अब्राहम लिंकन के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग – Motivational Story

Abraham Lincoln Motivational story in Hindi

दास प्रथा का अंत करने वाले अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को कौन नहीं जानता होगा। इनका जन्म साल 1861 को अमेरिका के एक गरीब अश्वेत परिवार में हुआ था। अब्राहम लिंकन अमेरिका के पहले ऐसे रिपब्लिकन थे, जो अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे।

इतना ही नहीं इनके कार्यकाल में ही अमेरिका को ग्रह युद्ध के संकट से बचाया गया था। ऐसे में आज हम अब्राहम लिंकन के जीवन से जुड़े ऐसे प्रेरक प्रसंग लेकर आए हैं। जो आपको जीवन में नैतिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।


1. कोई भी काम छोटा या बड़ा नही होता है।

एक बार कुछ अधिकारी खड़े होकर मजूदरों से एक बड़े यंत्र को गाड़ी पर लादने के लिए कह रहे थे। लेकिन वह यंत्र इतना भारी था। कि चंद मजदूरों के प्रयास के बावजूद भी गाड़ी में लद नहीं पा रहा था। जिस पर पास खड़े अधिकारी मजूदरों को कोस रहे थे।

तभी एक घुड़सवार अपने कुछ साथियों के उसी रास्ते से गुजर रहा था। कि उन्होंने उन मजदूरों को मेहनत करते देखा। और रूककर उनकी मदद करने लगे। फिर मजूदरों और घुड़सवारों की मदद से वह बड़ा सा यंत्र गाड़ी में लदवा दिया गया।

जिसके बाद उस घुड़सवार ने पास खड़े अधिकारियों से कहा आगे से जब भी कोई भारी यंत्र लदवाने में तुम्हें परेशानी आए। तो तुम अपने देश के राष्ट्रपति को याद कर लेना। और जब अधिकारियों को यह समझ आया कि वह घुड़सवार और कोई नहीं बल्कि देश के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन हैं।

तो वह सब अपने व्यवहार पर बहुत शर्मिंदा हुए। लेकिन अब्राहम लिंकन ने उन अधिकारियों को समझाया कि जैसे हर मनुष्य बराबर होता है, ठीक उसी प्रकार से किसी कार्य में भी भेदभाव नहीं करना चाहिए। क्यूंकि छोटे कार्यों को पूर्ण करके ही व्यक्ति सफलता की  सीढ़ी तक पहुंच पाता है। 


2. मुश्किल में पड़े किसी व्यक्ति की मदद करना ही मानवीय गुण है।

एक बार अब्राहम लिंकन अपने दोस्तों के साथ शाम को टहलकर वापिस आ रहे थे। कि रास्ते में उन्हें एक घोड़ा मिला। जिसकी पीठ पर जीन तो कसी थी, लेकिन उसका मालिक नहीं था। जिस पर अब्राहम ने उसके मालिक को खोज निकालने की ठान ली। हालांकि उनकी इस जिद से उनके दोस्त उनसे काफी नाराज हुए। और उन्हें अकेला छोड़ कर वहां से चले गए।

लेकिन अब्राहम लिंकन अकेले ही उस घोड़े के मालिक को ढूंढने निकल पड़े। और रास्ते में उन्हें एक शराबी व्यक्ति मिला। जिसे अब्राहम अपने घर से आए। जिस पर अब्राहम की बहन उनसे काफी नाराज हुई।

लेकिन अब्राहम बचपन से ही काफी दयालु प्रवृत्ति के थे। ऐसे में उन्होंने सबसे पहले उस शराबी व्यक्ति को नहलाया और कपड़े पहनाए। उसके बाद जब उसे होश आया तो उसे भोजन कराया। तत्पश्चात् सुबह होने पर उस व्यक्ति ने अब्राहम लिंकन को धन्यवाद दिया और अपना घोड़ा लेकर चला गया।

अब्राहम लिंकन ने अपने बचपन की इस घटना को याद करते हुए लोगों को यह संदेश दिया कि यदि किसी व्यक्ति को आपकी मदद की जरूरत पड़े। तो अवश्य करें, क्यूंकि किसी व्यक्ति की मदद करना मानवीय गुण है।


3. क्रोध को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

एक बार अमेरिका के रक्षा मंत्री ने सेना के एक प्रमुख अधिकारी को एक आदेश भेजा। लेकिन वह अधिकारी उस आदेश का पालन करने में असफल रहा। जिस पर क्रोधित होकर रक्षा मंत्री अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पास गए।

और उनसे बोले कि अब मैं सेना के उस अधिकारी को कठोर शब्दों में एक पत्र लिखूंगा। क्यूंकि उसने मेरे आदेश का पालन नहीं किया। जिस पर अब्राहम लिंकन ने रक्षा मंत्री से कहा। ठीक है आप एक पत्र लिखिए और उसमें कठोर शब्दों का प्रयोग करें।

