भर की कमाई सभी पूंजी में सबसे अमूल्य होता है।

माँ एक फरिश्ता

एक बार स्वर्गलोक में भगवान ने एक बच्चे से कहा कि बेटा अब तुम्हारा धरती पर जन्म लेने का समय आ गया है। जिस पर बच्चे ने दुखी होकर कहा कि भगवान सुना है धरती लोक पर लोग अलग तरह की भाषा बोलते हैं, साथ ही वहां मुझे कौन प्यारा संगीत सुनाएगा। और क्या धरती लोक में यहां की तरह शांति का वातावरण होगा? और सुना है कि धरती लोक पर बुराई वास करती है। वहां दुष्टों से मेरी रक्षा कौन करेगा। जिस पर भगवान बच्चे से कहते हैं कि धरती लोक पर मैंने तुम्हारे जन्म से पहले ही एक फरिश्ता भेज दिया है। जो वहां तुम्हारा ध्यान रखेगा। कि तभी बच्चे को एक बच्चे कि किलकारी सुनाई देती है। और वह समझ जाता है कि उसका धरती लोक पर जाने का समय आने वाला है। तभी वह भगवान से पूछता है भगवान अब मेरा धरती लोक पर जाने का समय नजदीक आ चुका है। कृपया करके अब मुझे उस फरिश्ते का नाम बता दीजिए। जिस पर भगवान कहते हैं कि धरती लोक पर जो फरिश्ता तुम्हें हर सुख दुख में साथ रहेगा, और तुम्हें प्रेम करेगा। वह तुम्हारी मां होगी। इस प्रकार मां ही व्यक्ति की जन्म से लेकर अंतिम समय तक सच्ची साथी होती है, उसका सदैव मान रखना चाहिए।

जैसा सोचोगे, वैसा ही पाओगे

एक बार एक लड़का जोकि काफी गरीब परिवार से था। वह नौकरी की तलाश में गांव से शहर ट्रेन से जा रहा था। उसके घर की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी, कि उसके यहां सब्जी भी कभी कभी बनती थी। ऐसे में वह सफर के दौरान अपने साथ सिर्फ रोटियां ही लेकर चला था। ऐसे में यात्रा के दौरान जब उसे भूख लगी, तो वह रोटियां खाने लगा। लेकिन वह कुछ इस प्रकार से टिफिन से निकालकर रोटी खा रहा था। कि मानो दूसरे टिफिन में रोटी का टुकड़ा लेे जाकर फिर उसे चख रहा था। ऐसे में सफर के दौरान जो लोग उसके साथ बैठे थे, वह यह देख कर दंग रह गए। कि यदि इसके पास रोटी से खाने के लिए सब्जी नहीं है, तो यह सब्जी से खाने का दिखावा क्यों कर रहा है। इतने में एक यात्री ने उससे पूछ ही लिया। भाई तुम्हारे पास सब्जी नहीं है, तो तुम क्यों रोटी को दूसरे टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो। जैसे उसमें सब्जी हो। जिस पर वह लड़का बोला कि मैं अपने मन में यह सोच रहा हूं कि मैं रोटी अचार से खा रहा हूं। जिससे मुझे तनिक भी ऐसा नहीं लग रहा कि मैं रूखी रोटी का सेवन कर रहा हूं। उसकी यह बात सुनकर वह व्यक्ति उससे बोला भाई अगर तुम्हें मानना ही है तो तुम शाही पनीर या अन्य कुछ सोचकर क्यों नहीं खा रहे। जैसे मानकर तुम्हें अचार का स्वाद आ रहा, वैसे ही पनीर का स्वाद भी आ सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि आप छोटा सोचोगे तो आपको छोटा ही मिलेगा। इसलिए हमेशा बड़ा और सकारात्मक ही सोचना चाहिए।

