पद परिचय – Pad Parichay in Hindi

पद की परिभाषा – Pad ki Paribhasha

हिंदी व्याकरण में पद शब्दों के उस व्यवस्थित क्रम को कहते हैं, जहां वह किसी प्रकार के विशेष नियम के साथ बंधे होते हैं। यानि जब कोई शब्द लिंग, वचन और कारक से जुड़ता है तब वह पद बन जाता है। यह शब्दों को जोड़कर वाक्य बनाने की सबसे पहली इकाई मानी जाती है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि हिंदी व्याकरण में वर्णों के मिलन से शब्द बनते है, शब्दों के मिलन से पद और फिर वाक्य बनते हैं। जैसे :- सीता स्कूल जाती है, हरि कपड़े धोता है। उपरोक्त में सीता और हरि शब्द है लेकिन वाक्य के रूप में प्रयोग होने से यह पद बन गए हैं।

पद के भेद – Pad ke Bhed

हिंदी भाषा में वर्णित पद मुख्यता ये होते हैं – संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और विशेषण

1. संज्ञा – संज्ञा के बिना हिंदी भाषा का ज्ञान अधूरा माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से किसी भी व्यक्ति, वस्तु और जगह को नाम की प्राप्ति होती है। इस प्रकार हिंदी व्याकरण में किसी भी  प्राणी और स्थान का नाम बताने वाले शब्दों को संज्ञा कहते हैं। जैसे – शीतल, गीता, सुमन, दिल्ली, किताब, भारत, पहाड़ आदि।

2. सर्वनाम – जिन शब्दों को संज्ञा के स्थान पर प्रयोग करते हैं वह सर्वनाम कहलाते हैं। यहां कोई भी शब्द किसी विशेष व्यक्ति के लिए न प्रयुक्त होकर समस्त लोगों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। जैसे – मैं, हम, तुम, वह, वे आदि।

3. क्रिया – जो शब्द विशेषकर किसी कार्य का होना या किसी के द्वारा करना बतलाते हैं वह क्रिया कहलाते हैं। यानि जिन शब्दों से कर्ता द्वारा किसी कार्य को सम्पन्न किया जाता है ऐसे शब्द क्रिया पदों की श्रेणी में आते हैं। जैसे – खेलना, खाना, दौड़ना, पढ़ना आदि।

4. विशेषण – जो शब्द मुख्यता संज्ञा या सर्वनाम से जुड़े शब्दों की विशेषता बतलाते हैं, वह विशेषण कहलाते हैं। विशेषण के अंतर्गत किसी प्राणी, वस्तु और जगह के बारे में विशेष टिप्पणी की जाती है। ऐसे शब्द विशेषण पदों की गिनती में आते हैं। जैसे – सुंदर, मोटा, बुरा, अच्छा, पुराना आदि।

हिंदी भाषा में मौजूद अन्य पद अव्यय की श्रेणी में रखे जाते हैं। अव्यय उन शब्दों को कहा जाता है, जिनमें लिंग, वचन और कारक के आधार पर कोई परिवर्तन नहीं होता है। इनमें क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चय बोधक, विस्मयादिबोधक आदि प्रमुख पद शामिल हैं।

1. क्रिया विशेषण – जिन शब्दों के माध्यम से क्रिया की विशेषता का बोध होता है वह क्रिया विशेषण कहलाते हैं। क्रिया विशेषण के माध्यम से कर्ता की क्रिया से संबधित दिशा, काल, परिमाण आदि के बारे में जानकारी मिलती है। जैसे – आगे, पीछे, प्रतिदिन, अति, अधिक, इतना, किसलिए आदि शब्द वाक्यों में प्रयोग के बाद क्रिया विशेषण पद बन जाते हैं।

2. संबंधबोधक – जिन शब्दों के माध्यम से वाक्य में प्रयुक्त अन्य शब्द संज्ञा से जुड़ते हैं वह संबंधबोधक पद कहलाते हैं। यानि जो शब्द वाक्य में संज्ञा का संबंध अन्य शब्दों से कराते हैं और  साथ ही वाक्य की पूर्ति भी करते हैं। वह संबंधबोधक शब्द होते हैं। जैसे – तक, बिना, भर, अतिरिक्त, के लिए, पर्यन्त आदि।

3. समुच्चय बोधक – जो शब्द दो वाक्यों को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं। वह समुच्चय बोधक शब्द कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में, जिन शब्दों के माध्यम से एक वाक्य दूसरे वाक्य से परस्पर मिलते है वह समुच्चय बोधक शब्द होते हैं। जैसे – और, कि, तथा, बल्कि, वरना, लिहाजा आदि।

4. विस्मयादिबोधक – जिन शब्दों में हृदय से निकलने वाली भावनाओं सुख, दुख, शोक, घृणा आदि को व्यक्त किया जाए वह विस्मयादिबोधक शब्द कहलाते हैं। जैसे – वाह, आह, क्या, अरे, हाय आदि।

पद के भेदों से मिलकर बना एक उदाहरण- Pad Example

अरे ! लड़के वाले आ चुके है और तुम अभी तक तैयार नहीं हुई।

उपरोक्त उदाहरण में अरे (विस्मयादिबोधक), लड़के वाले ( संज्ञा और विशेषण), आ चुके है (क्रिया), और (समुच्चयबोधक), तुम (सर्वनाम), अभी तक (क्रिया विशेषण), तैयार नहीं हुई (क्रिया) आदि पद शामिल है।


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और मैंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.