पत्र लिखने के बाद रक्षा मंत्री उसे पढ़ाने के लिए अब्राहम लिंकन के पास लाए। अब्राहम लिंकन ने तुरंत उन्हें पत्र फाड़ने को कह दिया। वो बोले कि मैं भी गुस्से में पत्र लिखता हूं। और फिर उसे फाड़ देता हूं। इससे मेरा गुस्सा भी शांत हो जाता है।

क्यूंकि क्रोध और गुस्से के आवेश में आकर व्यक्ति हमेशा गलत ही निर्णय लेता है। इसलिए मनुष्य को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए, उसे खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।


4.  व्यक्ति यदि ठान लें तो वह असंभव को संभव कर सकता है।

अब्राहम लिंकन बचपन से ही पढ़ने का शौक रखते थे। लेकिन उनके पिता जी गरीब थे, जिस वजह से अब्राहम लिंकन के पास किताबें खरीदने के लिए अधिक पैसा नहीं हुआ करता था। एक बार अब्राहम लिंकन को मालूम पड़ा कि उनके शिक्षक एंड्रू क्राफर्ड के पास जॉर्ज वॉशिंगटन की जीवनी है। जिसको पढ़ने के लिए उन्होंने अपने शिक्षक से काफी मन्नत की। और उन्होंने वह किताब अब्राहम को पढ़ने के लिए दे दी।

लेकिन एक बार अचानक किताब पढ़ते पढ़ते अब्राहम की आंख लग गई। और रात को बारिश की बोछार के चलते किताब भीग गई। और जब अब्राहम दुखी मन से वह किताब लेकर अपने शिक्षक के पास पहुंचे। तो उन्होंने अब्राहम की बहुत फटकार लगाई। और उनसे कहा कि  तुमने मेरी पुस्तक खराब कर दी है। अब या तो तुम इसके पैसे भरो या मेरे खेत में तीन दिन तक काम करो।

तभी यह किताब तुम्हारी हो पाएगी। लेकिन अब्राहम के पास शिक्षक को देने के लिए पैसे नहीं थे। जिसके बाद अब्राहम ने उनके खेत में लगन से तीन दिन तक काम किया। और उस पुस्तक को पा लिया। पुस्तक पाते ही अब्राहम लिंकन ने ठान लिया कि वह भी जॉर्ज वॉशिंगटन की तरह बनेंगे। और आगे चलकर वह अमेरिका के राष्ट्रपति बने।

अब्राहिम लिंकन को बचपन से ही क्या पढ़ने का शौक था?

अब्राहिम लिंकन की सबसे प्रिय पुस्तक “The life of George Washington” थी। जिसे वह बड़े ही चाव से पढ़ा करते थे। साथ ही उन्होंने बचपन में ही Robinson Crusoe, pilgrim’s progress, Aesop’s fables आदि के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया था।

5. किसी को कभी शिकायत का मौका नहीं देना चाहिए।

एक बार जब अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन अपने गांव के समीप एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। तभी एक महिला ने खड़े होकर कहा। अरे यह राष्ट्रपति है…यह तो हमारे गांव के मोची का लड़का है। जिस पर अब्राहम लिंकन ने बड़े ही आदर से उस महिला से कहा। महोदया ! आपका बहुत बहुत आभार। जो आपने मेरी सच्चाई सबके सामने रखी। ऐसे में अब मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं। वो महिला बोली हां पूछ सकते है।

जिस पर अब्राहम लिंकन ने उस महिला से पूछा कि क्या आपको कभी मेरे पिता के काम में कोई शिकायत मिली। तो वो महिला तुरंत बोल पड़ी कि नहीं आपके पिता जी के काम में कोई शिकायत नहीं थी, वह ईमानदारी से अपना कार्य किया करते थे।

जिस पर अब्राहम लिंकन ने कहा, ठीक उसी प्रकार से आप लोगों को मेरे कार्य में भी कोई शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। और मैं जो भी कार्य करूंगा वो पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करूंगा। यह अब्राहम लिंकन के ही प्रयासों का फल रहा कि उन्होंने अमेरिका से दास प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।


इस प्रकार अब्राहम लिंकन के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि यदि जीवन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो व्यक्ति असंभव को संभव बना सकता है। और यदि कोई व्यक्ति सुविधाओं का हवाला देकर अपनी असफलता को दर्शाता है। तो उसे भी अब्राहम लिंकन के प्रेरक प्रसंगों से शिक्षा लेनी चाहिए। क्यूंकि इन्होंने अभावों में जैसा जीवन जिया। वहां से बाहर निकलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनना आसान नहीं है।


इसके साथ ही हमारा आर्टिकल – Abraham Lincoln Motivational story in Hindi समाप्त होता है। आशा करते हैं कि यह आपको पसंद आया होगा।

यह भी पढ़ें-


अंशिका जौहरी

मेरा नाम अंशिका जौहरी है और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर रही हूं। मुझे सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से लिखना और बोलना पसंद है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page.