चिंता चिता से भी बुरी होती है

एक बार एक शिक्षक बच्चों की क्लास लेने के दौरान अपने हाथ में एक पानी भरा गिलास लेकर आए। और उन्होंने बच्चों से पूछा, बच्चों बताओ इसका कितना वजन होगा। जिस पर किसी बच्चे ने कहा 50 ग्राम तो किसी ने बताया 100 ग्राम। उसके बाद शिक्षक ने कहा यदि मै थोड़ी देर तक इसे ऐसे ही पकड़ा रहूं। तो क्या होगा। बच्चों ने कहा कुछ नहीं। शिक्षक ने बच्चों से फिर पूछा यदि मैं इस गिलास को दिन भर पकड़ा रहूं तब क्या होगा। तो बच्चे बोले सर ऐसे तो आपका हाथ थक जाएगा। एक बच्चे ने कहा सर आपकी मांसपेशियों में तनाव हो सकता है। तो वहीं एक बच्चा तपाक से बोला सर कहीं इस वजह से आपका हाथ लकवा ना मार जाए, इसके चलते आपको हॉस्पिटल नहीं जाना पड़ जाए। बच्चे का जवाब सुनकर शिक्षक हंस पड़े। शिक्षक ने फिर से बच्चों से पूछा अच्छा अगर मेरे हाथ में इसे पकड़े पकड़े दर्द हो जाए, तो मुझे क्या करना चाहिए। तब बच्चों ने कहा आपको इस गिलास को नीचे रख देना चाहिए। जिस पर शिक्षक ने बच्चों को समझाया कि ठीक इसी प्रकार से यदि हम जीवन में आने वाली कठिनाइयों के साथ करें। तो कोई समस्या समस्या लगेगी ही नहीं। क्यूंकि जब हम किसी समस्या को लेकर दिन भर विचार करते रहते हैं, तो वह हमें बीमार बना देती है। इसलिए हमें सदैव ऊर्जावान रहते हुए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। नाकि किसी समस्या को दिन भर लिए बैठना चाहिए।

संघर्ष के बिना सफलता का कोई महत्व नहीं

एक बार एक व्यक्ति अपने बगीचे में टहल रहा था कि तभी उसे तितली का एक कोकून नजर आया। जिसे वह बड़े ही गौर से देख रहा था। अगले दिन जब उसने फिर से उसे देखा कि तभी उसने पाया कि अब कोकून में एक छेद हो गया है। जिसमें से एक तितली बाहर निकलने का प्रयास कर रही है। पर लाख कोशिशों के बावजूद वह उसमें से बाहर नहीं निकल पा रही है। जिसे देख वह व्यक्ति उस तितली की मदद करना चाहता था। ऐसे में उसने केंची के माध्यम से उस कोकून का मुंह काफी बड़ा कर दिया। और जिसमें से वह तितली बाहर निकल अाई। और अब वह व्यक्ति यह देखना चाहता था कि वह तितली कैसे उड़ती है। लेकिन कोकून से बाहर निकलने के बाद तितली का शरीर और पंख सूज गए थे। और ऐसे में वह तितली कभी उड़ नहीं सकी। जिसे देख उस व्यक्ति को काफी मायूसी हुई। कहने का तात्पर्य यही है कि यदि आपको बिना संघर्ष के कोई सफलता प्राप्त होती है, तो वह आपको अपंग बना सकती हैं। जैसे कोकून में रहकर बाहर निकलने का प्रयास ही तितली को मजबूत बना सकता था। ठीक उसी प्रकार से संघर्षों से गुजरकर ही व्यक्ति काबिल बन पाता है।

प्रतिभावान व्यक्ति हमेशा सम्मान का पात्र होता है

एक बार एक व्यक्ति ने एक सभा के दौरान लोगों को 500 का नोट दिखाया। और पूछा किसे किसे यह नोट चाहिए, वह हाथ ऊपर उठाए। व्यक्ति की बात सुनकर शो में मौजूद सभी ने हाथ ऊपर उठा लिए। कि तभी उस व्यक्ति ने उस 500 के नोट को अपने हाथ से मसल दिया। जिसके बाद उसने पूछा कि अब किसे यह नोट चाहिए। जिस पर भी काफी लोगों ने हाथ खड़े कर दिए। व्यक्ति ने अबकी बार उस 500 के नोट को अपने पैरों से कुचल दिया। जिसके बाद उसने सभा में उपस्थित लोगों से पूछा, कि अब किसे यह नोट चाहिए। उसने देखा तब भी काफी लोगों के हाथ ऊपर उठे थे। उसने सभी को यह समझाने का प्रयास किया कि जैसे इस नोट को मैला करने के बावजूद लोग इसे मूल्यवान समझ रहे थे, क्यूंकि इस पर अंकित 500 रुपए की कीमत अब भी बरकरार थी। ठीक उसी प्रकार से एक प्रतिभावान व्यक्ति को चाहे कितने ही संघर्ष ना झेलने पड़े, लेकिन उसकी कीमत हमेशा रहती हैं। और चाहे कोई उसे कितना भी नीचा गिराने की कोशिश करें, वह सबको भेदता हुआ आगे बढ़ता है।

आलस्य त्यागकर ही धनवान बन सकते हैं

एक बार एक आश्रम में एक गुरु जी थे। जोकि अपने सभी शिष्यों में से अपने एक शिष्य को काफी प्रेम करते थे। और वह शिष्य भी उनसे उतना ही लगाव रखता था। लेकिन गुरु अपने उस शिष्य के आलस्य और कल पर काम टालने की आदत से बहुत परेशान रहा करते थे। वह सोचते थे कि ऐसे कैसे वह अपने जीवन का उचित तरीके से निर्वाहन कर पाएगा। जिसके चलते एक बार गुरु जी ने उसे एक सबक सिखाने की सोची। उन्होंने उसे एक पत्थर दिया और कहा कि तुम यदि इससे किसी भी लोहे की वस्तु पर रगड़ करोगे, तो वह सोने में परिवर्तित हो जाएगी। लेकिन तुम्हें इसे कल शाम तक मुझे वापस करना होगा। गुरु से उस पत्थर को पाकर वह शिष्य बहुत खुश हुआ। और उसने सोचा कि वह कल बाज़ार से बहुत सारा लोहा खरीदकर लाएगा, और उसे पत्थर पर रगड़कर काफी सारा सोना बना लेगा। अब सुबह होते ही वह शिष्य आलस्य के चलते यह सोचने लगा कि अभी उस पर काफी समय है, और ऐसा सोचते सोचते उसके दोपहर के भोजन का समय हो गया। और भोजन के बाद वह गहरी नींद में सो गया। और जब शाम को वह उठा, तो अंधेरा छा चुका था। और गुरु जी से लाख आग्रह करने के बाद भी उसे वह पत्थर नहीं मिला। और तब जाकर उसे एहसास हुआ कि जिसे पाकर उसकी जिंदगी बदल सकती थी, आलस्य के चलते उसने उसे खो दिया। आगे से उसने हर कार्य को निश्चित समय पर करने की ठान ली।

पैसे का लालच व्यक्ति को बर्बाद कर देता है

किसी गांव में एक बार बंदरों ने आतंक मचाया हुआ था। जिससे गांव वालों को निजात दिलाने के लिए एक व्यक्ति ने गांव वालों के सामने एक शर्त रखी कि जो कोई भी बंदर पकड़ लेकर आएगा। उसे वह 10 रुपए देगा। इस प्रकार गांव वालों ने इसे एक अच्छा समाधान समझकर उस व्यक्ति की बात मान ली। और बंदर पकड़वाकर काफी पैसा कमा लिया। कुछ दिन बाद उस व्यक्ति ने कहा कि अब जो बंदर पकड़ कर लाएगा वह उसे 25 रुपए देगा। जिस पर गांव वालों ने बचे कूचे बंदरों को भी पकड़वा दिया। इससे गांव वालों को जहां एक ओर बंदर के आतंक से छुटकारा मिल गया, तो वहीं उन्हें पैसे भी मिल गए। तो वहीं कुछ दिन बाद उस व्यक्ति ने दुबारा गांव वालों को प्रलोभन देते हुए कहा कि अब जो मुझे बंदर लाकर देगा तो मैं उसे 50 रुपए दूंगा। लेकिन अब गांव वालों को यह चिंता सता रही थी कि अब वह बंदर कहां से लाएंगे? क्यूंकि गांव से तो सारे ही बंदर पकड़वा दिए गए थे। ऐसे में उसी व्यक्ति के एक नौकर ने गांव वालों से कहा कि यदि वह चाहते है कि उन्हें बंदरों का 50 रुपए मिले, तो मालिक के आने से पहले वह उससे 35 रुपए देकर बंदर खरीद ले। जिस पर सारे गांव वाले राजी हो गए। फिर गांव वालों ने अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर बंदरों को खरीद लिया। उसके कुछ दिनों बाद गांव में दुबारा ना कभी वह व्यक्ति दिखाई दिया, और ना ही उसका नौकर। इस प्रकार अधिक के लालच में गांव वालेे अपनी सारी बचत से हाथ धो बैठे।

उम्मीद करते है आपको नैतिक कहानियों की यह श्रृंखला बेहद पसंद आई होगी। इसी तरह की और रोचक कहानियों को पढ़ने के लिए Gurukul99 पर दुबारा आना ना भूलें।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर रही हूं। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

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